नवरात्रि का आठवां दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप 'मां महागौरी' को समर्पित है,

जो पूर्णतः गौर वर्ण और अत्यंत शांत स्वभाव की हैं.

Published by: हर्षिका मिश्रा
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मां महागौरी को शुद्धता, करुणा और नई शुरुआत का

प्रतीक माना जाता है; इनका वाहन वृषभ (बैल) है.

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मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने से भक्तों के सभी संचित

पाप धुल जाते हैं और जीवन की कठिन राहें आसान हो जाती हैं.

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मां को सफेद रंग अत्यधिक प्रिय है, इसलिए पूजा में सफेद फूल, चंदन और

पंचामृत का विशेष रूप से प्रयोग किया जाता है.

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महागौरी को प्रसन्न करने के लिए नारियल या नारियल से बनी मिठाइयों का

भोग लगाना अत्यंत शुभ और सुख-समृद्धि प्रदायक माना जाता है.

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अष्टमी के दिन 'कंजक' या कन्या पूजन का विधान है, जिसमें छोटी बच्चियों को

मां का रूप मानकर भोजन कराया जाता है और उपहार दिए जाते हैं.

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ॐ देवी महागौर्यै नमः या श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नमः

जैसे मंत्रों के जाप से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.

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इस दिन मोरपंखी हरा (Peacock Green) या गुलाबी रंग के वस्त्र पहनना

उत्साह और जीवन में संतुलन लाने वाला माना जाता है.

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मां की आरती और दुर्गा सप्तशती के पाठ से घर का

वातावरण पवित्र होता है और नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं.

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मां महागौरी की कृपा से साधक को न केवल भौतिक सुख प्राप्त होते हैं,

बल्कि रिश्तों में मधुरता और वैचारिक स्पष्टता भी आती है.

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