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Agnipath Protest: जानिए वो 5 मुद्दे, जब सड़कों पर फूटा लोगों का गुस्सा, मोदी सरकार को झेलना पड़ा भारी विरोध

Notebandi to Agnipath Protest: ये पहली बार नहीं है कि मोदी सरकार को किसी मुद्दे को लेकर जनता का विरोध झेलना पड़ा हो. जानिए उन पांच मुद्दों के बारे में जिनके खिलाफ जनता सड़कों पर उतरी.

Agnipath Protest: केंद्र की मोदी सरकार (Modi Government) एक बार फिर नए विरोध का सामना कर रही है. इस बार सेना में भर्ती के लिए अग्निपथ योजना (Agnipath Scheme) पर युवाओं का गुस्सा केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ फूट रहा है. सड़कों पर लोग हैं, ट्रेनों में आग लगाई जा रही है. आक्रोशित युवाओं ने प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर कई ट्रेनों में आग लगा दी. सार्वजनिक संपत्ति में तोड़फोड़ की और राजमार्गों समेत रेलवे लाइन की आवाजाही को रोक दिया. उत्तर प्रदेश से लेकर तेलंगाना और बिहार से लेकर मध्य प्रदेश तक, देश के विभिन्न हिस्सों में आक्रोशित युवाओं की भीड़ ने ईंट-पत्थर फेंके. 

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) और थल सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे (Army Chief Manoj Pande) ने भर्ती योजना को लेकर पैदा चिंताओं को दूर करने की कोशिश की. गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने कहा कि रक्षा सेवाओं में भर्ती संबंधी अग्निपथ योजना में शामिल होने की अधिकतम उम्र सीमा बढ़ाने के केंद्र के फैसले से बड़ी संख्या में युवाओं को फायदा होगा. ये पहली बार नहीं है कि केंद्र की किसी योजना को लेकर लोगों का गुस्सा इस कदर सड़कों पर फूटा हो. इससे पहले भी केंद्र सरकार 5 बड़े आंदोलनों को झेल चुकी है.


Agnipath Protest: जानिए वो 5 मुद्दे, जब सड़कों पर फूटा लोगों का गुस्सा, मोदी सरकार को झेलना पड़ा भारी विरोध

1. नोटबंदी (Demonetization)
केंद्र की मोदी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में आते ही जो सबसे बड़ा फैसला लिया है था वो नोटबंदी का था. 8 नवंबर 2016 की रात अचानक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी टीवी पर आए और घोषणा कर दी कि अब पुराने नोट लीगल टेंडर नहीं होंगे. इस फैसले से पूरे देश में हलचल मच गई. जिनके पास पुराने नोट थे, उनके तमाम काम अटक गए. लोगों ने बैंकों के बाहर डेरा डाल दिया और कई किलोमीटर तक लाइने लगनी शुरू हो गईं. इस दौरान कई लोगों की मौत भी हुई. केंद्र की मोदी सरकार का इस मुद्दे पर काफी विरोध हुआ. आम लोगों पर इसका सबसे ज्यादा असर देखा गया. इस फैसले से सरकार की खूब आलोचना भी हुई, लेकिन सरकार ने तर्क दिया कि इससे काले धन पर बड़ा प्रहार किया गया. हालांकि बाद में ये बात सामने आई कि पुरानी करेंसी लगभग पूरी तरह वापस आ गई थी, जिससे विपक्ष ने एक बार फिर मोदी सरकार को घेरा. इस फैसले से देश में डिजिटल पेमेंट का चलन तेजी से शुरू हुआ. 

Agnipath Protest: जानिए वो 5 मुद्दे, जब सड़कों पर फूटा लोगों का गुस्सा, मोदी सरकार को झेलना पड़ा भारी विरोध

2. सीएए-एनआरसी (CAA-NRC)
पड़ोसी मुल्कों से भारत आने वाले अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने सीएए-एनआरसी लाने का एलान किया था. सरकार की मंशा था कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए अल्पसंख्यकों को इसके जरिए नागरिकता दी जाए. सीएए-एनआरसी के जरिए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, ईसाई और पारसी को नागरिकता देने का प्रावधान किया गया. साल 2019 के दिसंबर के महीने में इस कानून को संसद के दोनों सदनों ने पास कर दिया. कानून के मुताबिक दिसंबर 2014 से पहले 6 समुदायों के लोग इन तीन देशों से भारत आकर बस गए हैं, वो भारत की नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं. इस कानून का महीनों तक देश में विरोध हुआ. शाहीन बाग में महीनों तक लोग इस कानून के विरोध में सड़कों पर बैठे रहे. कोरोना के दौर में साल 2020 में केंद्र के खिलाफ ये प्रोटेस्ट खत्म हो पाया. हालांकि कानून अभी लागू नहीं हुआ है, सुप्रीम कोर्ट ने भी इस कानून पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था. 

