चैत्र नवरात्रि 2026: दूसरा दिन माँ ब्रह्मचारिणी की महिमा तपस्या,

शक्ति और अनुशासन का महापर्व तारीख: 20 मार्च 2026

Published by: हर्षिका मिश्रा
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कैसा है माँ का स्वरूप? श्वेत वस्त्र धारण की हुई दिव्य देवी.

दाहिने हाथ में जप माला और बाएं हाथ में कमंडल.

'ब्रह्मचारिणी' अर्थात—कठोर तप का आचरण करने वाली.

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शुभ रंग: लाल (Red)
महत्व: लाल रंग ऊर्जा, शक्ति और संकल्प का प्रतीक है.

लाभ: इस रंग के वस्त्र पहनने से आत्मविश्वास और कार्य क्षमता में वृद्धि होती है.

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मंत्र का जाप करें:
या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

बीज मंत्र: ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः।

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माँ को क्या प्रिय है?
भोग: शक्कर (चीनी), मिश्री और फल.

फल: माता को चीनी का भोग लगाने से लंबी आयु और सौभाग्य का वरदान मिलता है.

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पूजा विधि (Puja Vidhi):

ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें.
माँ को पंचामृत से स्नान कराएं.

चमेली के पुष्प और अक्षत अर्पित करें.
धूप-दीप जलाकर आरती करें.

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अनुशासन और सफलता के लिए:
संकल्प (Intention): पूजा के समय अपने लक्ष्य के प्रति अडिग रहने का संकल्प लें.

आत्म-नियंत्रण (Self-Control): केवल भोजन का नहीं, बल्कि क्रोध और ईर्ष्या का भी त्याग करें.

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मौन साधना: कुछ समय मौन रहकर अंतर्मन से जुड़ें.

ध्यान (Meditation): 'स्वाधिष्ठान चक्र' पर ध्यान लगाकर मानसिक शक्ति बढ़ाएं.

परोपकार: किसी जरूरतमंद की मदद करें.

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क्या न करें?
आलस्य और टालमटोल से बचें.

तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन) न लें.

किसी का अपमान या वाद-विवाद न करें.

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माँ ब्रह्मचारिणी की कृपा से व्यक्ति को कठिन से कठिन परिस्थितियों में धैर्य और साहस मिलता है.

कुंडली में चंद्रमा मजबूत होता है और मानसिक शांति प्राप्त होती है.

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