कितना पढ़ा लिखा था रावण, किस चीज का सबसे ज्यादा था ज्ञान?
रावण को हमेशा उसके अंहकार के लिए जाना जाता है. बहुत ही कम लोग जानते हैं कि रावण एक ज्ञानी व्यक्ति भी था. रावण भगवान शिव का सबसे बड़ा भक्त होने के साथ वेद और शास्त्र, का ज्ञान भी रखता था.

रामायण की कथा में रावण का नाम अक्सर अहंकार, शक्ति और भगवान राम से युद्ध के लिए लिया जाता है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि वह अत्यंत विद्वान, तपस्वी और अनेक शास्त्रों का जानकार भी था.
रावण को दशानन कहा गया है. धार्मिक व्याख्याओं में उसके दस सिरों को अलग-अलग प्रकार के ज्ञान और शक्तियों का प्रतीक भी माना जाता है. कई कथाओं में रावण के ज्ञानी होने का उल्लेख मिलता है. उसके विनाश की केवल एक ही वजह थी कि वह अहंकारी था. जानिए रावण के पास किन चीजों का ज्ञान था.
वेद और शास्त्रों का था ज्ञान
रावण को वेदों का ज्ञाता बताया जाता है. कथाओं के अनुसार उसने वेद, वेदांग और विभिन्न शास्त्रों का अध्ययन किया था. वह संस्कृत का विद्वान माना जाता है और धार्मिक अनुष्ठानों तथा मंत्रों का भी ज्ञान रखता था. उसकी विद्वत्ता का उल्लेख रामायण के उन प्रसंगों में भी दिखाई देता है, जहां वह देवताओं, ऋषियों और राजाओं के साथ गंभीर विषयों पर संवाद करता है. यही कारण है कि रावण को अपने समय के अत्यंत शिक्षित राजाओं में गिना जाता है. रावण से जुड़ी कथाओं में ज्योतिष का विशेष उल्लेख मिलता है. कहा जाता है कि उसे ग्रहों और नक्षत्रों की गति का ज्ञान था. उसके पुत्र मेघनाद के जन्म से जुड़ी कथा में भी ग्रहों की स्थिति का प्रसंग आता है.
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आयुर्वेद और चिकित्सा का ज्ञान
रावण के बारे में एक महत्वपूर्ण मान्यता यह भी है कि उसे आयुर्वेद और चिकित्सा विज्ञान की जानकारी थी. उसके नाम से जुड़ा अर्कप्रकाश नामक ग्रंथ आयुर्वेदिक परंपरा में चर्चित है. इसमें औषधियों और चिकित्सा से जुड़े विषयों का उल्लेख माना जाता है. रावण का संबंध संगीत और वाद्य कला से भी जोड़ा जाता है. धार्मिक कथाओं में उसे भगवान शिव का बड़ा भक्त माना गया है. कहा जाता है कि उसने शिव की स्तुति में शिव तांडव स्तोत्र की रचना की.
राजनीति और युद्धनीति का भी ज्ञान
रावण केवल पुस्तकीय ज्ञान रखने वाला व्यक्ति नहीं था. वह लंका का शक्तिशाली शासक था और शासन, कूटनीति तथा युद्धनीति का भी जानकार माना जाता था. उसने अपने राज्य को संगठित किया और विभिन्न शक्तिशाली राजाओं तथा योद्धाओं से संबंध बनाए. रामायण में उसके निर्णयों से यह भी पता चलता है कि वह रणनीतिक सोच रखता था. लेकिन उसकी सबसे बड़ी कमजोरी उसका अहंकार था. विद्या और शक्ति होने के बावजूद वह सही सलाह को नजरअंदाज करता गया.
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