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3. कृषि कानून (Farm Laws)
केंद्र की मोदी सरकार कृषि के क्षेत्र में किसानों के हित का हवाला देते हुए 3 कृषि कानून लेकर आई थी, जिसे विपक्ष ने काले कृषि कानून करार दिया था. सरकार ने 17 सितंबर 2020 को संसद में इन कानूनों को पास किया था. जिसके बाद दिल्ली के पड़ोसी राज्यों हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पंजाबा से किसानों का जमावड़ा देश की राजधानी दिल्ली में आकर लग गया. किसान कृषि कानूनों को रद्द कराने की मांग पर अड़े रहे और सरकार इन कानूनों में संशोधन की बात करती रही. केंद्र की मोदी सरकार और किसानों के बीच कई दौर की बातचीत भी इस संबंध में हुई, लेकिन सफलता नहीं मिली. हालांकि जनवरी 2021 में देश की शीर्ष अदालत ने इन तीन कानूनों को लागू नहीं करने का फैसला दिया. कृषि कानूनों के खिलाफ ये आंदोलन करीब एक साल तक चला और सरकार किसानों की हठ के आगे झुकी. 19 नवंबर 2021 को पीएम मोदी ने एलान किया कि सरकार तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने जा रही है और ये किसानों के हित में किया जा रहा है. 1 दिसंबर को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इन तीनों कानूनों को रद्द करने वाले फैसले को मंजूरी दे दी. जिसके बाद किसानों ने अपना आंदोलन वापस ले लिया.


Agnipath Protest: जानिए वो 5 मुद्दे, जब सड़कों पर फूटा लोगों का गुस्सा, मोदी सरकार को झेलना पड़ा भारी विरोध

4. जीएसटी (Goods and Service Tax)
केंद्र की मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल में एक अहम फैसला जीएसटी को लेकर किया. साल 2017 में बड़ा फैसला लेते हुए तमाम टैक्सों को हटाकर गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स यानी जीएसटी को लागू किया था. तमाम चुनौतियों के बावजूद सरकार जीएसटी को लेकर आई और इसे बड़ा कदम बताया गया. इससे पूरे देश में एक टैक्स सिस्टम लागू हुआ. जिसके तहत सीधे तय कर दिया गया कि आधा जीएसटी केंद्र के हिस्से में और आधा राज्यों को जाएगा. हालांकि जीएसटी को लेकर तमाम जानकारों और विपक्षी दलों ने ये भी कहा कि इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा. कई व्यापारी संगठनों ने सरकार के इस फैसले का विरोध भी किया. कहा जाता है जीससटी का सबसे ज्यादा विरोध पीएम मोदी के गृहराज्य गुजरात में हुआ. सूरत में व्यापारियों ने जीएसटी के खिलाफ पर्चे भी बांटे. कई-कई दिन तक विरोध के रूप में व्यापारियों ने अपने व्यापार पर ताला लगा दिया. जिसके बाद आखिरकार सरकार को विरोध को देखते हुए जीएसटी कानून में कई संशोधन करने पड़े.


Agnipath Protest: जानिए वो 5 मुद्दे, जब सड़कों पर फूटा लोगों का गुस्सा, मोदी सरकार को झेलना पड़ा भारी विरोध

5. अग्निपथ योजना (Agnipath Scheme)
अब सैनिकों की भर्ती को लेकर केंद्र की योजना अग्निपथ को लेकर मोदी सरकार को युवाओं के विरोध का सामना करना पड़ रहा है. 14 जून को केंद्र सरकार युवाओं की सेना में भर्ती करने के लिए अग्निपथ योजना का एलान किया था, जिसमें 4 साल के लिए युवाओं को सेना में भर्ती किया जाएगा. भर्ती हुए युवा अग्निवीर के नाम से जाने जाएंगे. सेना में भर्ती के लिए अग्निपथ योजना के खिलाफ देश के विभिन्न हिस्सों में लगातार तीसरे दिन शुक्रवार को विरोध प्रदर्शन के तहत सिकंदराबाद में पुलिस की गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत हो गई, वहीं बिहार में भी एक शख्स की जान चली गई. थल सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने कहा कि अग्निपथ योजना के तहत 2022 के लिए आयु सीमा को 21 वर्ष से बढ़ाकर 23 वर्ष करने का निर्णय उन युवाओं को अवसर प्रदान करेगा, जो सेना में भर्ती होने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन पिछले दो साल से कोविड-19 महामारी के कारण ऐसा नहीं कर पाए. हालांकि अभी आंदोलन थमा नहीं है, आगे आने वाले दिनों में पता लगेगा कि आखिर इस योजना को लेकर क्या होगा.

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