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(Source: ECI/ABP News)

शादियों में बजने वाला तेज म्यूजिक कैसे बन रहा आपके दिल का दुश्मन, नई स्टडी में हुआ खुलासा?

पिछले कुछ महीनों में, देश भर से चौंकाने वाली ऐसी कुछ घटनाएं सामने आई हैं. जिसमें लोगों को अचानक गिरते हुए देखा गया और कुछ मामलों में मौके पर लोग मर भी गए.

4 मार्च, 2023 को बिहार के सीतामढ़ी के 22 साल के सुरेंद्र कुमार की मौत मंच पर उस समय हो गयी जब वो अपनी दुल्हन को वरमाला पहना रहे थे. सुरेंद्र कुमार की मौत हार्ट अटैक से हुई. परिवार का कहना था कि सुरेंद्र कुमार की मौत डीजे की तेज आवाज के कारण हुई. तेज आवाज की वजह से उनकी दिल की धड़कने बढ़ गई और वो मंच से गिर पड़े. 

इसी तरह की एक और घटना तेलंगाना में हुई. एक 19 साल के शख्स की मौत शादी में डांस करते समय हो गयी. वहीं दूसरी तरफ पिछले साल 25 नवंबर को वाराणसी के पिपलानी कटरा में एक शादी समारोह में डांस करते समय एक व्यक्ति का दिल का दौरा पड़ने से उसकी मौत हो गई थी. समारोह के वायरल हुए वीडियो में शख्स डांस करता दिखाई दे रहा था और अचानक जमीन पर गिर पड़ा. 

पिछले कुछ महीनों में, देश भर से चौंकाने वाली ऐसी कुछ घटनाएं सामने आई हैं. जिसमें लोगों को अचानक गिरते हुए देखा गया और कुछ मामलों में मौके पर लोग मर भी गए. देख कर ऐसा लगा कि वो तेज संगीत बर्दाश्त नहीं कर पाए. 

सेहतमंद बुजुर्ग कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों की चपेट में

नवंबर 2019 में यूरोपीय हार्ट जर्नल में छपी एक रिसर्च में बताया गया कि किसी भी तरह का संगीत, चाहे वह धीमा हो या तेज व्यक्ति के दिल को कमजोर बना सकता है. शोधकर्ताओं ने 500 स्वस्थ वयस्कों पर अध्ययन किया.  इस शोध में ऐसे लोगों को शामिल किया गया जो बहुत बिजी और शोरगुल वाले बाजार में रहते थे या काम कर रहे थे.

पांच साल तक किए गए अध्ययन में यह बात सामने आई कि जिन लोगों में दिल की बीमारियों के कोई लक्षण नहीं होते, उन्हें शोरगुल वाले बाजारों में रहने के बाद हृदय रोग के लक्षण दिखने लगे. इस रिसर्च में ये पता चला कि कार्डियोवैस्कुलर संबंधित बीमारियों के होने की सबसे बड़ी वजह शोरगुल में होना है. 

रिसर्च में ये पाया गया कि औसत 24 घंटे में 5-डेसिबल के शोर से दिल के दौरे, स्ट्रोक और अन्य गंभीर हृदय संबंधी समस्याओं में 34 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है. यह एमिग्डाला (मस्तिष्क के अंदर ग्रे मैटर) को भी प्रभावित करता है जो निर्णय लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. और दिल का दौरा इस हिस्से को सिकुड़ने की वजह से होता है.  इससे मूड स्विंग, गुस्सा जैसी समस्याएं पैदा होती हैं जो हार्ट अटैक का लक्षण हैं.

तेज संगीत दिल की धड़कन की पर क्या असर डालता है

इसी तरह का एक अध्ययन जर्मनी के मेन्ज़ यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर में भी किया गया. इसमें 35 से 74 साल की आयु के लगभग 15,000 लोगों को शामिल किया गया. अध्ययन में इस बात का पता किया गया कि हार्ट अटैक की वजह संगीत है या शोर. शोध में ये बात सामने निकल कर आई कि  जब कोई व्यक्ति तेज संगीत के संपर्क में आता है, तो उनके दिल की धड़कन तेजी से बढ़ती है, यह ठीक वैसा ही है जैसे जॉगिंग या शारीरिक व्यायाम करते समय दिल की धड़कनों का तेज हो जाना. 

अनियमित दिल की धड़कन को एट्रियल फाइब्रिलेशन (एएफआईबी) कहा जाता है और इसकी वजह से हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक और ब्लड क्लॉट जैसे खतरे होते हैं.  वैज्ञानिकों का मानना है कि रक्तचाप बढ़ाने वाली कोई भी गतिविधि फाइब्रिलेशन को ट्रिगर कर सकती है और तेज आवाज के साथ भी ऐसा ही होता है. इसमें हृदय के ऊपरी दो कक्षों तक रक्त ठीक से नहीं पहुंच पाता है. इस वजह से निचले कक्षों का रक्त प्रवाह भी गड़बड़ा जाता है और इससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है. 

शोध में ये भी बताया गया कि बहुत तेज ध्वनि के संपर्क में आने से कान की संवेदी कोशिकाएं और संरचनाओं को थकान हो सकती है. अगर आप लंबे समय से तेज ध्वनि के संपर्क में हैं तो वे हमेशा के लिए खराब भी हो सकती है. जिससे सुनने की शक्ति हमेशा के लिए चली जाती है. 

