एक्सप्लोरर

मुखालफत में उठने वाली हर आवाज़ से इतना क्यों डरती है हमारी सरकार?

गुजरात के निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवाणी को एक मामले में जमानत मिलने के घंटे भर बाद ही असम की पुलिस ने उन्हें दोबारा गिरफ्तार करके अपनी हिरासत में लेकर ये जता दिया कि अंग्रेज भले ही देश से चले गए हों, लेकिन ख़ाकी वर्दी का वही रुतबा आज भी बरक़रार है. पिछले कई दशकों में ये इकलौता ऐसा मामला है, जहां एक चुने हुए जन-प्रतिनिधि को कोर्ट से जमानत मिलने के तुरंत बाद किसी और मामले में गिरफ्तार कर लिया जाए. ये घटना देश के लोकतंत्र को ताकतवर बनाने वाली नहीं है, बल्कि उन सबको  डराने-धमकाने वाली भी है, जो किसी भी सत्ता के खिलाफ अपनी आवाज उठाने की हिम्मत अपने बूते पर ही जुटाते हैं.

सोमवार की देर शाम बीजेपी शासित राज्य असम में हुई इस घटना के बाद सियासी गलियारों में बड़ा सवाल ये उठा है कि इस बहाने कहीं महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार को राजनीतिक तौर पर मुंहतोड़ जवाब तो नहीं दिया गया है? हो सकता है कि सवाल उठाने वाले सही भी हों क्योंकि अमरावती की निर्दलीय सांसद नवनीत राणा और उनके निर्दलीय विधायक पति रवि राणा ने बीते शनिवार को महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे के निजी आवास 'मातोश्री' के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ करने की धमकी दी थी. कानून के मुताबिक वो विभिन्न समुदायों के बीच धार्मिक उन्माद फैलाने का जुर्म बनता है और उसी आरोप में राणा दंपति जेल में बंद हैं. सोमवार को मुंबई हाइकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज करते हुए दोनों को ये कहते हुए फटकार भी लगाई कि जो जितना बड़ा जन प्रतिनिधि, उसकी ताकत भी उतनी बड़ी होती है लेकिन आखिर वो ये क्यों भूल जाता है है कि समाज-देश के प्रति उसकी जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी है. लिहाज़ा,उसकी इस लापरवाही पर कोर्ट को भला किसलिये हमदर्दी दिखानी चाहिये.

अपनी आंखों पर लगे किसी भी धार्मिक चश्मे को हटाकर जरा इस पर गौर कीजिए कि आपके या मेरे घर के बाहर आकर बगैर हमारी मर्जी के कोई नमाज़ पढ़ने लगे या हनुमान चालीसा का पाठ करने लगे,तो आपको कैसा लगेगा? मुसलमान तो कहेंगे कि उन्हें इस पर कोई ऐतराज नहीं है और हिन्दू कहेंगे कि इस बहाने हनुमानजी उनके घर आ गए.लेकिन देश के संविधान और कानून के मुताबिक ये दोनों ही धार्मिक क्रियाएं आपको और मुझे मिले निजता के अधिकार  का सरासर उल्लंघन है क्योंकि आपकी सहमति के बगैर किया गया ऐसा कोई भी काम अपराध की श्रेणी में आता है. और,जबरदस्ती ऐसा करने वाले या उसकी धमकी देने वालों पर देश की आईपीसी की वही धाराएं लागू होती हैं,जो मुंबई पुलिस ने राणा दंपति के खिलाफ दर्ज की हैं.

अब जरा गौर करते हैं जिग्नेश मेवाणी के उस बयान पर जिसके कारण असम पुलिस ने उन्हें गुजरात के पालनपुर जाकर पहले गिरफ्तार किया, फिर कोर्ट में पेश किया और कोर्ट से उन्हें जमानत भी मिल गई. लेकिन असम पुलिस को ये रास नहीं आया क्योंकि प्रदेश कोई भी हो, ख़ाकी वर्दी अगर अपने हुक्मरान का फ़रमान नहीं मानेगी, तो उसके कंधे पर चमक रहे सितारों को उतरने में ज्यादा वक्त नहीं लगता. तो आख़िर जिग्नेश मेवाणी ने ऐसा क्या कह दिया कि एक दूरदराज के राज्य की पुलिस ने उन्हें गिरफ़्तार करने में ज्यादा देर नहीं लगाई. भले ही ऐसे किसी भी राज्य में आम लोग चोरी, झपटमारी जैसी छोटी वारदातों से लेकर हत्या की कोशिश,बलात्कार और हत्या जैसे संगीन ज़ुर्म की एफआईआर दर्ज करने के लिए भी पुलिस के आगे फरियाद की गुहार लगाए बैठे हों.

