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दिल्ली के सरकारी स्कूलों ने प्राइवेट को पछाड़ा, जानें कैसे बदला माहौल?

नई दिल्ली : लगातार दूसरे साल सीबीएसई की बारहवीं के नतीजों में दिल्ली के सरकारी स्कूलों ने प्राइवेट स्कूलों को पीछे छोड़ दिया है. रविवार को घोषित हुए इस साल के नतीजों में जहां प्राइवेट स्कूलों के 79.27% बच्चे पास हुए वहीं सरकारी स्कूलों का पास प्रतिशत 88.27 रहा. इस तरह पास प्रतिशत के मामले में दिल्ली के सरकारी स्कूल प्राइवेट स्कूलों से 9 फीसदी आगे रहे. इसके अलावा पास प्रतिशत के राष्ट्रीय औसत से भी दिल्ली सरकार के स्कूल आगे रहे.

पिछले साल भी निजी स्कूलों के मुकाबले सरकारी स्कूल का पास प्रतिशत 2.24 फीसदी ज्यादा था. इस साल ये आंकड़ा काफी ज्यादा है. ये इसलिए अहम है क्योंकि अक्सर सरकारी स्कूलों को प्राइवेट स्कूलों के मुकाबले कमतर आंका जाता है.

हालांकि पिछले साल की तुलना में इस साल दिल्ली के सरकारी स्कूलों का पास प्रतिशत घटा है. पिछले साल यानी 2016 में ये जहां 88.91% था वहीं इस साल ये 88.27% ही रहा. लेकिन प्राइवेट स्कूलों का पास प्रतिशत पिछले साल के मुकाबले काफी गिर गया, नतीजतन पास प्रतिशत के आंकड़ों में दिल्ली के सरकारी स्कूलों ने प्राइवेट स्कूलों को काफी पीछे छोड़ दिया.

दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने इसे अपनी सरकार की बड़ी उपलब्धि करार दिया. सिसोदिया ने कहा कि इस साल परीक्षा में नकल पर लगाम लगाने के लिए काफी सख्ती बरती गई थी. इस वजह से उन्हें पासिंग प्रतिशत घटने की आशंका थी, लेकिन नतीजों से वो काफी खुश हैं. सरकारी स्कूलों के अच्छे प्रदर्शन के लिए सोशल मीडिया पर सिसोदिया को बधाईयां भी मिली.

शिक्षा को अपनी सबसे पहली प्राथमिकता बताने वाली केजरीवाल सरकार के पास अपनी पीठ थपथपाने का दोहरा मौका है. एक तरफ बारहवीं के नतीजों में सरकारी स्कूलों का पास प्रतिशत प्राइवेट स्कूलों के मुकाबले 9 फीसदी ज्यादा रहा. वहीं सरकारी स्कूलों के 372 बच्चों ने IIT JEE की परीक्षा पास की है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर

उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के पास शिक्षा, वित्त जैसे कई महत्वपूर्ण विभाग हैं, लेकिन शिक्षा विभाग उनकी प्राथमिकता रहा है. बारहवीं के नतीजों में सरकारी स्कूलों के शानदार प्रदर्शन को उनकी 2 सालों की मेहनत के परिणाम के तौर पर देखा जा रहा है. उनकी सलाहकार आतिशी मर्लिना ने हमें बताया कि सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन सुधारने के लिए कौन कौन से कदम उठाए गए. आतिशी के मुताबिक-

- सिसोदिया ने ना केवल शिक्षा का बजट बढ़ाया बल्कि जम कर स्कूलों का औचक निरीक्षण भी किया. इससे माहौल बदलना शुरू हुआ.

- दिल्ली के लगभग हजार स्कूलों में स्कूल मैनेजमेंट कमिटी को एक्टिव किया गया, जिसमें की अविभावकों की भागीदारी महत्वपूर्ण थी.

- खानापूर्ति की बजाय शिक्षकों की ट्रेनिंग को गंभीरता से लिया गया. अच्छे प्रधानाचार्यों का तबादला कमजोर स्कूलों में किया गया. छुट्टियों में कमजोर छात्रों के लिए अलग से क्लास की व्यवस्था की गई तो बोर्ड परीक्षा से पहले "एक्जाम टिप्स" और "मोटिवेशनल टॉक्स" दिए गए.

- 200 मेंटर टीचर बनाए गए. प्रत्येक को 5 स्कूल की जिम्मेदारी दी गई. तो वहीं शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने अलग अलग 50 कमजोर स्कूलों को गोद लिया. आतिशी ने बताया कि शिक्षा विभाग में अतिरिक्त निदेशक सुनीता कौशिक ने सुल्तानपुरी के सर्वोदय कन्या विद्यालय को गोद लिया था. पिछले साल इस स्कूल के करीब 40% बच्चे ही पास हुए थे जो इस साल बढ़ कर करीब 80% तक पहुंच गया. जानकारी के मुताबिक इस साल से सिसोदिया दिल्ली के सभी प्रशासनिक अधिकारियों से एक स्कूल को गोद लेने को कहेंगे.

कुल मिला कर कहें तो दिल्ली के सरकारी स्कूलों के बदले माहौल के पीछे टीम-सिसोदिया की कई स्तर की निगरानी और नए-नए आईडियाज हैं. इसने सरकारी स्कूलों को लेकर बनी धारणा को तोड़ने का काम किया है लेकिन अभी भी काफी काम बाकी है.

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