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Marshall Islands: चीनी जोड़े की थी मार्शल आईलैंड में मिनी स्टेट की तैयारी, अमेरिका को खबर लगी तो सीधे पहुंचे हवालात

Marshall Islands Mini-State: चीन और अमेरिका (America) की मार्शल आइलैंड्स पर नजर है. एक चीनी कपल (Chinese Pair) को अमरीका ने वहां मिनी स्टेट (Mini-State) बनाने की साजिश के तहत गिरफ्तार किया है.

Chinese Pair Plotted Mini-State In Pacific Nation: एक चीनी जोड़े की मार्शल द्वीप (Marshall Islands) पर साजिश कर एक मिनी स्टेट बनाने की पूरी तैयारी धरी-धरी रह गई. अमेरिका (America) के अधिकारियों को इसकी खबर लग गई और उनकी साजिश का पर्दापाश हो गया. अमेरिका और चीन दोनों की इस रणनीतिक तौर पर अहम द्वीप पर नजर है.

चीनी जोड़े की घूस देकर मिनी-स्टेट की चाह

दरअसल एक चीनी जोड़े (Chinese Couple) का प्रशांत महासागर (Pacific) में एक मिनी-स्टेट (Mini-State) बनाने का सपना ऐसे टूटा कि उन्हें सामने सीधे हवालात नजर आया. अमेरिकी (American Prosecutor) वकीलों का कहना है कि इस चीनी जोड़े ने प्रशांत महासागर में मार्शल द्वीप समूह पर एक मिनी-स्टेट बनाने की साजिश रची थी. इसके लिए इस जोड़े सांसदों और अधिकारियों को तगड़ी घूस भी थी. अमेरिकी सरकारी वकीलों का कहना है कि साल 2018 और 2020 में मार्शल आइलैंड्स की संसद में एसएआर बनाने के समर्थन वाले बिलों पर बहस की गई थी. वकीलों का कहना है कि ये साबित करता है कि चीनी जोड़ें ने एमपी को घूस देकर प्रभावित करने की कोशिशें की हैं.

वकीलों ने आरोप लगाया है कि चार्जशीट में मार्शल आइलैंड के कई सांसदों ऐसे हैं जिनका नाम नहीं पता है. इन सांसदों ने 7,000 अमेरिकी डॉलर से 22,000 अमेरिकी डॉलर (6,100 से 19,000 पाउंड) तक की रिश्वत लेने के बाद बिलों के पक्ष में वोटिंग की थी.इस जोड़े को बीते साल 2020 में थाइलैंड (Thailand) से गिरफ्तार किया गया था और बीते सप्ताह अमेरिका प्रत्यर्पित (Extradited) किया गया था.

न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले के लिए अमेरिकी अटॉर्नी डेमियन विलियम्स (Damian Williams) ने कहा, "यान और झोउ की घूस ने मार्शल द्वीप गणराज्य और उसकी विधायिका की संप्रभुता का साफ तौर पर उल्लंघन किया." मार्शल द्वीप समूह हवाई (Hawaii) और ऑस्ट्रेलिया (Australia) के बीच द्वीपों की एक सीरीज है. ये  द्वीप समूह चार दशक तक अमेरिकी शासन के अधीन रहा था. इसे साल 1979 में आजादी मिली थी. अभी भी यह प्रशांत क्षेत्र में वाशिंगटन (Washington) के लिए एक अहम रणनीतिक आधार बना हुआ है. यहां अमेरिका के पास कुछ सुरक्षा गठबंधन हैं. यहां चीन भी अपने असर को बढ़ाना चाहता है. इस वजह से अमेरिका इस मामले में बेहद संजीदगी वाला रवैया अपना रहा है. 

द्वीप राष्ट्र की  संप्रभुता को चुनौती

इस जोड़े ने सांसदों को एक दूरस्थ प्रवाल द्वीप पर अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र-एसएआर (Semi-Autonomous Region- SAR) इलाका बनाने के लिए मनाने की पुरजोर कोशिशें की थीं. इसका मतलब है कि इस इलाके के सभी अंदरूनी मामलों में केवल और केवल इस चीनी जोड़े का ही दखल होता. इस जोड़े ने एक तरह से ऐसे इलाके में पहुंचने की कोशिश की थी जो प्रशांत देश (Pacific Nation)  में विदेशियों के दखल को बढ़ाता. गौरतलब है कि साल 1979 तक इस इलाके का नियंत्रण अमेरिका के हाथों में था. हालांकि विपक्षी पार्टियों के बार-बार इस मुद्दे पर बात किए जाने के बाद भी मार्शल आइलैंड की सरकार ने इस जोड़े के आरोपों को साबित करने के लिए पूरी तरह से कोई बात नहीं की है. उधर अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि आरोपियों कैरी यान (Cary Yan) और जीना झोउ (Gina Zhou) ने इस द्वीप राष्ट्र  (Pacific nation) की संप्रभुता को कम करके आंका है.

