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Gold Demand: भारत में सोने की खरीदारी का बढ़ा रुझान, WGC की रिपोर्ट में सुनहरी मेटल पर दिखा भारतीयों का लगाव

World Gold Council Gold Trend Report: दुनियाभर में सोने की खरीदारी को लेकर रुझान बढ़ता जा रहा है और ये कोविडकाल से पहले की स्थिति को छू चुकी है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने गोल्ड ट्रेंड्स की रिपोर्ट निकाली है.

World Gold Council Report: दुनिया में सोने की खरीदारी को लेकर लोगों का प्यार बढ़ता ही जा रहा है, खास बात ये है कि इसमें निवेश को लेकर लोगों को इतना उत्साह नहीं है जितना गहनों या फिजिकल गोल्ड के तौर पर खरीदारी को लेकर रुझान देखा जाता है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की नई गोल्ड डिमांड ट्रेंड्स रिपोर्ट से पता चला है कि सोने की मांग में सालाना आधार पर 28 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. मांग में आई तेज़ी सोने की सालाना मांग का स्तर कोविड से पहले के स्तर पर पहुंच गया है. 

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट में क्या है
जुलाई-सितंबर 2022 यानी तीसरी तिमाही में सोने की मांग (ओटीसी को छोड़कर) 1181 टन के स्तर पर पहुंच गई है और सोने की मांग में यह तेज़ी कस्टमर्स और केंद्रीय बैंकों की वजह से आई, हालांकि निवेश मांग में गिरावट दर्ज की गई.

सोने को लेकर बढ़ा लोगों का प्यार, जमकर की खरीदारी
जुलाई-सितंबर तिमाही में भारत में सोने की मांग में 14 फीसदी का इजाफा देखा गया है और ये 191.7 टन पर आई है जबकि जुलाई-सितंबर 2021 में सोने की मांग 168 टन  पर पर रही थी. वहीं गोल्ड डिमांड वैल्यू को लेकर बात करें तो जुलाई-सितंबर तिमाही 2022 में सोने की डिमांड वैल्यू 85010 करोड़ रुपये रही जबकि जुलाई-सितंबर तिमाही 2021 में सोने की डिमांड वैल्यू 71630 करोड़ रुपये रही थी यानी इस साल तीसरी तिमाही में ये कुल 19 फीसदी बढ़ी है.

तीसरी तिमाही में भारत में सोने के गहनों की मांग भी जोरदार रही
जुलाई-सितंबर तिमाही 2022 में सोने के गहनों की मांग 146.2 टन रही जबकि जुलाई-सितंबर तिमाही 2021 में सोने के गहनों की मांग 125.1 टन रही थी. यानी इस साल की तीसरी तिमाही में देश में कुल सोने के गहनों की मांग 17 फीसदी बढ़ी है.


Gold Demand: भारत में सोने की खरीदारी का बढ़ा रुझान, WGC की रिपोर्ट में सुनहरी मेटल पर दिखा भारतीयों का लगाव

सोने में निवेश घटा है- वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल
सालाना आधार पर निवेश में 47 फीसदी गिरावट दर्ज की गई क्योंकि ईटीएफ निवेशकों ने उच्च ब्याज दरों और मज़बूत अमेरिकी डॉलर की चुनौती को देखते हुए कारोबार किया जिसकी वजह से 227 टन की निकासी दर्ज की गई. इन गतिविधियों के साथ-साथ ओटीसी मांग में कमज़ोरी और फ्यूचर बाज़ारों में नकारात्मक भावनाओं की वजह से सोने की कीमतों पर बुरा असर पड़ा- 2022 की तीसरी तिमाही के दौरान तिमाही आधार पर सोने की कीमतों में 8 फीसदी की गिरावट देखने को मिली.

