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पीएम मोदी का विज़न 2047, अगले 25 साल का रोड मैप और गृह मंत्री अमित शाह के दिशा-निर्देश

15 अगस्त 2047 को हमारी आजादी के 100 साल पूरे हो जाएंगे. अभी से अगले 25 साल तक के समय को प्रधानमंत्री ने अमृतकाल कहा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत को वर्ष 2047 तक विकसित बनाने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहे हैं. उन्होंने इसके लिए देश में कई योजनाओ, सरकारी स्तर पर विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक सुधार और विकास को गति देने के लिए अर्थव्यवस्था के विभिन्न आयामों को परिलक्षित किया है. इसके लिए बनाई गई कार्य योजनाओं को धरातल पर उतारने और उसमें समय-समय पर बदलाव की जरूरत पड़ेगी.

इसी क्रम में मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री, अमित शाह ने मंगलवार को नई दिल्ली में गृह मंत्रालय (एमएचए) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ 'चिंतन शिविर' की अध्यक्षता की. इसका उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "विजन-2047" को लागू करने के लिए एक कार्य योजनाओं को तैयार करना है. विजन-2047 के लिए गृह मंत्री ने पीएम मोदी के "विजन 2047" के कार्ययोजनाओं को धरातल पर उतारने की कोशिश करने को लेकर है.

'चिंतन शिविर' में चर्चा दो सत्रों में आयोजित हो रही है. इस दौरान गृह मंत्री को मंत्रालय के लंबित कार्यों, चल रहे कार्यों के साथ-साथ नियोजित किए जा रहे कार्यों से अवगत कराया जाएगा. गृहमंत्री के मार्गदर्शन और पीएम मोदी के नेतृत्व में अगले 25 वर्षों के लिए रोडमैप के रूप में कार्ययोजना को लागू किया जाना है. अमित शाह अपने मंत्रालय से संबंधित सभी क्षेत्रों के मुद्दों पर 'चिंतन शिविर' में चर्चा की.

गृहमंत्री ने एमएचए डैशबोर्ड, सरकारी भूमि सूचना प्रणाली (जीएलआईएस), बजट उपयोगिता, ई-ऑफिस और विशेष भर्ती अभियान आदि के कामकाज की भी समीक्षा की. आत्मनिर्भर भारत, विभिन्न बजट घोषणाएं और महत्वपूर्ण लंबित मुद्दों पर चर्चा की. उन्होंने साइबर अपराध प्रबंधन, पुलिस बलों के आधुनिकीकरण, आपराधिक न्याय प्रणाली में आईटी के बढ़ते उपयोग, भूमि सीमा प्रबंधन और तटीय सुरक्षा मुद्दों आदि के लिए पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने पर जोर दिया. शाह ने कहा कि AI का उपयोग कर सीसीटीएनएस डेटाबेस के लिए खुफिया जानकारी तैयार की जानी चाहिए. जिससे शहरों को महिलाओं, बच्चों और कमजोर वर्गों के लिए सुरक्षित बनाया जा सके. केंद्रीय गृह मंत्री ने सुझाव दिया कि गृह मंत्रालय के अधिकारियों को विकास योजनाओं की निगरानी के लिए क्षेत्र का दौरा करें. उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में बाड़ लगाने और सड़कों के निर्माण में तेजी लाने का भी निर्देश दिया.

अमित शाह ने जिन आयामों की समीक्षा की

पुलिस बलों के आधुनिकीकरण: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुलिस बलों के आधुनिकीकरण (MPF) की व्यापक योजना को जारी रखने की मंजूरी दे दी है. इसके तहत 2021-22 से 2025-26 की अवधि के लिए मंजूरी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस बलों के कामकाज को आधुनिक और बेहतर बनाने की पहल को आगे बढ़ाया है. इस योजना में कई उप-योजनाएं शामिल हैं और इसके लिए 26,275 करोड़ रुपये के कुल केंद्रीय वित्तीय आवंटन किया गया है. जोकि पुलिस बलों के आधुनिकीकरण और मौजूदा तंत्र में सुधार करने में सहायक सिद्ध होगी. पुलिस सुधारों का उद्देश्य पुलिस संगठनों के मूल्यों, संस्कृति, नीतियों और प्रथाओं को बदलना है ताकि पुलिस लोकतांत्रिक मूल्यों, मानवाधिकारों और कानून के शासन के संबंध में अपने कर्तव्यों का पालन कर सकें.

