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एमफिल पास आउट का अब क्या होगा, पुरानी डिग्री काम की रहेगी और नौकरी में दिक्कत तो नहीं आएगी? यहां जानें हर बात

यूजीसी के फैसले के बाद ऐसे लोग कंफ्यूज हैं, जिनके पास पहले से एमफिल की डिग्री है. वे जानना चाहते हैं कि उनकी पुरानी डिग्री पर इस फैसले का क्या असर होगा? क्या जॉब करने वालों कुछ दिक्कत हो सकती है?

एमफिल को लेकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की ओर से एक अहम निर्णय लिया गया है. फैसले में यूजीसी की तरफ से विश्वविद्यालयों को सत्र 2024-25 से दाखिले ना लेने को लेकर कदम उठाने के लिए कहा है. साथ ही, यूजीसी ने उम्मीदवार जो एमफिल प्रोग्राम में एडमिशन लेने का मन बना रहे थे, उन्हें भी सतर्क रहने की नसीहत दी है. यूजीसी के फैसले के बाद ऐसे लोग कंफ्यूज हैं, जिनके पास पहले से एमफिल की डिग्री है. वे जानना चाहते हैं कि उनकी पुरानी डिग्री पर इस फैसले का क्या असर होगा? क्या जॉब करने वालों कुछ दिक्कत हो सकती है? 

यूजीसी ने क्या कहा?

यूजीसी अध्यक्ष प्रो. एम जगदीश कुमार के अनुसार, आयोग की ओर से विश्वविद्यालयों को 2024-25 सत्र के लिए एडमिशन रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने के लिए कहा है. वहीं, यूजीसी सेक्रेटरी प्रो. मनिष र. जोशी  की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि कुछ यूनिवर्सिटी एमफिल (मास्टर ऑफ फिलॉसफी) प्रोग्राम के लिए एप्लीकेशन मांग रही हैं. ऐसे में उन्हें बताया जा रहा है कि एमफिल रिकॉग्नाइज डिग्री नहीं है. इस नोटिस में रेगुलेशन नंबर 14 का भी हवाला दिया गया है, जिसमें साफ तौर पर कहा गया है कि हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट एमफिल प्रोग्राम ऑफर नहीं कर सकते हैं.  

यहां क्लिक कर चेक करें नोटिस

पहले से कर रहे हैं नौकरी उनका क्या होगा?

छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक का कहना है कि सरकार के निर्णय पर टिप्पणी करना गलत है. हालांकि, उनका मानना है कि जिन लोगों ने पहले एमफिल किया है, उन्हें कंसीडर किया जाएगा, नए लोगों को नहीं किया जाएगा. जो पहले से ही एमफिल करके नौकरी पा चुके हैं, उन पर क्या असर पड़ेगा. इस सवाल पर वाइस चांसलर प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कोई फर्क पड़ेगा. पहले ये रिकॉग्नाइज थी, अब आगे नहीं है.

अब डिग्री पाने वालों का क्या होगा?

वहीं, आईआईएमसी में प्रोफेसर रहे शिवाजी सरकार का कहना है कि जो लोग पहले ही एमफिल कर चुके हैं और जॉब कर रहे हैं, उन पर इस फैसले का असर नहीं पड़ेगा. जो लोग यूजीसी के फैसले के बाद (जो सर्कुलर में तारीख है) उसके बाद एमफिल करते हैं, उन्हें जॉब में बेनिफिट मिलना मुश्किल है. बाकी यह नौकरी देने वाले संस्थान पर भी निर्भर करता है. हालांकि आधिकारिक रूप से कहना कि क्या होगा या क्या नहीं, अभी ठीक नहीं है.

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पत्रकारिता की दुनिया में जब बात पढ़ाई-लिखाई, लाइफस्टाइल, फीचर या न्यूज की आती है, तो चन्द्रिल कुलश्रेष्ठ का नाम सहज ही सामने आता है. जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त कर चुके चन्द्रिल बीते पांच वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय हैं और इस दौरान इन्होंने पत्रकारिता के कई रंग देखे हैं - खबरों की तह तक जाना, आम लोगों की जिंदगी से जुड़ी बातें सामने लाना और क्राइम से जुड़ी कहानियों को तथ्यात्मक ढंग से पेश करना उनकी खासियत बन चुकी है.

चन्द्रिल न सिर्फ रिपोर्टिंग में निपुण हैं, बल्कि कंटेंट राइटिंग, स्टोरी कंसेप्टिंग और फीचर प्रजेंटेशन में भी उनका अंदाज बेहद खास है. खबरों की दुनिया में जहां अक्सर रफ्तार और सनसनी का बोलबाला होता है, वहीं चन्द्रिल की कलम तथ्यों के साथ संतुलन और संवेदनशीलता बनाए रखते हुए काम करती है. वह मानते हैं कि पत्रकारिता का असली उद्देश्य जनता को सही और सटीक जानकारी देना है, न कि महज ध्यान खींचना. यही वजह है कि उनके द्वारा लिखी गई स्टोरीज ना सिर्फ पढ़ने में रोचक होती हैं, बल्कि विश्वसनीयता के मानक पर भी खरी उतरती हैं.

इन दिनों चन्द्रिल ABP Live से जुड़कर कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर काम कर रहे हैं. चाहे बात सरकारी नौकरियों की अपडेट्स की हो, स्कूली शिक्षा में हो रहे बदलावों की या फिर खेती-किसानी से जुड़े जमीनी मुद्दों की हर विषय पर उनकी पकड़ गहरी और प्रस्तुतिकरण सहज होता है. वह खबर को महज सूचना नहीं, बल्कि एक अनुभव की तरह पेश करने में यकीन रखते हैं, ताकि पाठक उससे खुद को जोड़ सके.

क्राइम रिपोर्टिंग में भी चन्द्रिल की शैली अलग है. वह किसी भी केस को सिर्फ घटनाओं के सिलसिले के रूप में नहीं दिखाते, बल्कि उसके पीछे छिपे सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और कानूनी पहलुओं को भी उजागर करने की कोशिश करते हैं.

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