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दिल्ली की सभी लोक अदालतों में नहीं निपटेगा चालान, कैसे जानें सही कोर्ट?

दिल्ली में ट्रैफिक चालान माफ कराने के लिए नेशनल लोक अदालत लगने जा रही है. जानिए सभी अदालतों में चालान क्यों नहीं निपटेंगे और सही कोर्ट का पता कैसे लगाएं.

हमारे देश की राजधानी दिल्ली में हर दिन हजारों लोगों का चालान कटता है. जिसके बाद लोग उसे कम या माफ कराने के लिए कोर्ट का सहारा लेते हैं. क्योंकि दिल्ली में अक्सर ऐसे कोर्ट लगते हैं जहां चालान को कम और माफ किया जाता है. लेकिन ऐसा देखा जाता है कि लोगों के मन में एक सवाल जरुर रहता है कि किसी भी अदालत या लोक अदालत परिसर में जा सकते हैं. तो आपको यह बता दें कि दिल्ली के सभी चालान हर अदालत में नहीं निपटाए जाते हैं.

अगर आप भी लोक अदालत में अपना चालान माफ या कम करवाकर खत्म करना चाहते हैं तो आपको यह जानना बेहद जरूरी है कि आप अपने चालान के हिसाब से सही कोर्ट का पहचान करें. गलत जगह जाने पर आपका समय बर्बाद हो सकता है और वहां आपका चालान प्रोसेस नहीं हो पाएगा. चलिए जानते हैं कि दिल्ली में लोक अदालत के लिए सही कोर्ट का चुनाव कैसे किया जाता है और इसके लिए किन बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है.

चेक करें चालान की स्थिति

आपको बता दें कि हमेशा ही लोक अदालत में जाने से पहले यह चेक करना सबसे जरूरी है कि आपका चालान किस स्थिति में है. दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के नियमों के अनुसार जो चालान वर्चुअल कोर्ट में ट्रांसफर हो चुके होते हैं. केवल वही लोक अदालत के लिए मान्य होते हैं.

जबकि इसके लिए आपको दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट या डिजिटल ट्रैफिक लोक अदालत पोर्टल पर जाना होगा. वहां अपनी गाड़ी का नंबर या चालान नंबर दर्ज करके यह देखना होता है कि आपका चालान किस कोर्ट या वर्चुअल ज्यूरिडिक्शन के अंडर पेंडिंग दिखा रहा है.

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इन अदालत में होती है सुनवाई

अक्सर नेशनल लोक अदालत का आयोजन आमतौर पर चुनिंदा और मुख्य जिला अदालत परिसरों में ही किया जाता है. इसमें मुख्य रूप से तीस हजारी कोर्ट, कड़कड़डूमा कोर्ट, पटियाला हाउस कोर्ट, रोहिणी कोर्ट, साकेत कोर्ट, द्वारका कोर्ट और राउज एवेन्यू कोर्ट कॉम्प्लेक्स शामिल हैं.

जबकि आपके वाहन का चालान दिल्ली के किस इलाके या ट्रैफिक सर्किल में कटा है. उस हिसाब से उसका संबंध उसी क्षेत्र के संबंधित जिला न्यायालय से जोड़ा जाता है. जैसे ही पोर्टल पर ऑनलाइन टोकन जनरेट करते हैं वैसे ही आपको कोर्ट वेन्यू का विकल्प चुनने को मिलता है.

ऑनलाइन टोकन बुकिंग

जानकारी दें दे कि दिल्ली ट्रैफिक लोक अदालत में हिस्सा लेने के लिए ऑनलाइन पोर्टल के जरिए एडवांस में टोकन या अपॉइंटमेंट स्लिप लेना जरुरी होता है. बिना बुकिंग के सीधे अदालत पहुंच जाने पर एंट्री मिलना मुश्किल हो जाता है.

वहीं जब आप दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के लोक अदालत पोर्टल पर अपना वाहन नंबर डालकर डिटेल्स निकालेंगे. तो सिस्टम खुद ही आपको उस चालान के लिए निर्धारित सही कोर्ट और उपलब्ध स्लॉट की जानकारी दे देगा. आपको उसी के अनुसार अपना टोकन डाउनलोड करना होगा.

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क्या नुकसान हो सकता है?

जब भी कोई कार ओनर बिना ऑनलाइन स्टेटस चेक किए किसी भी नजदीकी कोर्ट में पहुंच जाता है तो वहां तैनात अधिकारी या बेंच उस चालान को स्वीकार नहीं करेगी. क्योंकि उस विशेष कोर्ट के सर्वर या डेटाबेस में आपका चालान लिंक नहीं होता है.

जबकि इसके अलावा लोक अदालत में जाने से पहले चालान की प्रिंटेड कॉपी, ऑनलाइन बुक किया गया टोकन, गाड़ी की आरसी, ड्राइविंग लाइसेंस और वैलिड इंश्योरेंस पेपर साथ रखना अनिवार्य होता है. इसलिए हमेशा आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपने क्षेत्र की अधिकृत अदालत की पुष्टि करने के बाद ही आगे बढ़ें.

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हिमांशु सिंह पिछले साढ़े तीन साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. फिलहाल वह ABP News में ऑटो बीट पर कार्यरत हैं. ऑटो सेक्टर में उन्हें नई कारों और बाइक्स के लॉन्च, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, फीचर्स, माइलेज, टेक्नोलॉजी और ऑटो मार्केट से जुड़ी खबरों की अच्छी जानकारी है. वह ऑटो से जुड़ी हर जरूरी और नई जानकारी आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करते हैं, ताकि लोग बिना किसी परेशानी के खबरों को समझ सकें.

ABP News से पहले हिमांशु DNP India, Sports Wiki और Hawk E Commerce के साथ काम कर चुके हैं. इस दौरान उन्होंने स्पोर्ट्स, राजनीति और वायरल खबरों पर भी काम किया. अलग-अलग बीट्स पर काम करने की वजह से उन्हें कई तरह की खबरों को समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने का अनुभव मिला.

हिमांशु की कोशिश रहती है कि उनकी खबरें सरल, भरोसेमंद और सीधे लोगों से जुड़ी हों. उन्हें ऐसी खबरों पर काम करना पसंद है, जिनका असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है. डिजिटल मीडिया की अच्छी समझ होने की वजह से वह ट्रेंडिंग और जरूरी खबरों को तेजी से पाठकों तक पहुंचाते हैं.

काम के अलावा हिमांशु को क्रिकेट खेलना, स्टैंडअप कॉमेडी करना और नई जगहों पर घूमना पसंद है. उनका मानना है कि नई जगहों को देखना और नए लोगों से मिलना सोच को बेहतर बनाता है, जिसका फायदा उनके काम में भी मिलता है.

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