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भारत-ब्रिटेन संबंधों की मजबूती के लिए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट क्यों है जरूरी, 2023 के अंत तक बन सकती है सहमति

India UK Trade: यूरोपीय संघ से अलग होने के बाद ब्रिटेन, भारत के साथ व्यापारिक साझेदारी मजबूत करने में जुटा है. इस लिहाज से उसके लिए मुक्त व्यापार समझौता काफी अहम हो जाता है.

India UK FTA: भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच आपसी संबंध मजबूत करने के लिहाज से व्यापार काफी महत्व रखता है. हालांकि तमाम कोशिशों के बाद भी जितनी बड़ी अर्थव्यवस्था भारत और यूनाइटेड किंगडम हैं, द्विपक्षीय व्यापार को वैसी रफ्तार नहीं मिली है. कूटनीतिक तौर से महत्वपूर्ण इस मुद्दे पर आगे बढ़ने के लिए दोनों ही देश मुक्त व्यापार समझौता (FTA) को अंतिम रूप देने के प्रयासों में जुटे हैं.

FTA पर 12वें दौर की वार्ता पर नज़र

प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते के लिए दोनों देशों के बीच बातचीत का 11 दौर पूरा हो चुका है. एफटीए पर बातचीत 12वां दौर 7 अगस्त से दिल्ली में होना है. 11वें दौर की वार्ता जुलाई में लंदन में हुई थी और उसमें वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल शामिल हुए थे. प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते में कुल 26 अध्याय हैं, जिनमें से 19 पर बातचीत हो गई है. इनमें बेहद ही संवेदनशील ऑटोमोबाइल सेक्टर भी शामिल है. 12वें दौर की वार्ता में जिन प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हो सकती है, उनमें वाहन और शराब पर शुल्क में कटौती और सेवाओं से संबंधित मुद्दे शामिल हैं.

निवेश संधि पर भी बातचीत जारी

12वें दौर की वार्ता में दोनों देशों के बीच निवेश संधि पर भी बातचीत होनी है. दरअसल भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय निवेश संधि पर भी बातचीत हो रही है. दोनों देश चाहते हैं कि मुक्त व्यापार समझौते के साथ ही इस निवेश संधि पर भी सहमति एक साथ बने.

2023 के आखिर तक करार होने की उम्मीद

दोनों देशों को उम्मीद है कि 2023 के आखिर तक मुक्त व्यापार समझौते और निवेश संधि पर सहमति बन जाएगी. दोनों देश चाहते हैं कि एफटीए पर बातचीत जल्द पूरी हो. ऐसा कहा भी जा रहा है कि  भारत और ब्रिटेन इस साल मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं. इसका कारण ये है कि दोनों देश प्रस्तावित करार की व्यापक रूपरेखा  को लेकर आम सहमति के बेहद करीब पहुंच चुके हैं. वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल ने भी हाल ही कहा है कि दोनों देश इस डील को जल्द से जल्द अंतिम रूप देना चाहते हैं. उन्होंने ये भी कहा था कि करीब-करीब सभी विवादास्पद मुद्दों पर बातचीत पूरी हो गई और 2023 के अंत से बहुत पहले समझौते पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं. वाणिज्य सचिव बर्थवाल का कहना है कि भारत कपड़ा, चमड़ा और दूसरे श्रम प्रधान विनिर्माण क्षेत्रों के लिए "शून्य टैरिफ" पर जोर दे रहा है, जबकि ब्रिटेन ने अन्य क्षेत्रों में टैरिफ रियायतें मांगी थीं.

भारत ने पिछले साल ऑस्ट्रेलिया के साथ अंतरिम व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किया था. अब उसके बाद ब्रिटेन के साथ एफटीए होने पर किसी विकसित देश के साथ भारत का ऐसा पहला समझौता होगा.

