By: ABP News Bureau | Updated at : 29 Jul 2016 11:38 AM (IST)
नई दिल्लीः पूरे देश को एक बाजार बनाने वाली वस्तु व सेवा कर व्यवस्था यानी जीएसटी के लिए जरुरी संविधान संशोधन विधेयक पर अगले हफ्ते राज्यसभा में चर्चा होगी. राज्यसभा में कार्यसूची में इस विधेयक को शामिल करने की जानकारी संसदीय कार्य राज्य मत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने दी.
अप्रत्यक्ष कर की नयी व्यवस्था को सरकार अगले साल पहले अप्रैल से लागू करना चाहती है. इसके लिए जरुरी संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा से हरी झंडी मिल चुकी है, लेकिन कांग्रेस की आपत्तियो की वजह विधेयक राज्यसभा में अभी तक पारित नहीं हो सका. ध्यान रहे कि संविधान संशोधन विधेयक को संसद के दोनों सदनों में कम से कम दो तिहाई बहुमत से पारित कराना जरुरी है. चूंकि राज्यसभा में सरकार अल्पमत में है, इसीलिए कांग्रेस के समर्थन की उसे दरकार है. इस दिशा में सरकार और कांग्रेस की कई दौर की बैठक हो चुकी है जबकि वित्त मंत्री अलग-अलग राजनीतिक दलों के साथ विचार-विमर्श कर रहे हैं.
विधेयक जल्द राज्यसभा में लाए जाने की उम्मीद उस समय बढ़ गयी जब बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट ने संविधान संशोधन विधेयक में फेरबदल पर मंजूरी जता दी. कांग्रेस समेत विभिन्न राज्यों की मांग के मद्देनजर 1 फीसदी के अतिरिक्त टैक्स के प्रावधान को हटाने का फैसला किगा गया. साथ ही जीएसटी लागू होने के बाद पांच सालों तक पूरी भरपाई का प्रस्ताव भी मंजूर हो गया. पहले, घाटे की भरपाई तीन सालों तक सौ फीसदी, चौथे साल में 75 फीसदी औऱ पांचवे साल में 50 फीसदी करने का प्रस्ताव था. लेकिन राज्य सरकारें और संसद की सेलेक्ट कमेटी ने इसमें फेरबदल का सुझाव दिया जिसे कैबिनेट ने मान लिया.
हालांकि अभी ये तय नहीं कि जीएसटी दर की ऊपरी सीमा को संविधान में गढ़ने पर कांग्रेस की मांग को लेकर सरकार ने क्या रूख अपनाया है. वैसे इस बात के आसार हैं कि जीएसटी की ऊपरी दर को संविधान संशोधन के बजाए दूसरे कानून जैसे सीजीएसटी कानून में रखे जाने पर सहमति बन सकती है. कांग्रेस भी इस सुझाव पर नरम दिखायी दे रही है. गुरुवार को कांग्रेस के उच्च पदस्थ सूत्रों ने कहा कि जीएसटी पर प्रगति सही दिशा में जा रही है.
संसद के दोनों सदनों से संविधान संशोधन विधेयक के मंजूरी मिलने के बाद उस पर कम से कम 15 राज्यों के विधानसभाओं की मंजूरी चाहिए होगी. फिर राष्ट्पति बिल पर हस्ताक्षर करेंगे जिससे ये कानून बन सकेगा. इसके बाद केंद्र सरकार को सेंट्रल जीएसटी और राज्य सरकारों को स्टेट जीएसटी से जुड़ा कानून बनाना होगा. साथ ही केंद्र सरकार को इंटिग्रेटेड जीएसटी के लिए अलग से कानून बनाना होगा. ये सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही जीएसटी के नियम बनाए जाएंगे जिस पर काम पहले से ही चालू है. केंद्र सरकार की योजना अगले साल पहली अप्रैल से जीएसटी लागू करने की है. सरकार और उद्योग जगत दोनों का ही मानना है कि जीएसटी लागू हुआ तो जीडीपी में कम से कम 2 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है और पूरे देश में कारोबार करना और आसान हो जाएगा.
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