व्यवासायिक सिनेमा से कितना अलग है समानांतर सिनेमा, भारत में किसने की थी इसकी शुरुआत?

व्यवासायिक सिनेमा की बढ़ती लोकप्रियता और कमर्शियल फिल्म इंडस्ट्री की ताकत के बावजूद, समानांतर सिनेमा आज भी कुछ गहरी और संवेदनशील कहानियों के रूप में सामने आता है
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श्याम बेनेगल की फिल्मों में महिलाओं का चित्रण बहुत गहरे और यथार्थपूर्ण तरीके से किया जाता था. उनकी फिल्म भुमिका (1977) एक महिला की जीवन यात्रा पर आधारित थी, जो अपने जीवन में स्वायत्तता और स्वतंत्रता की तलाश करती है.
111 साल पुराने भारतीय सिनेमा को लेकर हमारे दिमाग में जब भी कोई तस्वीर उमड़कर सामने आती है, तो वो क्या होती है? मुगल-ए-आजम के पहले की कुछ फिल्में जैसे कि चलती का नाम गाड़ी और चौदहवी का चांद. या फिर