अध्ययनों के निष्कर्षों से पता चलता है कि मानव कान के लिए 60 डेसिबल तक की ध्वनि सामान्य है. लेकिन क्लब या पार्टियों में ध्वनि का लेवल बढ़ जाता है. जो हमारे लिए नुकसानदायक होता है. 

15 मिनट से ज्यादा समय तक 100 डेसिबल या उससे ज्यादा समय तक संगीत सुनने से बचना चाहिए क्योंकि यह सुनने की क्षमता को बुरी तरह प्रभावित करता है. 50-70 डेसिबल से ऊपर की आवाज हानिकारक मानी जाती है जो इंसान के दिल और दिमाग को प्रभावित करती है. 

पिछले साल, वैश्विक स्वास्थ्य संगठन ने सुनने के लिए एक मानक तैयार किया था ये मानक क्लब या संगीत कार्यक्रमों में जाने वाले 12 से 35 साल की आयु के लोगों को सुनने की समस्याओं को मद्देनजर रखकर तैयार किया गया था.   

क्या कहते हैं भारतीय विशेषज्ञ?

कार्डियोलॉजिस्ट और फोर्टिस अस्पताल के अध्यक्ष डॉ. अजय कौल ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि, "एक तरफ, संगीत एक चिकित्सा के रूप में काम करता है लेकिन दूसरी तरफ, ज्यादा तेज संगीत या ध्वनि नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है.  अच्छा म्यूजिक नींद और दूसरे तरह की मानसिक समस्याओं के इलाज  में एक दवा के रूप में काम करता है तो वहीं अगर 60 डेसिबल से ऊपर तेज आवाज में म्यूजिक हो तो यह काफी नुकसानदायक हो सकता है.  इसके कारण दिल की धड़कनों में तेजी आ जाती है. जो कभी कभी दिल का दौरा भी ला देती है. 

आंकड़े के मुताबिक कम उम्र में हार्ट-अटैक वाले मामले दिनों-दिन भारत में बढ़ते जा रहे हैं. अमेरिका के एक रिसर्च जर्नल में छपे एक आर्टिकल  के मुताबिक 2015 तक भारत में 6.2 करोड़ लोगों को दिल से जुड़ी बीमारी हुई. दिल की बीमारी का शिकार हुए तकरीबन 2.3 करोड़ लोगों की उम्र 40 साल से कम बताई गई.यानी 40 फीसदी हार्ट के मरीजों की उम्र 40 साल से कम थी. भारत के लिए ये आंकड़े में परेशान करने वाले हैं. जानकार बताते हैं कि पूरी दुनिया में भारत में ये आंकड़े सबसे तेजी से बढ़ रहे हैं. 2016 में दिल की बीमारी, अकाल मृत्यु का पहला कारण बन गया है इससे पहले तक प्रीमैच्योर डेथ यानी अकाल मृत्यु में हार्ट अटैक तीसरे नंबर पर था. 

दिल के दौरे से जुड़े कुछ और सवाल भी हैं जिसे आपको जान लेना जरूरी है

पुरुष या महिलाएं किसका दिल है ज्यादा कमजोर 

2018  में हुए एक रिसर्च के मुताबिक महिलाओं में हार्ट अटैक का खतरा चार मामलों में ज्यादा होता है जिसमें हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, क्रोनिक किडनी रोग, स्ट्रोक, शामिल है. इस रिसर्च में औरतों में धूम्रपान की वजह से कम हार्ट अटैक के चांसेस देखे गए. रिसर्च में ये बताया गया था कि 50 साल से कम उम्र की महिलाओं में कैनबिस और कोकीन के इस्तेमाल से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है. 

क्या आपकी उम्र से आपके दिल का है कोई ताल्लुक

2010 के नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की रिसर्च के मुताबिक 35-44 आयु वर्ग के लोगों के मुकाबले 65-74 आयु वर्ग के लोगों में दिल के दौरा पड़ने का खतरा सात गुना ज्यादा होता है. वहीं 65-69 आयु वर्ग के लोगों के मुकाबले 80 वर्ष से ज्यादा आयु के लोगों में ये खतरा दो से तीन गुना ज्यादा होता है. 

बुजुर्गों की तुलना में 45 साल से कम उम्र के लोगों में दिल का दौरा पड़ने का खतरा इन स्थितियों में बढ़ता है पहला ज्यादा धूम्रपान, मोटापा, दिल का दौरे का पारिवारिक इतिहास यानी जेनेटिक .

दूसरे फैक्टर जो हार्ट अटैक के लिए जिम्मेदार हैं

उम्र: बढ़ती उम्र के साथ हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है.

सेक्स: बढ़ती उम्र के साथ महिलाओं में पुरुषों की तुलना में दिल का दौरा पड़ने का खतरा ज्यादा होता है. जैसे मेनोपॉज होने पर महिलाओं में दिल का दौरा बढ़ता है. वहीं पुरुषों में इस उम्र में ये खतरा महिलाओं के मुकाबले थोड़ा कम है.
आनुवंशिकी: जिन लोगों के परिवार के सदस्यों में पहले दिल का दौरा पड़ चुका है , उनमें दिल का दौरा पड़ने की संभावना अधिक हो सकती है.

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