हेमू विक्रमादित्य वे आखिरी हिन्दू राजा थे, जिनका सिर मुगलों ने धड़ से अलग कर दिया था.
पानीपत के युद्ध में हेमू ने बहादुरी से लड़ाई की, लेकिन आँख में तीर लगने के बाद मुगलों ने उन्हें जंजीर से बांध कर 14 साल के बादशाह अकबर के सामने पेश किया और फिर सिर काट कर उनकी जान ले ली.
हेमू को एक बार खबर मिली कि मुगल युद्ध की योजना बना रहे हैं तब उन्होंने 30,000 घुड़सवार और 500 से 1500 हाथियों के साथ पानीपत की ओर कूच किया.
उनकी सेना ने मुगल सेना के बाएं और दाहिने हिस्से में अफरा-तफरी मचा दी.
अबुल फजल के अनुसार, हेमू बिना कवच के हाथी पर चढ़कर लड़ाई कर रहे थे, तभी एक तीर उनकी आंख में आ लगा. हेमू तीर लगने से बेहोश हो गए.
निजामुद्दीन अहमद के अनुसार, शाह कुली खां ने घायल हेमू को पकड़कर अकबर के सामने पेश किया.
अकबर के अतालिक बैरम खां ने अकबर को हेमू का सिर काटने के लिए उकसाया, लेकिन अकबर झिझक गए.
मोहम्मद कासिम फेरिश्ता के अनुसार, अकबर ने तलवार से हल्का स्पर्श किया, लेकिन सिर काटने का काम बैरम खां ने किया.
पार्वती शर्मा अपनी किताब अकबर ऑफ हिंदुस्तान में लिखती हैं कि मुगलों ने इस जीत को धार्मिक विजय के रूप में प्रचारित किया.
के.के. भारद्वाज लिखते हैं कि मुगलों ने हेमू का सिर काटकर अफगान में भेज दिया.