चैत्र नवरात्रि का पांचवा दिन 23 मार्च 2026 को मनाया जाएगा,

जो माँ स्कंदमाता को समर्पित है.

Published by: हर्षिका मिश्रा
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माँ स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय (स्कंद कुमार) की माता हैं,

जो देवताओं के सेनापति माने जाते हैं.

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देवी के इस स्वरूप में वे अपनी गोद में

बाल रूप में स्कंद देव को धारण किए हुए नजर आती हैं.

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इस पावन दिन पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:06 से 5:53 तक और

अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:21 से 1:09 तक रहेगा.

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पूजा की शुरुआत सुबह जल्दी स्नान करके और

माँ की प्रतिमा को गंगाजल से शुद्ध करके करनी चाहिए.

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माँ को प्रसन्न करने के लिए 'ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः'

मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करना चाहिए.

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स्कंदमाता को पीला रंग और फल में केला अत्यंत प्रिय है,

इसलिए उन्हें इसी का भोग लगाना शुभ होता है.

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उनकी आराधना में दुर्गा सप्तशती का पाठ या

दुर्गा चालीसा का वाचन भक्तों को विशेष लाभ देता है.

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माना जाता है कि स्कंदमाता की पूजा करने से

भक्तों को संतान सुख, ज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति होती है.

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माँ का यह ममतामयी रूप साधक के जीवन में शांति,

निडरता और सुरक्षा का संचार करता है.

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