पौराणिक कथा के अनुसार चंद्र देव

तारा के रूप और गुणों से अत्यधिक प्रभावित हो गए थे.

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देवी तारा बृहस्पति देव की पत्नी थीं और

बहुत बुद्धिमान व सुंदर मानी जाती थीं.

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चंद्र देव और देवी तारा के बीच धीरे-धीरे

आकर्षण बढ़ने लगा और वे एक साथ रहने लगे.

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जब बृहस्पति देव को इस बात का पता चला

तो उन्होंने तारा को वापस मांगा और विवाद बढ़ गया.

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देवताओं के हस्तक्षेप से अंत में देवी

तारा को बृहस्पति देव को सौंप दिया गया.

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उस समय तक देवी तारा गर्भवती हो चुकी थीं

और इसी गर्भ से एक अलौकिक बालक का जन्म हुआ.

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इस बालक का नाम बुध रखा गया,

जिन्हें चंद्र देव का पुत्र भी माना जाता है.

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बुध देव अत्यंत बुद्धिमान, शांत स्वभाव

और तर्कशक्ति के प्रतीक माने जाते हैं.

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ज्योतिष शास्त्र में बुध को वाणी, गणित,

व्यापार और शिक्षा का कारण ग्रह कहा गया है.

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यह कथा न केवल बुध देव के जन्म को दर्शाती है

बल्कि ग्रहों के बीच संबंधों और संतुलन का प्रतीक भी है.

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