जो शक्ति के 'चंद्रघंटा' स्वरूप को समर्पित है.
इसीलिए इन्हें 'चंद्रघंटा' कहा जाता है.
अपनी दस भुजाओं में अस्त्र-शस्त्र धारण कर युद्ध के लिए तत्पर रहती हैं.
असुरों और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है.
वीरता और आत्मविश्वास का संचार करती है और भय को दूर करती है.
माँ चंद्रघंटा की आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है.
दिव्य शक्तियों का अनुभव और संरक्षण प्राप्त होता है.
प्रविष्ट होता है, जिससे आत्मिक बल बढ़ता है.
केसर वाली खीर का भोग लगाना अत्यंत शुभ होता है.
बल्कि व्यक्ति की निर्णय लेने की क्षमता और फोकस में भी सुधार आता है.