लोक आस्था का महापर्व छठ कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से सप्तमी तक मनाया जाता है.

इसमें नहाय-खाय, खरना, डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा होती है.

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इस बार छठ पूजा के समय कई शुभ योग बन रहे हैं, जिनमें रवि योग और सुकर्मा योग प्रमुख हैं.

ये योग व्रती के लिए अत्यंत लाभकारी रहेंगे.

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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इन शुभ योगों में सूर्य देव और छठ मैया की पूजा करने से आरोग्यता,

सुख और समृद्धि का दोगुना फल प्राप्त होता है.

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छठ पूजा की षष्ठी तिथि 27 नवंबर को सुबह 6 बजकर 4 मिनट से शुरू होकर

28 नवंबर को सुबह 7 बजकर 59 मिनट पर समाप्त होगी.

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षष्ठी तिथि के बाद सप्तमी तिथि शुरू होगी, जब उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा.

यह छठ पूजा का अंतिम और सबसे शुभ दिन होता है.

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छठ पूजा के दिन ‘रवि योग’ बन रहा है, जो रात 10 बजकर 46 मिनट तक रहेगा.

इस योग में सूर्य देव की उपासना करने से विशेष फल मिलता है.

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सुकर्मा योग’ पूरी रात्रि तक रहेगा. इस योग में पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं

और घर में सुख-शांति बढ़ती है.

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इस दिन दो करण ‘कौलव’ और ‘तैतिल’ भी बन रहे हैं. कौलव करण शाम 7 बजकर 5 मिनट तक रहेगा,

उसके बाद तैतिल करण का आरंभ होगा. दोनों करण शुभ माने जाते हैं.

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ठ के दिन पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का संयोग भी रहेगा. इन सभी ग्रह योगों और नक्षत्रों के

प्रभाव से यह छठ पर्व और भी पवित्र और फलदायी बन जाएगा.

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