21 मार्च 2026 को चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन (तृतीया तिथि) है,

जो शक्ति के 'चंद्रघंटा' स्वरूप को समर्पित है.

Published by: हर्षिका मिश्रा
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देवी के माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है,

इसीलिए इन्हें 'चंद्रघंटा' कहा जाता है.

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सुनहरे रंग वाली माँ चंद्रघंटा बाघ पर सवार हैं और

अपनी दस भुजाओं में अस्त्र-शस्त्र धारण कर युद्ध के लिए तत्पर रहती हैं.

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मान्यता है कि माँ के हाथ के घंटे की भयानक ध्वनि से

असुरों और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है.

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तीसरे दिन की पूजा भक्तों में अदम्य साहस,

वीरता और आत्मविश्वास का संचार करती है और भय को दूर करती है.

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तनाव, भ्रम और मानसिक अशांति से जूझ रहे लोगों के लिए

माँ चंद्रघंटा की आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है.

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ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः मंत्र का जाप करने से साधक को

दिव्य शक्तियों का अनुभव और संरक्षण प्राप्त होता है.

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योग साधना में आज के दिन साधक का मन 'मणिपुर चक्र' में

प्रविष्ट होता है, जिससे आत्मिक बल बढ़ता है.

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माँ को प्रसन्न करने के लिए दूध से बनी मिठाइयां या

केसर वाली खीर का भोग लगाना अत्यंत शुभ होता है.

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माँ की कृपा से न केवल बाहरी बाधाएं दूर होती हैं,

बल्कि व्यक्ति की निर्णय लेने की क्षमता और फोकस में भी सुधार आता है.

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