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नए अमेरिकी दूत पर चीनी खतरे का मुकाबला करने और भारत-रूस संबंधों को संतुलित करने का होगा दारोमदार

अमेरिका तीन साल के बाद भारत में अपने नए दूर एरिक गार्सेटी की नियुक्ति कर रहा है. ऐसा पहली बार हुआ है जब अमेरिका ने अपने दूत को भेजने में इतना अधिक समय लिया है.

नई दिल्ली : अमेरिका और भारत के संबंध वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्थितियों से उत्पन्न हुए रणनीतिक साझेदारी, लोकतंत्र के प्रति प्रतिबद्धता और नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखने सहित कई अन्य साझा मूल्यों पर आधारित है. दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश एवं कनेक्टिविटी के माध्यम से वैश्विक सुरक्षा, स्थिरता और आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए पारस्परिक हित हैं. अमेरिका भारत के प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में उभरने और इंडो-पेसिफिक क्षेत्र में शांति व स्थिरता को बनाए रखने और बढ़ती समृद्धि के क्षेत्र के रूप में सुरक्षित करने के प्रयासों में महत्त्वपूर्ण भागीदार के रूप में उभरने का समर्थन करता है. भारत में नए अमेरिकी राजदूत के रूप में जल्द ही एरिक गार्सेटी अपना कार्यभार संभालेंगे. एरिक ऐसे समय में अपना पदभार संभालेंगे जब वैश्विक भू-राजनीतिक चुनौतियां अपने चरम पर है.

दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए वह पूरी तरह से तैयार हैं. भारत के रूस के साथ संबंधों को बैलेंस करते हुए वे अमेरिका के साथ भारत के संबंधों को संतुलित करने की कोशिश करेंगे. अमेरिका भारत के साथ एक दीर्घकालिक संबंध स्थापित करना चाहता है. अपने संबंधों को और प्रभावी बनाना चाहता है ताकि भविष्य में चीन के बढ़ते वर्चस्व के खिलाफ कार्रवाई करने में मदद मिल सके. शीर्ष आधिकारिक स्रोत ने एबीपी लाइव को बताया कि भारत में अमेरिका के नए राजदूत गार्सेटी का काम शुरू से ही कठिन होगा. चूंकि भारत में एक राजदूत की नियुक्त करने में देरी हुई है. दोनों देश अपने संबंधों को कठिन समय में प्रभावी रूप से मैनेज कर रहे थे. चूंकि उस वक्त रूस ने फरवरी 2021 में यूक्रेन के खिलाफ युद्ध शुरू कर दिया था और एलएसी पर भारत के खिलाफ चीन एलएसी पर आक्रामक हो गया था. सूत्रों के मुताबिक, यह पहली बार था जब अमेरिका ने भारत में अपना दूत भेजने में इतना लंबा समय लिया.

भारत में अंतिम अमेरिकी राजदूत केनेथ जस्टर ने अपना कार्यकाल जनवरी 2020 में पूरा कर लिया था. उस वक्त से अमेरिका ने भारत में अपना कोई नया राजदूत नियुक्त नहीं किया था. इन तीन साल से अधिक अवधि के दौरान भू-राजनीतिक स्थिति में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन आए हैं. हालांकि, सूत्रों ने कहा, यह समयावधी भारत सरकार के लिए "वरदान" साबित हुई है. चूंकि भारत इस दौरान विदेश विभाग, पेंटागन और व्हाइट हाउस के साथ अपना सीधा संबंध स्थापित करने में सक्षम रहा. भारत में अमेरिका के नए राजदूत गार्सेटी, एक शिक्षक और राजनयिक हैं. 15 मार्च को अमेरिकी सीनेट ने वोट देकर इन्हें भारत में 26वें राजदूत के रूप में प्रतिनियुक्ति पर मुहर लगाई. इससे पहले, उन्हें 2013 में लॉस एंजिल्स शहर के 42वें मेयर के रूप में कार्य करने का मौका मिला था. वे लॉस एंजिल्स के इतिहास में सबसे कम उम्र के मेयर के रूप में चुने गए थे और उन्हें 2017 में अपने शहर में अब तक के सबसे बड़े अंतर के साथ फिर से चुना गया था. गार्सेटी एक पूर्व नौसेना अधिकारी भी रहे हैं. उन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय में हिंदी और भारतीय संस्कृति और इतिहास का अध्ययन किया है. उन्होंने विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल एंड पब्लिक अफेयर्स से मास्टर डिग्री हासिल की है.