आपराधिक न्याय प्रणाली में आईटी के बढ़ते उपयोग : प्रिडिक्टिव एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तेजी से उभरती हुई प्रौद्योगिकियां हैं, जो आपराधिक न्याय सहित विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति कर रही हैं. प्रिडिक्टिव एनालिटिक्स में भविष्य की घटनाओं या व्यवहारों के बारे में भविष्यवाणी करने के लिए ऐतिहासिक डेटा का उपयोग करना शामिल है. दूसरी ओर, एआई में बुद्धिमान मशीनों का उपयोग किया जाता है जो मानव संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं को उन कार्यों को पूरा करने के लिए अनुकरण कर सकते हैं जिन्हें मानव हस्तक्षेप की आवश्यकता होगी. आपराधिक न्याय के संदर्भ में, प्रिडिक्टिव एनालिटिक्स और एआई का उपयोग आपराधिक व्यवहार की भविष्यवाणी करने, संभावित अपराधियों की पहचान करने और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं को सूचित करने के लिए किया जा रहा है. इन तकनीकों का उपयोग आपराधिक न्याय के विभिन्न क्षेत्रों में किया जा रहा है, जिसमें कानून प्रवर्तन, न्यायिक कार्यवाही और सुधार शामिल हैं. भारत में, इन तकनीकों के उपयोग 2000 के दशक की शुरुआत से किया जा रहा है. जब पुलिस ने संभावित अपराधियों की पहचान करने और अपराध हॉटस्पॉट का अनुमान लगाने के लिए डेटा माइनिंग और विश्लेषण टूल का उपयोग करना शुरू किया था. हाल के वर्षों में, इन तकनीकों के उपयोग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, कई राज्यों और कानून प्रवर्तन एजेंसियां इसे अपने संचालन में सुधार करने के लिए अपना रहे हैं.

सरकारी भूमि सूचना प्रणाली (GLIS): इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना मंत्रालय द्वारा बनाया गया अपनी तरह का पहला केंद्रीकृत डेटाबेस है और इसकी निगरानी प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा की जाती है. जीएलआईएस पोर्टल कुल क्षेत्र, भू-स्थिति मानचित्र, और स्वामित्व अधिकार जैसे अहम जानकारियों का रिकॉर्ड रखता है. इस पोर्टल के अनुसार भारतीय रेलवे केंद्रीय मंत्रालयों में सबसे बड़ा भू-स्वामी है. चूंकि भारत में जमीन विवाद एक बहुत बड़ा मुद्दा है. देश में क्राइम को बढ़ाने में भूमि-विवाद सबसे बड़ा फैक्टर है. जब हम विकसित भारत के लक्ष्यों के साथ आगे बढ़ रहे हैं तो हमें इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए जमीन की आवश्यकता होगी. देश भर में बड़े स्तर पर सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा है. जिसे लोकेट करने के लिए सरकार ने यह अहम पहल की है. बता दें कि 2012 में, पूर्व वित्त सचिव विजय केलकर की अध्यक्षता वाली एक समिति ने शहरी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए सरकार की अप्रयुक्त और कम उपयोग वाली भूमि का मुद्रीकरण करने की सिफारिश की थी.

बॉर्डर लैंड मैनेजमेंट एंड कोस्टल सुरक्षाः  बॉर्डर लैंड मैनेजमेंट एंड कोस्टल सुरक्षा के अंतर्गत बहुत सारे आयाम हैं. जिसमें भारत और नेपाल/भूटान/बांग्लादेश के सीमावर्ती जिलों के जिला अधिकारियों के बीच बैठक आयोजित किया जाना, भारत-बांग्लादेश सीमा से संबंधित सर्वेक्षण बैठकें और एन्क्लेव के आदान-प्रदान और प्रतिकूल कब्जे के नियमितीकरण से संबंधित मामले शामिल हैं. इसी के अंतर्गत तीन बीघा कॉरिडोर (भारत और बांग्लादेश के लोगों के बीच आवागमन के लिए गलियारा) मायने रखता है. सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी), तट रक्षक मामले इसके अंतर्गत आते हैं. बॉर्डर पर मवेशियों की तस्करी, नकली भारतीय मुद्रा, नशीले पदार्थों और मानव तस्करी सहित सीमा अपराध होते रहते हैं. इन्हें रोकने लिए उचित हस्तक्षेप और लगातार प्रयास किया जा रहा है.

इससे पहले विभिन्न अवसरों पर अपने 'विजन 2047' संदेश में, प्रधानमंत्री मोदी ने सभी क्षेत्रों में मुद्दों से निपटने के लिए सरकारी नीतियों और नौकरशाही प्रक्रियाओं के साथ आने की आवश्यकता पर बल दिया है. गृह मंत्री का गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों का 'चिंतन शिविर' पीएम के उस विजन को पूरा करने के लिए उठाए जा रहे कई कदमों में से एक है, जिसका उद्देश्य लोगों का कल्याण करना और 'अमृत काल' में 'आत्मनिर्भर भारत' का निर्माण करना है.