दरअसल, जिग्नेश मेवानी को उनके एक ट्वीट के चलते गिरफ्तार किया गया था जिसमें उन्होंने लिखा था, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो गोडसे को भगवान मानते हैं, वह गुजरात में हुई सांप्रदायिक झड़पों के लिए शांति और सद्भाव की अपील करें". उनके इस बयान पर असम के बीजेपी नेता अरूप कुमार द्वारा शिकायत किए जाने के बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी. गुजरात के वडगाम से विधायक मेवानी के खिलाफ धारा 120 बी (आपराधिक साजिश), धारा 153 (ए) (दो समुदायों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 295 (ए), 504 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान) और आईटी की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था.

असम पुलिस ने जिग्नेश मेवानी को 19 अप्रैल को गुजरात के पालनपुर शहर से गिरफ्तार किया था.विधायक को ट्रांजिट रिमांड पर कोकराझार ले जाया लाया गया और वहां के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 21 अप्रैल को उन्हें तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया था.सोमवार की देर शाम उसी कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी लेकिन पुलिस ने अपनी हिरासत से छोड़ने से पहले ही जिग्नेश के ख़िलाफ़ एक औऱ मामला दर्ज करके उन्हें फिर से गिरफ़्तार कर लिया.अगर आपको यकीन हो तो,भरोसा कीजिये लेकिन कोई भी समझदार इंसान पुलिस की इस दलील पर बिल्कुल भी यकीन नहीं करेगा.

असम पुलिस ने अपनी इस करतूत को जायज़ दिखाने के लिए ये दलील दी है कि जमानत मिलने के तुरंत बाद मेवाणी ने पुलिस अधिकारियों पर हमला किया, जिसके कारण उन्हें दोबारा गिरफ्तार किया गया है. जरा सोचिए कि अपने प्रदेश से सैकड़ों किलोमीटर दूर एक अनजान राज्य में दर्जनों बंदूकधारी पुलिसवालों के बीच कोई निहत्था इंसान उन पर हमला करने की सोच भी सकता है? जिग्नेश मेवाणी गुजरात के वडगाम से निर्दलीय विधायक हैं.वह पेशे से एक वकील होने के साथ ही पत्रकार भी रह चुके हैं.दलित आंदोलन के दौरान जिग्नेश अचानक ही मीडिया की सुर्खी भी बन चुके हैं.हालांकि वे हार्दिक पटेल के साथ दिल्ली में कांग्रेस का मंच साझा कर चुके हैं लेकिन उन्होंने औपचारिक तौर पर कांग्रेस की सदस्यता नहीं ली है.इसलिये कि ऐसा करते ही उनकी विधायकी चली जायेगी.हालांकि उनकी गिरफ्तारी पर असम कांग्रेस ने विरोध-प्रदर्शन भी किया.

लेकिन खुद मेवाणी अपनी गिरफ्तारी को भाजपा और आरएसएस की साजिश बताते हुए कहते हैं कि "गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले  यह मेरी छवि खराब करने के लिए राजनीतिक प्रतिशोध लिया जा रहा है.यह पूरी प्लानिंग है, जैसा रोहित वेमुला के साथ किया, चंद्रशेखर आजाद के साथ किया गया." लेकिन यहां सवाल सियासत का नहीं बल्कि ये है कि लोकतंत्र में सरकारों के खिलाफ उठने वाली आवाज़ों को क्या ऐसे ही दबाया जाता रहेगा? अगर हां,तो फिर ये भूलना पड़ेगा कि हम अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त होकर एक आज़ाद हिंदुस्तान में जी रहे हैं? ये सोचने और अपना फैसला लेने की ताकत सिर्फ देश का आम, मजलूम और हर तरफ से सताया हुआ इंसान ही ले सकता है.

(नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज़ ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.)

View More

ओपिनियन

Sponsored Links by Taboola
25°C
New Delhi
Rain: 100mm
Humidity: 97%
Wind: WNW 47km/h

टॉप हेडलाइंस

लाठियां, कंटीले तारों के बैरिकेड्स और जिद… किस उलझन में फंसी झारखंड सरकार?
लाठियां, कंटीले तारों के बैरिकेड्स और जिद… किस उलझन में फंसी झारखंड सरकार?
ईरान ने मांगा जंग का हर्जाना, ट्रंप बोले- पहले हमारे शहीदों का हिसाब दो
ईरान ने मांगा जंग का हर्जाना, ट्रंप बोले- पहले हमारे शहीदों का हिसाब दो
15 अगस्त को क्या करेंगे अभिजीत दीपके? वीडियो जारी कर बताया प्लान
15 अगस्त को क्या करेंगे अभिजीत दीपके? वीडियो जारी कर बताया प्लान
CSK या KKR, हार्दिक पांड्या किस टीम का थामेंगे हाथ? जान लीजिए जवाब
CSK या KKR, हार्दिक पांड्या किस टीम का थामेंगे हाथ? जान लीजिए जवाब

वीडियोज

Baramati Crime: पत्नी ने रची पति को रास्ते से हटाने की खौफनाक साजिश? | Sansani
Janhit with Chitra Tripathi: CM Soren से छात्र..'हमको झुका ना पाओगे'! | Jharkhand Students Protest
Kanwar Yatra 2026: बुर्के में कांवड़, मुस्लिम महिला और हिंदू पति! नोटिस के बाद भी नहीं रुकी तमन्ना !
Assam Flood Crisis: असम में बाढ़ का तांडव, 98 मौतें,  समय रैनाने भेजे 10 लाख, अब CM वापस लेंगे FIR?
Sansani: बेवफा बीवी की तेजाबी साजिश

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
लाठियां, कंटीले तारों के बैरिकेड्स और जिद… किस उलझन में फंसी झारखंड सरकार?
लाठियां, कंटीले तारों के बैरिकेड्स और जिद… किस उलझन में फंसी झारखंड सरकार?
ईरान ने मांगा जंग का हर्जाना, ट्रंप बोले- पहले हमारे शहीदों का हिसाब दो
ईरान ने मांगा जंग का हर्जाना, ट्रंप बोले- पहले हमारे शहीदों का हिसाब दो
15 अगस्त को क्या करेंगे अभिजीत दीपके? वीडियो जारी कर बताया प्लान
15 अगस्त को क्या करेंगे अभिजीत दीपके? वीडियो जारी कर बताया प्लान
CSK या KKR, हार्दिक पांड्या किस टीम का थामेंगे हाथ? जान लीजिए जवाब
CSK या KKR, हार्दिक पांड्या किस टीम का थामेंगे हाथ? जान लीजिए जवाब
नेटफ्लिक्स पर नंबर 1 बनी 6 एपिसोड की सीरीज, जानें 'ऑपरेशन सफेद सागर' देखने की 5 वजहें
नेटफ्लिक्स पर नंबर 1 बनी 6 एपिसोड की सीरीज, जानें 'ऑपरेशन सफेद सागर' देखने की 5 वजहें
‘जंतर-मंतर पर नहीं हुई फायरिंग, गुमराह कर रहे राहुल’, JP नड्डा का पलटवार
‘जंतर-मंतर पर नहीं हुई फायरिंग, गुमराह कर रहे राहुल’, JP नड्डा का पलटवार
UP चुनाव से पहले कांग्रेस की बड़ी बैठक, राहुल गांधी ने दिए ये निर्देश
UP चुनाव से पहले कांग्रेस की बड़ी बैठक, राहुल गांधी ने दिए ये निर्देश
सुप्रिया सुले संग NCP-SP के सांसदों की PM मोदी से मुलाकात, खूब हो रही चर्चा-Pics
सुप्रिया सुले संग NCP-SP के सांसदों की PM मोदी से मुलाकात, खूब हो रही चर्चा-Pics
Embed widget