एक्सप्लोरर

क्या एलियंस वाकई हमारी पृथ्वी तक आ सकते हैं, जानें उन्हें कैसी नजर आती होगी हमारी दुनिया?

एलियंस की मौजूदगी को लेकर सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि अगर एलियंस हमारी पृथ्वी पर आ भी गए तो क्या वे जिंदा रह पाएंगे, यानी यहां का वातावरण उनके अनुकूल होगा.

हमारे ब्रह्मांड के बारे में बहुत सी ऐसी बाते हैं तो रहस्य बनी हुई हैं. उनमें से सबसे बड़ा रहस्य है- एलियंस यानी दूसरी दुनिया के प्राणियों की मौजूदगी. वैज्ञानिकों को यह बात लंबे अर्से से परेशान करती आई है कि एलियंस सच में होते हैं? अगर वे होते भी हैं तो कैसे दिखते हैं और क्या-क्या कर सकते हैं. भले ही एलियंस की मौजूदगी का कोई ठोस सबूत अब तक न मिला हो, लेकिन कई बार वैज्ञानिकों ने यूएफओ (UFO) देखे जाने के दावे जरूर किए हैं. हाल ही में वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में एक ऐसी जगह ढूंढने का दावा भी किया था, जहां एलियंस की मौजूदगी हो सकती है. 

इस बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या एलियंस वाकई हमारी पृथ्वी तक आ सकते हैं? अगर एलियंस आ गए तो क्या वह पृथ्वी के वातावरण में जिंदा रह पाएंगे? इंसानों का क्या होगा और एलियंस को हमारी दुनिया कैसी नजर आती होगी? वैज्ञानिकों ने इस सवालों के जवाब ढूंढने के लिए कई रिसर्च की हैं. ऐसे में चलिए जानते हैं क्या कहते हैं हमारे वैज्ञानिक...

कई बार किए जा चुके हैं एलियंस देखे जाने के दावे

एलियंस को देखे जाने के दावे कई बार किए जा चुके हैं, लेकिन इसके ठोस प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं. 2024 में ही अमेरिका के मियामी में एक शॉपिंग मॉल के बाद एलियंस देखे जाने का दावा किया गया था, जिसमें कहा गया था कि उनका आकार करीब 10 फुट था. हालांकि, बाद में हार्वर्ड के वैज्ञानिकों ने इस दावे को गलत बताया था. 

क्या पृथ्वी पर जिंदा रह पाएंगे एलियंस

सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि अगर एलियंस हमारी पृथ्वी पर आ भी गए तो क्या वे जिंदा रह पाएंगे, यानी यहां का वातावरण उनके अनुकूल होगा. खगोलशास्त्री एवी लोएब के मुताबिक, एलियंस की बनावट ऐसी है कि वे हमारे ग्रह पर आ भी गए तो जिंदा नहीं रह पाएंगे. उनके मुताबिक, मिल्की वे आकाशगंगा से एक तरफ से दूसरे तरफ जाने में लगभग एक अरब साल लग सकते हैं, ऐसे में यह मुमकिन नहीं है कि कोई अंतरिक्ष यान एलियंस को यहां तक ला सकता है. 

नासा भी कर चुका है खारिज

2022 में नासा भी एक रिसर्च में एलियंस या यूएफओ को देखे जाने की बात खारिज कर चुका है. नासा ने कहा था कि इस बात को कोई सबूत नहीं है कि यूएफओ की उत्पत्ति अलौकिक है. हालांकि, हम यह भी नहीं जानते कि अगर ऐसी चीजें दिख रही हैं तो वो क्या हैं. नासा व अन्य वैज्ञानिकों की एक बात से यह तो तय है कि एलियंस के होने या न होने का अबतक कोई ठोस प्रमाण उपलब्ध नहीं है. हालांकि, अगर वे पृथ्वी तक  भी गए तो यहां के वायुमंडल में वे ज्यादा दिनों तक जिंदा नहीं रह पाएंगे. 

यह भी पढ़ें: पृथ्वी से कितनी ऊपर तक बिना ऑक्सीजन जिंदा रह सकता है इंसान? स्पेस से जुड़ा यह फैक्ट नहीं जानते होंगे आप

प्रांजुल श्रीवास्तव एबीपी न्यूज में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. फिलहाल फीचर डेस्क पर काम कर रहे प्रांजुल को पत्रकारिता में 9 साल तजुर्बा है. खबरों के साइड एंगल से लेकर पॉलिटिकल खबरें और एक्सप्लेनर पर उनकी पकड़ बेहतरीन है. लखनऊ के बाबा साहब भीम राव आंबेडकर विश्वविद्यालय से पत्रकारिता का 'क, ख, ग़' सीखने के बाद उन्होंने कई शहरों में रहकर रिपोर्टिंग की बारीकियों को समझा और अब मीडिया के डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े हुए हैं. प्रांजुल का मानना है कि पाठक को बासी खबरों और बासी न्यूज एंगल से एलर्जी होती है, इसलिए जब तक उसे ताजातरीन खबरें और रोचक एंगल की खुराक न मिले, वह संतुष्ट नहीं होता. इसलिए हर खबर में नवाचार बेहद जरूरी है.

