चचनामा नाम की किताब में लिखा गया है कि सिंध के आखिरी हिंदू राजा राजा दाहिर थे.



राजा दाहिर ब्राह्मण वंश के शासक थे और उनके पिता चच पहले ब्राह्मण राजा थे.



चचनामा के अनुसार दाहिर ने अपनी बहन से नाम मात्र की शादी की ताकि सिंध का राज उन्हीं के पास रहे.



नौवीं सदी के मुस्लिम इतिहासकार अल-बालाधुरी ने लिखा कि अरबों ने सिंध पर 14 बार आक्रमण किया था.



अल-बालाधुरी की किताब Futuh al-Buldan में बताया गया है कि राजा दाहिर ने 15वें आक्रमण में मुहम्मद बिन कासिम से युद्ध किया था.



मुहम्मद बिन कासिम ने 712 ईस्वी में सिंध पर आक्रमण किया और राजा दाहिर को हराकर मार दिया.



राजा दाहिर की राजधानी अलोर थी जहां उन्होंने अरब आक्रमणकारियों का सामना किया.



दाहिर के शासनकाल में सिंध की सीमाएं मकरान, गुजरात, मालवा और पंजाब तक फैली हुई थीं.



पाकिस्तान में राष्ट्रवादी इतिहासकारों ने राजा दाहिर को भुला दिया, लेकिन 2020 में सिंधी समुदाय ने उन्हें फिर से अपना नायक मानने की मांग उठाई.



राजा दाहिर को पाकिस्तान का आखिरी हिंदू राजा माना जाता है क्योंकि उनके बाद सिंध पर इस्लामिक शासन शुरू हो गया.