धनौल्टी विधानसभा चेहरों की सीट, 2027 चुनाव में BJP की राह नहीं होगी आसान
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 के मद्देनजर मसूरी की तलहटी से लगे धनौल्टी विधानसभा क्षेत्र में सियासी बिसात बिछने लगी है. इस सीट को कोई भी एक दल अपना किला नहीं कह सकता है.

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 के मद्देनजर मसूरी की तलहटी से लगे धनौल्टी विधानसभा क्षेत्र में सियासी बिसात बिछने लगी है. टिहरी गढ़वाल जिले की यह सीट टिहरी लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है और अनारक्षित सीट है. धनौल्टी, नैनबाग और थत्यूड़ जैसे इलाकों वाला यह क्षेत्र पूरी तरह ग्रामीण है. इस क्षेत्र में लोगों की आजीविका पर्यटन, खेती - बागवानी और छोटे कारोबारों पर टिकी हुई है, जबकि पलायन यहां पर एक बड़ी चुनौती साबित हुई है.
किसी पार्टी का भी किला नहीं धनौल्टी विधानसभा
इस सीट को कोई एक दल अपना किला नहीं कह सकता, इस सीट पर 2002 में कांग्रेस ने जीत दर्ज की , 2007 और 2012 में BJP ने , 2017 में निर्दलीय प्रत्याशी प्रीतम सिंह पंवार ने और 2022 में फिर पंवार ने. हालांकि 2022 में बीजेपी के टिकट से पंवार चुनाव लड़े थे , 2012 में महावीर सिंह रांगड़ महज 12081 वोट लेकर चुनाव जीते थे, क्योंकि कांग्रेस के मनमोहन सिंह मल्ल और बागी जोत सिंह बिष्ट के बीच वोट बंट गए.
साल 2017 में पंवार ने निर्दलीय लड़कर BJP के नारायण सिंह राणा को 1615 वोट से हराया , 2022 के चुनाव में पंवार को 22827 वोट मिले और उन्होंने कांग्रेस के जोत सिंह बिष्ट को करीब 4700 वोट पछाड़ा. इस चुनाव में महावीर सिंह रांगड़ निर्दलीय उतरकर 12644 वोट ले गए जबकि आम आदमी पार्टी के अमेंद्र बिष्ट को 1735 वोट मिलें.
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प्रीतम सिंह पंवार का सफर
प्रीतम सिंह पंवार उत्तराखंड क्रांति दल से निकले नेता हैं और वे राज्य आंदोलन में भी सक्रिय रहे हैं. हरीश रावत सरकार के दौरान वे मंत्री भी रहे , सितंबर 2021 में वे BJP में शामिल हुए और 2022 में पार्टी ने उन्हें धनौल्टी से टिकट दे कर मैदान में उतारा गया था. धनौल्टी सीट पर उनकी पकड़ निजी रूप से भी मजबूत है यही वजह है कि पार्टी बदलने के बावजूद वे जीतते रहे.
साल 2024 के लोकसभा चुनाव में इस सीट के बदलते राजनैतिक समीकरण ने 2027 विधानसभा चुनाव के कयासों को और उलझा दिया है. पूरी टिहरी सीट पर BJP की माला राज्यलक्ष्मी शाह 2.72 लाख से ज्यादा वोट से जीतीं थी. हालांकि धनौल्टी विधानसभा क्षेत्र में उनकी बढ़त सिर्फ 487 वोट की ही रही. इस सीट पर उन्हें 18366 वोट मिले जबकि निर्दलीय प्रत्याशी बॉबी पंवार को 17879 वोट मिले. कांग्रेस के जोत सिंह गुनसोला यहां 3,757 वोट पर सिमट गए यानी इस सीट पर विपक्ष की भूमिका अब काफी हद तक बॉबी पंवार ने ले ली है.
इस सीट पर कौन कौन है उम्मीदवार?
अभी किसी दल ने उम्मीदवार का एलान तो नहीं किया है. हालांकि कुछ नामों की चर्चाएं राजनैतिक गलियारों में गूंजने लगी हैं. बीजेपी की और से प्रीतम पंवार दोबारा टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं. वहीं कांग्रेस की और से पूर्व प्रत्याशी जोत सिंह बिष्ट मैदान में उतर सकते हैं. इसी सीट पर कांग्रेस से पूर्व उम्मीदवार मनमोहन सिंह मल्ल भी अपने समर्थकों के साथ आगामी चुनाव के मद्देनजर सक्रिय नजर आ रहे हैं. बॉबी पंवार निर्दलीय या किसी नए मंच से चुनावी मैदान में उतर सकते हैं. AAP, UKD, और बसपा भी इस सीट से चुनाव लड़ती आई है, हालांकि उनका असर और वर्चस्व इस सीट पर सीमित ही नजर आता है.
राज्य की सत्ता और संगठन के सहारे फिलहाल BJP थोड़ी आगे नजर आती है. हालांकि अगर बॉबी पंवार इस सीट से विधायकी का चुनाव लड़ते हैं तो मुकाबला त्रिकोणीय होगा और BJP के लिए 2027 की राह आसान नहीं होगी. कांग्रेस को वापसी के लिए पहले अंदरूनी कलह निपटाकर अपना घर एक करने की जरूरत है. 2012 की हार इसका सबसे बड़ा सबक है कि आपसी बंटवारा सीधे प्रतिद्वंद्वी की जीत बन सकता है.





