कैसे रची चीन ने साजिश

अमेरिका के सरकारी वकील का कहना है कि दोनों आरोपियों न्यूयॉर्क के एक एनजीओ को चलाते थे. उन्होंने इसी के जरिए मार्शल द्वीप के अधिकारियों को पैसा दिया था और उनसे संपर्क साधा था. साल 2016 की शुरुआत में इस चीनी जोड़े ने रोंगेलैप एटोल (Atol) यानी प्रवाल द्वीप पर एक एसएआर (SAR) बनाने के लिए द्वीप के प्रतिनिधियों से संपर्क साधा था. यह इलाका 1950 के दशक में अमेरिकी के हाइड्रोजन बम (Hydrogen Bomb) परीक्षण के बाद छोड़ दिया गया था. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यान और झोउ का मकसद इस द्वीप के महत्वपूर्ण कानूनों को बदलना था. इनमें मार्शल आईलैंड के विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए करों में कटौती और आव्रजन प्रतिबंधों (Immigration Restrictions) में ढील देने जैसे कानून शामिल थे. 

उन्होंने आरोप लगाया कि इस जोड़ी ने कम से कम छह मार्शल द्वीप के अधिकारियों और सांसदों को अपनी तरफ किया.उन्हें खाना खिलाया और उनके न्यूयॉर्क के साथ-साथ हांगकांग में उड़ानों और होटलों के लिए भुगतान किया. यहां मार्शल द्वीप के अधिकारियों ने एसएआर (SAR) को बढ़ावा देने वाले एक सम्मेलन में भाग लिया. एक अधिकारी जिसने पैसा लिया था.  उसने  यान को मार्शल द्वीप समूह का विशेष सलाहकार नियुक्त किया. घूस के बल पर यह जोड़ी मार्शल द्वीप की नागरिक भी बन गई. अमेरिकी वकीलों का कहना है कि 2018 में  रिश्वत लेने वाले सांसदों ने संसद में प्रस्तावित एसएआर का समर्थन करने वाला एक विधेयक पेश किया था.  

अमेरिकी न्याय विभाग की अभियोग शीट में कहा गया, "आरोपियों ने बिल के लिए विधायकों का समर्थन लेने के लिए रिश्वत और अन्य प्रोत्साहनों की पेशकश की और इसे दिया भी." हालांकि, द्वीप की तत्कालीन राष्ट्रपति हिल्डा हेइन (Hilda Heine) के सख्त विरोध के बाद ये बिल संसद में पारित नहीं हो पाया. उस समय के आसपास हेइन ने विरोधियों पर चीन की ओर से काम करने और एटोल को "एक देश के भीतर देश" में बदलने के लिए सुरक्षित करने की कोशिश करने का आरोप लगाया था. लेकिन  हेइन 2019 का आम चुनाव हार गईं. साल 2020 में एक नई संसद ने एक प्रस्ताव पारित किया जिसने एसएआर की अवधारणा का समर्थन किया गया और इसे बनाने के एक नए विधेयक का रास्ता साफ किया गया.

हालांकि बाद में उस साल यान और  झोउ  को थाईलैंड में हिरासत में लिया गया था. उन पर अमेरिका में विदेशी भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग और रिश्वतखोरी के आरोप लगाए गए हैं. सोमवार को पूर्व राष्ट्रपति  हेइन के तौर पर  मार्शल द्वीप सरकार से इस मुद्दे को हल करने की मांग की है.  इसके साथ वह भी मामले के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की जमात में शामिल हो गई. लोकल मीडिया के मुताबिक, पूर्व राष्ट्रपति हेइन ने सवाल किया कि "नितिजेला (संसद) और सरकार मार्शल द्वीप समूह के लिए इस बड़ी काली आंख यानी शर्मनाक बात के बारे में क्या करने जा रही है?" 

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