रक्षा साझेदारी को उच्चतम स्तर पर ले जाने की तैयारी

दोनों देश रक्षा क्षेत्र में रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाते हुए, उच्च-प्रौद्योगिकी पहल और रक्षा खरीद पर अधिक ध्यान केंद्रित करेंगे. बाइडेन प्रशासन अपने भारत-प्रशांत नीति ढांचे (Indo-Pacific policy framework) के साथ आगे बढ़ेगा, जो समुद्री क्षेत्र में दोनों देशों के बीच गहरे सहयोग को आगे बढ़ाएगा. अमेरिका और भारत ने हाल ही में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकी (Semiconductor Industries) सहित महत्वपूर्ण और उभरती हुई प्रौद्योगिकी पर एक पहल शुरू की है, जिसका नेतृत्व दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार करेंगे.

पूर्व अमेरिकी दूत केनेथ जस्टर ने वाशिंगटन डीसी से एबीपी लाइव को बताया कि "ट्रम्प प्रशासन के तहत, अमेरिका ने भारत को सामरिक व्यापार प्राधिकरण टियर 1 (STA-1) का दर्जा दिया, जिसने अमेरिकी कंपनियों को कुशलतापूर्वक उच्च गुणवत्ता वाले प्रौद्योगिकियों के श्रृंखला का निर्यात करने के लिए लाइसेंस प्रदान किया. उन्होंने कहा कि उसे आगे बढ़ाते हुए बाइडेन प्रशासन ने कई महत्वपूर्ण नीतिगत उपायों के साथ उच्च प्रौद्योगिकी संबंधों का विस्तार देना जारी रखा है. इनमें क्रिटिकल और इमर्जिंग टेक्नोलॉजी (Critical and Emerging Technology) की पहल शामिल है, जिसका नेतृत्व दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार कर रहे हैं. यूएस-इंडिया स्ट्रेटेजिक ट्रेड डायलॉग के तहत दोहरे उपयोग वाली वस्तुओं का निर्यात शामिल है, जो उच्च प्रौद्योगिकी सहयोग समूह का पुनरुद्धार है, जिसका कि विदेश सचिव कंवल सिब्बल और मैंने 2002 में सह-स्थापना किया था. राजदूत गार्सेटी के लिए ये सब क्षेत्र महत्वपूर्ण होंगे.

कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, भारत और अमेरिका अपने रक्षा साझेदारी को उच्चतम स्तर पर ले जाने के लिए तैयार हैं. चूंकि अमेरिका अपने F-15 और F-35 फाइटर जेट और B-1B बमवर्षक भेजकर भारतीय आसमान में अपनी वायु शक्ति का प्रदर्शन कर रहा है. भारत अपने तीनों सशस्त्र बलों - थल सेना, वायुसेना और नौसेना के लिए $3 बिलियन अमेरिकी डॉलर के सौदे के तहत अमेरिकी रक्षा समूह जनरल एटॉमिक्स से 30 MQ-9B प्रीडेटर ड्रोन खरीदने के भी करीब है. जस्टर ने कहा कि अमेरिका-भारत के संबंध अच्छी स्थिति में हैं. अब हमारे पास बहुत सक्षम अमेरिकी राजदूत हैं, जो संबंधों को अगले स्तर तक ले जा सकते हैं. उन्होंने कहा कि भारत के साथ हमारी रणनीतिक साझेदारी के लिए पिछले 20 से अधिक वर्षों में संयुक्त राज्य अमेरिका में मजबूत द्विदलीय समर्थन रहा है. बिडेन प्रशासन ने इस परंपरा को जारी रखा है, एक मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत का समर्थन करने और क्षेत्र में एक सकारात्मक एजेंडा को बढ़ावा देने के लिए क्वाड (ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका) को एक प्रमुख समूह के रूप में आगे बढ़ाने के लिए नीतियों को आगे बढ़ाया है.

जस्टर ने कहा कि रूस-यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को लेकर जो वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच मतभेद हैं, उस पर दोनों देशों ने आपसी चर्चा की है और हम एक-दूसरे की स्थिति की अच्छी समझते हैं. इस मुद्दे पर राजदूत गार्सेटी की उपस्थिति से दोनों देशों के बीच संवाद को बढ़ा सकती है. वह G20 की अध्यक्षता के दौरान भारत को अमेरिकी समर्थन भी प्रदान कर सकते हैं.

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