प्रांजुल श्रीवास्तव काम में परफेक्शन पर भरोसा रखते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता सिर्फ सूचनाओं को पहुंचाने का काम नहीं है, यह भी जरूरी है कि पाठक तक सही और सटीक खबर पहुंचे. इसलिए वह अपने हर टास्क को जिम्मेदारी के साथ शुरू और खत्म करते हैं. 

अलग अलग संस्थानों में काम कर चुके प्रांजुल को खाली समय में किताबें पढ़ने, कविताएं लिखने, घूमने और कुकिंग का भी शौक है. जब वह दफ्तर में नहीं होते तो वह किसी खूबसूरत लोकेशन पर किताबों और चाय के प्याले के साथ आपसे टकरा सकते हैं.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

उम्रकैद की सजा पाने वाले कैदी कितने साल काटते हैं जेल? जानें नियम
उम्रकैद की सजा पाने वाले कैदी कितने साल काटते हैं जेल? जानें नियम
केजरीवाल से कन्हैया तक, आंदोलन से निकलकर बड़े नेता बन चुके ये लोग
केजरीवाल से कन्हैया तक, आंदोलन से निकलकर बड़े नेता बन चुके ये लोग
मौत की सजा सुनाने के बाद जज क्यों तोड़ देते थे पेन की नोक, क्या थी वजह?
मौत की सजा सुनाने के बाद जज क्यों तोड़ देते थे पेन की नोक, क्या थी वजह?
क्या आप भी रिकॉर्ड करते हैं ऑफिस की बातें, ऐसे केस में कितनी सजा?
क्या आप भी रिकॉर्ड करते हैं ऑफिस की बातें, ऐसे केस में कितनी सजा?

वीडियोज

लखनऊ में मौत की पटकथा...नेपाल में 'गुप्त लीला' !
SC में सुनवाई का सार..'क्या 'तमाशा' बना रखा है ?'
तो सत्ता परिवर्तन का प्लान-बांग्लादेश का क्यों बखान!
Jagadhatri:😮Jagadhatri मिशन के लिए तैयार, Shivay ने घर की देवी को सम्मान देकर भेजा मैदान में! #sbs
Bollywood News: कॉफ़ी विद करण का धमाकेदार आगाज, सलमान खान के बेबाक अंदाज ने शो पर लगाया तड़का! (15.10.26)

फोटो गैलरी

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
'सब पत्रकार बन गए तो दिक्कत हो जाएगी', सुप्रीम कोर्ट ने किस मामले में की ये टिप्पणी
'सब पत्रकार बन गए तो दिक्कत हो जाएगी', सुप्रीम कोर्ट ने किस मामले में की ये टिप्पणी
भारत के प्रोटेस्ट की तुलना बांग्लादेश हिंसा से, भड़कीं प्रियंका चतुर्वेदी- 'वहां हिंदुओं को...'
भारत के प्रोटेस्ट की तुलना बांग्लादेश हिंसा से, भड़कीं प्रियंका चतुर्वेदी- 'वहां हिंदुओं को...'
'धक्का दिया और दरवाजा...', कास्टिंग काउच के बाद सहम गई थीं 'तारक मेहता...' फेम एक्ट्रेस
'धक्का दिया और दरवाजा...', कास्टिंग काउच के बाद सहम गई थीं 'तारक मेहता...' फेम एक्ट्रेस
कांग्रेस छोड़कर BJP में गए नेताओं पर राहुल गांधी का तंज, बोले- 'वो लोग अब...'
कांग्रेस छोड़कर BJP में गए नेताओं पर राहुल गांधी का तंज, बोले- 'वो लोग अब...'
'सचिन-कोहली की तरह वैभव सूर्यवंशी भी...', पूर्व सिलेक्टर के बयान ने चौंकाया
'सचिन-कोहली की तरह वैभव सूर्यवंशी भी...', पूर्व सिलेक्टर के बयान ने चौंकाया
दिल्ली में ठंड का अहसास! 6 डिग्री तक गिरा पारा, आज भी होगी बारिश?
दिल्ली में ठंड का अहसास! 6 डिग्री तक गिरा पारा, आज भी होगी बारिश?
Macbook की टक्कर के हैं ये 3 लैपटॉप, फीचर्स के तो कहने ही क्या
Macbook की टक्कर के हैं ये 3 लैपटॉप, फीचर्स के तो कहने ही क्या
उम्रकैद की सजा पाने वाले कैदी कितने साल काटते हैं जेल? जानें नियम
उम्रकैद की सजा पाने वाले कैदी कितने साल काटते हैं जेल? जानें नियम
Embed widget