छठ पूजा में सूर्य को अर्घ्य देने के पीछे आध्यात्मिक और वैज्ञानिक,

दोनों तरह के लाभ है.

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वैज्ञानिक रूप से, यह सूर्य की किरणों से शरीर के लिए

आवश्यक विटामिन डी प्राप्त करने का एक तरीका है.

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अर्घ्य देते समय व्रती पानी में खड़े होते हैं इसलिए यह क्रिया शरीर को

डिटॉक्स करने और मन को शांति देने में भी सहायक होती है.

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सुबह और शाम की हल्की धूप में अर्घ्य देने से शरीर को भरपूर विटामिन डी मिलता है,

जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) मजबूत होती है.

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जल में खड़े होने से शरीर का तापमान संतुलित रहता है.

रक्त का संचार सुधरता है, और मन शांत होता है.

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सूर्य को जल चढ़ाते समय ध्यान लगाने से मानसिक संतुलन बनता है.

मन को गहरी शांति मिलती है.

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माना जाता है कि षष्ठी तिथि पर सूर्य से आने वाली कुछ हानिकारक किरणें पृथ्वी पर अधिक होती हैं,

और पूजा करने से उनके बुरे प्रभाव से बचाव होता है.

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धार्मिक रूप से, अर्घ्य देना प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने और सूर्य को

’जीवन का दाता’ मानने का प्रतीक है.

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उपवास और कठोर नियमों का पालन व्रती में आत्म-नियंत्रण

और शारीरिक शुद्धि की भावना विकसित करता है.

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