यह अधिक मास हिंदी चंद्र कैलेंडर के अनुसार सूर्य और चंद्रमा की गणनाओं के बीच के अंतर को समायोजित करने के लिए आता है.
शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होगा और ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि पर समाप्त होगा.
इसका धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व अत्यधिक है.
हर बार लगभग तीन साल में एक बार अधिक मास आता है.
यही इसका ज्योतिषीय आधार है.
कार्य अत्यंत पुण्यदायी माने जाते हैं.
बल्कि धार्मिक साधना पर बल दिया जाता है.
मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.
इसलिए इसे पुरुषोत्तम कहा जाता है.