तुर्की, जर्मनी में भी हुई सोने की जबरदस्त खरीदारी
इन मुश्किलों के बावजूद सोना रिटेल निवेशकों के बीच लोकप्रिय बना रहा जिन्होंने बाज़ार की अलग-अलग परिस्थितियों के हिसाब से प्रतिक्रिया दी और बढ़ती महंगाई व जियो-पॉलिटिकल अनिश्चितता के बीच मूल्यवान होने की वजह से सोने का रुख किया. निवेशकों ने सोने के बार और सिक्कों से महंगाई का मुकाबला किया जिससे कुल रिटेल मांग सालाना आधार पर 36 फीसदी बढ़ गई. तुर्की (सालाना आधार पर पांच गुना से ज़्यादा) और जर्मनी (सालाना आधार पर 25 फीसदी बढ़कर 42 टन) में हुई जबरदस्त खरीदारी से इस रुझान को बल मिला, लेकिन सभी प्रमुख बाज़ारों ने इसमें महत्वपूर्ण योगदान दिया.

गहनों की खरीदारी कोविडकाल से पहले से स्तर तक आई
आभूषण की खपत में बढ़ोतरी का रुझान जारी रहा और अब यह महामारी से पहले के स्तर पर पहुंच गया और 523 टन रहा जो 2021 की तीसरी तिमाही के मुकाबले 10 फीसदी ज़्यादा रहा. इस वृद्धि में भारत के शहरी उपभोक्ताओं ने महत्वपूर्ण योगदान दिया जिससे मांग सालाना आधार पर 17 फीसदी बढ़कर 146 टन के स्तर पर रही. इसके साथ ही सऊदी अरब में आभूषणों की खपत में 2021 की तीसरी तिमाही में 20 फीसदी वृद्धि देखने को मिली, वहीं संयुक्त अरब अमीरात में भी इस दौरान 30 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई और इस तरह लगभग पूरे मध्य पूर्व में जबरदस्त वृद्धि देखने को मिली. चीन में भी उपभोक्ताओं के बढ़े हुए आत्मविश्वास और सोने की स्थानीय कीमतों में गिरावट की वजह से आभूषणों की मांग में सालाना आधार पर 5 फीसदी की वृद्धि देखने को मिली जिससे मांग में बढ़ोतरी हुई. 

क्या कहना है वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल का
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के सीनियर मार्केट्स एनालिस्ट लुई स्ट्रीट ने कहा कि "वृहद आर्थिक परिदृश्य में अनिश्चितताओं के बीच इस वर्ष की मांग ने यह बात साफ हो गई है कि सोने को अब भी सुरक्षित निवेश माध्यम का दर्जा हासिल है. एक तथ्य यह भी है कि 2022 में सोने का प्रदर्शन निवेश के अन्य माध्यमों के मुकाबले बेहतर रहा.आने वाले समय में हमारा अनुमान है कि केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और रिटेल निवेश मज़बूत बना रहेगा और इससे ओटीसी व ईटीएफ निवेश में आने वाली कमी की भरपाई करने में मदद मिलेगी. डॉलर के मज़बूत बने रहने पर ओटीसी और ईटीएफ निवेश में कमी बनी रहेगी. हमें यह भी उम्मीद है कि आभूषणों की मांग कुछ क्षेत्रों में मज़बूत बनी रहेगी जैसे कि भारत और दक्षिणपूर्व एशिया. इसके साथ ही टैक्नोलॉजी सेक्टर में वैश्विक अर्थव्यवस्था के असर की वजह से गिरावट बनी रहने की आशंका है."

केंद्रीय बैंक बढ़ा रहे हैं खरीदारी
ग्राहकों के बीच सोने की मांग में मज़बूती आने के साथ केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीदारी में भी तेज़ी देखने को मिली. इस दौरान तीसरी तिमाही के दौरान केंद्रीय बैंकों ने करीब 400 टन की रिकॉर्ड खरीदारी की. यह पैटर्न, केंद्रीय बैंकों के बीच किए गए सर्वे से मिली जानकारी को दर्शाता है जिसमें 25 फीसदी प्रतिभागियों ने कहा कि वे अगले 12 महीनों के दौरान अपने गोल्ड रिज़र्व को बढ़ाना चाहते हैं.

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