एफटीए से दोनों देशों को पहुंचेगा फायदा

अगर मुक्त व्यापार समझौता इस साल के आखिर तक हो जाता है, तो इससे दोनों देशों में आर्थिक विकास और रोजगार के मौके को बढ़ावा मिलेगा. अभी ब्रिटेन के साथ भारत का जो द्विपक्षीय व्यापार है, वो भारत के पक्ष में झुका है. यानी हम आयात के मुकाबले ब्रिटेन को निर्यात ज्यादा करते हैं. हालांकि आयात-निर्यात के बीच का ये  अंतर बहुत ज्यादा नहीं है.

अगर मुक्त व्यापार समझौता हो जाता है तो भारत आयात-निर्यात के इस अंतर को बढ़ा सकता है. भारत, ब्रिटेन के लिए बड़ा निर्यातक देश बन सकता है. उसी तरह से एफटीए होने पर ब्रिटेन को अपनी प्रीमियम कारों, व्हिस्की और कानूनी सेवाओं के लिए भारत जैसे बड़े बाजार में पहुंच आसान हो जाएगी. ब्रिटेन 2020 में यूरोपीय यूनियन से बाहर हुआ था. उसके बाद से ब्रिटेन अपने वैश्विक व्यापार में विविधता लाने के मकसद से नए-नए साझेदारों की तलाश में है और इस लिहाज से भारत का बड़ा बाजार उसके लिए काफी कूटनीतिक मायने रखता है.

2022-23 में द्विपक्षीय व्यापार के आंकड़े

भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार 2021-22 में 17.5 अरब डॉलर था. 2022-23 में ये आंकड़ा बढ़कर 20.42 अरब डॉलर  हो गया. कन्फेडरेशन ऑफ ब्रिटिश इंडस्ट्री (CBI) के मुताबिक एफटीए होने से द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने में काफी मदद मिलेगी. इस कन्फेडरेशन का तो इतना तक मानना है कि अगर एफटीए हो गया तो ये 2035 तक भारत के साथ व्यापार को 28 बिलियन पाउंड प्रति वर्ष तक बढ़ा सकता है. साथ ही पूरे ब्रिटेन में वेतन में 3 बिलियन पाउंड की वृद्धि हो सकती है.

द्विपक्षीय व्यापार में आयात-निर्यात के प्रमुख सामान

ब्रिटेन, भारत से मुख्य तौर से सिलेसिलाए परिधान और कपड़े, रत्न और आभूषण, इंजीनियरिंग सामान, पेट्रोलियम और पेट्रो रसायन उत्पाद के साथ ही परिवहन उपकरण, मसाले, मशीनरी, फार्मास्युटिकल्स और समुद्री उत्पाद बड़े पैमाने पर खरीदता है. जबकि भारत, ब्रिटेन से बहुमूल्य रत्नों, अयस्क, धातु कबाड़, इंजीनियरिंग सामान के साथ ही  इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद, रसायन और मशीनरी खरीदता है. रूस को छोड़ दें, तो यूरोपीय देशों में फिलहाल भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार नीदरलैंड्स है और उसके बाद जर्मनी का नंबर आता है. इस मामले में यूनाइटेड किंगडम यूरोप में भारत का तीसरा सबसे बड़ा साझेदार है.

यूके के लिए भारतीय बाजार में अपार संभावनाएं

यूनाइटेड किंगडम के लिए भारतीय बाजार में अपार संभावनाएं हैं. भारत-ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौते को लेकर बातचीत पिछले साल जनवरी में शुरू हुई थी. यूरोपीय यूनियन से अलग होने के बाद ब्रिटेन खुद को स्वतंत्र व्यापारिक राष्ट्र के तौर पर स्थापित करने के प्रयासों में जुटा है. भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते की कवायद ब्रिटेन की उसी साख को स्थापित करने से  जुड़ी हुई है. इसके जरिए ब्रिटेन इंडो-पैसिफिक रीजन में अपनी स्थिति को मजबूत करने की संभावना भी देख रहा है.

पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन हालांकि इस समझौते को लेकर काफी उत्सुक थे, लेकिन ब्रिटेन की आर्थिक स्थिति बिगड़ने के बाद उन्हें सितंबर 2022 में प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा और भारत के साथ एफटीए करने के उनके मंसूबों को उस वक्त कामयाबी नहीं मिली. अब ब्रिटेन के मौजूदा प्रधानमंत्री ऋषि सुनक भी इस करार को लेकर बेहद उत्साहित नजर आ रहे हैं. हालांकि देश की आर्थिक स्थिति को सुधारने के क्रम में वे चाहते हैं कि भारत के साथ एफटीए पर अंतिम सहमति बनने से पहले हर पहलू पर अच्छे से विचार हो ताकि ब्रिटिश हितों को नुकसान नहीं पहुंचे.

इमीग्रेशन के मुद्दे पर ध्यान दिए जाने की जरूरत

भारत-ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौते में एक ऐसा मुद्दा है जिस पर ध्यान दिए जाने की जरूरत है. ब्रिटेन ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि एफटीए में इमीग्रेशन यानी आप्रवासन पर प्रतिबद्धताएं शामिल नहीं होंगी और न ही  ब्रिटेन के घरेलू श्रम बाजार तक पहुंच  मुहैया कराया जाएगा. इस मसले को यूनाइटेड किंगडम के व्यापार राज्य सचिव केमी बडेनोच ने पहले ही साफ कर दिया है.

सितंबर में भारत आएंगे ऋषि सुनक

जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी साल मई में जी 7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए जापान गए थे, तो उस वक्त  21 मई को उनकी ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक से अलग से वार्ता हुई थी. उस वक्त दोनों नेताओं ने भारत-यूके एफटीए वार्ताओं में हुई प्रगति का जायजा लिया था. साथ ही व्यापक रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा की थी. दोनों नेताओं ने वयापार और निवेश, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, उच्‍च शिक्षा के साथ ही दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी संबंध जैसे विस्‍तृत क्षेत्रों में सहयोग को प्रगाढ़ बनाने पर सहमति व्‍यक्‍त की जताई थी.  उससे पहले 13 अप्रैल को टेलीफोन पर हुई बातचीत में दोनों नेताओं ने एफटीए को लेकर हुई प्रगति  का जायजा लिया था.

अब 9 और 10 सितंबर को नई दिल्ली में जी 20 शिखर सम्मेलन होना है, ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक इस सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आएंगे. ऐसे में उम्मीद है कि सम्मेलन से अलग बातचीत में दोनों नेताओं के बीच मुक्त व्यापार समझौते को जल्द अमलीजामा पहनाने पर सहमति बन सकती है.

जनवरी 2022 में एफटीए पर वार्ता का ऐलान

भारत और यूनाइटेड किंगडम ने जनवरी 2022 में नई दिल्ली में मुक्त व्यापार समझौते के लिए औपचारिक तौर से बातचीत शुरू करने का ऐलान किया था. उस वक्त यूनाइटेड किंगडम की अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मंत्री ऐनी मैरी ट्रेवेलियन भारत की यात्रा पर थीं. दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने पर सहमत जताते हुए एफटीए पर बातचीत शुरू करने का फैसला किया था. ये लक्ष्य मई 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन द्वारा घोषित रोडमैप 2030 का हिस्सा है.

यूरोपीय यूनियन के साथ भी एफटीए पर बातचीत

भारत का यूरोपीय यूनियन के साथ भी मुक्त व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है. भारत और यूरोपीय यूनियन दोनों चाहते हैं कि इस साल ही मुक्त व्यापार समझौते हो जाए. ऐसे में 2023 का साल भारत के लिए यूरोप के साथ व्यापारिक संबंधों को मजबूती मिलने के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण साबित होने वाला है.

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