नवरात्रि का छठा दिन (24 मार्च 2026) देवी दुर्गा के छठे स्वरूप,

माँ कात्यायनी को समर्पित है, जो साहस और अटूट शक्ति की प्रतीक हैं.

Published by: हर्षिका मिश्रा
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माँ कात्यायनी जहाँ एक ओर शत्रुओं के लिए संहारक और उग्र हैं,

वहीं अपने भक्तों के लिए ममतामयी और प्रेम प्रदान करने वाली देवी मानी जाती हैं.

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मान्यता है कि इनकी पूजा करने से विवाह में आ रही अड़चनें दूर होती हैं

और सुयोग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है.

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इस दिन का शुभ रंग लाल है, जो उत्साह,

ऊर्जा और संकल्प शक्ति को दर्शाता है.

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माँ कात्यायनी को शहद (Honey) का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है,

जिससे जीवन और रिश्तों में मधुरता आती है.

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इस दिन ॐ देवी कात्यायन्याय नमः मंत्र का जाप करने से

आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और भय का नाश होता है.

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पौराणिक कथा के अनुसार, महिषासुर का वध करने के लिए देवी ने यह अवतार लिया था,

जो यह सिखाता है कि न्याय के लिए संघर्ष आवश्यक है.

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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, माँ की उपासना से कुंडली में मंगल और

शुक्र के दोष शांत होते हैं और रिश्तों में सामंजस्य बढ़ता है.

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योग मार्ग में यह दिन 'आज्ञा चक्र' को जाग्रत करने का होता है,

जिससे साधक को स्पष्ट दृष्टि और निर्णय लेने की क्षमता मिलती है.

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यह दिन केवल भक्ति का नहीं बल्कि अपनी इच्छाओं को हकीकत में

बदलने और साहस के साथ आगे बढ़ने का संकल्प लेने का है.

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