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इलेक्ट्रिक टूथब्रश दांतों को नुकसान तो नहीं पहुंचाता? जानें कैसे करता है काम

आजकल नॉर्मल ब्रश छोड़कर इलेक्ट्रिक टूथब्रश काफी इस्तेमाल किया जा रहा है. लेकिन कई लोगों के मन में यह डर रहता है कि कहीं इसकी तेज मोटर दांतों और मसूड़ों को नुकसान न पहुंचा दे.जानें ये कैसे काम करता है

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  • इलेक्ट्रिक टूथब्रश दांतों को वाइब्रेशन और रोटेशन से साफ करता है।
  • एक्सपर्ट्स मानते हैं इलेक्ट्रिक ब्रश दांतों के लिए सुरक्षित होते हैं।
  • सेंसर और टाइमर ओवर-ब्रशिंग से दांतों को सुरक्षित रखते हैं।
  • हल्का दबाव, सही एंगल व हेड बदलना जरूरी है।

आजकल हर छोटी-बड़ी चीज स्मार्ट होती जा रही है. यहां तक कि सुबह-सुबह दांत साफ करने का तरीका भी. अब लोग पुराने तरीकों से दांत साफ नहीं करते हैं बल्कि आजकल इलेक्ट्रिक टूथब्रश का इस्तेमाल ज्यादा होने लगा है. बहुत से लोग अपने पुराने नॉर्मल ब्रश को छोड़कर इस बैटरी वाले ब्रश पर शिफ्ट हो रहे हैं. लेकिन आज भी एक बहुत बड़ा तबका ऐसा है जो इसे खरीदने से हिचकिचाता है. 

लोगों के मन में सबसे बड़ा डर यही रहता है कि मोटर से इतनी तेजी से घूमने वाला यह ब्रश कहीं हमारे दांतों की ऊपरी परत को घिस तो नहीं देगा. कुछ लोगों को यह भी लगता है कि इसके वाइब्रेशन से मसूड़े छिल जाएंगे और दांत कमजोर होकर हिलने लगेंगे. अगर आपके मन में भी इलेक्ट्रिक टूथब्रश को लेकर यही सारे सवाल घूम रहे हैं तो जान लें कि क्या वाकई इससे दांतों को कोई खतरा रहता है आखिर कैसे करता है यह काम.

कैसे काम करता है इलेक्ट्रिक टूथब्रश?

इलेक्ट्रिक टूथब्रश के काम करने का तरीका बेहद आसान होता है. इसके हैंडल के अंदर एक छोटी सी रिचार्जेबल बैटरी और मोटर लगी होती है जो ऊपर लगे ब्रिसल्स को तेजी से घुमाती और वाइब्रेट कराती है. बाजार में मुदो तरह के इलेक्ट्रिक ब्रश मिलते हैं. पहले वो जिनका गोल हेड दाएं-बाएं घूमता है और दूसरे सोनिक ब्रश जो हाई-स्पीड वाइब्रेशन के जरिए दांतों की सफाई करते हैं. 

जब हम हाथ वाले नार्मल ब्रश से दांत साफ करते हैं. तो एक मिनट में मुश्किल से 200 से 300 बार ही ब्रश को घिस पाते हैं. वहीं एक इलेक्ट्रिक टूथब्रश एक मिनट के अंदर हजारों बार मूवमेंट करता है. इसमें आपको अपने हाथ से ताकत लगाकर रगड़ने की जरूरत नहीं पड़ती. आपको बस ब्रश ऑन करके उसे एक दांत से दूसरे दांत पर हल्के हाथ से ले जाना होता है और यह कोनों में जमे प्लाक को खुद ही साफ कर देता है.


इलेक्ट्रिक टूथब्रश दांतों को नुकसान तो नहीं पहुंचाता? जानें कैसे करता है काम

क्या इससे होता है नुकसान?

अब आते हैं सबसे बड़े सवाल पर कि क्या यह दांतों को नुकसान पहुंचाता है. तो इस बारे में डेंटल एक्सपर्ट्स का कहना है कि इलेक्ट्रिक टूथब्रश दांतों को खराब नहीं करता बल्कि कई मामलों में यह नॉर्मल ब्रश से ज्यादा सेफ होता है. असल में हम लोग नार्मल ब्रश करते समय अनजाने में इतनी जोर से दांत रगड़ देते हैं. जिससे दांतों का इनेमल घिस जाता है और मसूड़ों से खून आने लगता है.  लेकिन आजकल के अच्छे इलेक्ट्रिक टूथब्रश में प्रेशर सेंसर लगा होता है.

जैसे ही आप दांतों पर जरूरत से ज्यादा दबाव डालते हैं. ब्रश की स्पीड अपने आप कम हो जाती है या वह बीप करने लगता है. इसके अलावा इसमें 2 मिनट का इन-बिल्ट टाइमर भी होता है. जो हर 30 सेकंड में हल्का सा रुककर आपको याद दिलाता है कि अब मुंह के दूसरे हिस्से की सफाई शुरू करें. इससे ओवर-ब्रशिंग का खतरा बिल्कुल खत्म हो जाता है.


इलेक्ट्रिक टूथब्रश दांतों को नुकसान तो नहीं पहुंचाता? जानें कैसे करता है काम

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इस्तेमाल करते वक्त न करें ये गलतियां

इलेक्ट्रिक टूथब्रश से नुकसान तभी होता है जब लोग इसे भी अपने पुराने देसी ब्रश की तरह ही इस्तेमाल करने लगते हैं. अगर आप इसे खरीदकर लाए हैं तो सबसे पहले इसे दांतों पर जोर-जोर से घिसने की आदत छोड़ दें. इसे मसूड़ों की लाइन पर 45 डिग्री के एंगल पर हल्के से टिकाएं और सारा काम इसकी मोटर पर छोड़ दें. हर दांत पर सिर्फ दो से तीन सेकंड रुकना काफी होता है. 

दूसरी जरूरी बात यह है कि अगर आपके दांतों में ठंडा-गर्म लगने की शिकायत है या फिर मसूड़े नाजुक हैं. तो इसमें हमेशा सेंसिटिव मोड और सॉफ्ट ब्रिसल्स वाले हेड का इस्तेमाल करें. ठीक नॉर्मल ब्रश की तरह ही इसके ऊपर का ब्रश हेड भी हर 3 महीने में बदल देना चाहिए, क्योंकि मुड़े हुए ब्रिसल्स मसूड़ों को छील सकते हैं. 

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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