क्या है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन@2047

'आजादी का अमृत महोत्सवः' 'आजादी का अमृत महोत्सव' भारत की संस्कृति और उपलब्धियों के गौरवशाली इतिहास को मनाने और मनाने के लिए भारत सरकार द्वारा की गई एक पहल है. यह भारत के लोगों को समर्पित है और न केवल भारत को उसकी विकास यात्रा में यहां तक लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, बल्कि उनके भीतर आत्मनिर्भर भारत की भावना से प्रेरित भारत 2.0 यानी नए भारत की परिकल्पना को भी सक्रिय करने की दृष्टि को सक्षम करने की शक्ति और क्षमता को विकसित करना है. आजादी का अमृत महोत्सव की आधिकारिक तौर पर शुरुआत 12 मार्च 2021 को हुई थी, जिसके अंतर्गत आजादी की 75वीं वर्षगांठ के लिए 75 सप्ताह की कार्ययोजना के तहत सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक धरोहरों, देश की आजादी के नायकों को जानने का सतत प्रयास जारी है. इसके अंतर्गत प्रधानमंत्री के कई महत्वपूर्ण योजनाओं का लाभ और उसके प्रति जागरूकता को लेकर भी अभियान जैसे स्वच्छता अभियान, पोषण अभियान, टीबी मुक्त भारत अभियान के लिए सामाजिक कार्यों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है. यह आजादी का अमृत महोत्सव इस वर्ष 15 अगस्त 2023 के बाद समाप्त होगी.

अमृत कालः 15 अगस्त को 2023 के बाद से हम अपनी आजादी का 100वां वर्षगांठ जोकि 2047 में होगा, उस के लिए अपनी यात्रा शुरू करेंगे. इस कालखंड को ही प्रधानमंत्री ने भारत का अमृत काल कहा है. इस समयावधि में उन्होंने भारत को एक विकसित राष्ट्र के तौर पर बनाने के लिए सभी क्षेत्रों में व्यापक तौर पर विकास के लिए कार्य योजनाओं और उसे धरातल 100 % लागू करने करने का लक्ष्य रखा गया है. 75वें स्वतंत्रता दिवस पर आजादी का अमृत महोत्सव मनाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'इंडिया एट 75' यानी आजादी के 75 वर्ष की बात की थी. उन्होंने यह भी कहा था कि ''आगामी 25 वर्ष अमृत काल है. इस कालखंड में हम संकल्प से सिद्धि, के सपनों को साकार करते हुए आजादी के सौ वर्ष तक जाएंगे. लेकिन इसके लिए हमें अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए लंबा इंतजार नहीं करना है, बल्कि सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और अब सबके प्रयास से इसे हासिल करना है. उन्होंने आगे कहा था कि हम पहले की तुलना में बहुत तेजी से बहुत आगे बढ़े हैं. लेकिन हमें सैचुरेशन प्वाइंट तक जाना है. पूर्णता तक जाना है. देश के गांवों में सड़के हों, शत-प्रतिशत परिवारों का बैंक में अकाउंट हो, शत-प्रतिशत लाभार्थियों को आयुष्‍मान भारत का कार्ड हो, शत-प्रतिशत पात्र व्यक्तियों को उज्ज्वला योजना और गैस का कनेक्शन उपलब्ध हो.

विकसित भारत के लिए विजन-2047 के तहत विभिन्न आयाम

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करनाः भारत लंबे समय से रक्षा क्षेत्र की जरूरत को पूरा करने के लिए दूसरे विकसित राष्ट्रों से हथियारों और तकनीकों का आयात करता रहा है. विजन@2047 के तहत हम अब अपने घरेलू रक्षा विनिर्माण पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं. इसके तहत हम हथियारों और नई तकनीक को विकसित करने के लिए घरेलू रक्षा उद्योगों को बढ़ावा दे रहे हैं. उन्हें नवाचार के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. इसके लिए रक्षा क्षेत्र में अपनी विनिर्माण क्षमता को दुनिया के समक्ष रखने के लिए हम एयरो इंडिया शो का आयोजन पिछले कुछ वर्षों से कर रहे है. जहां पर दुनिया के विभिन्न देशों के प्रतिनिधि भी आमंत्रित किए जाते हैं. इसके साथ ही हम अपनी रक्षा आयात को घटाने या कम करने का काम कर रहे हैं. सरकार का लक्ष्य है कि हम अपने ही देश में मेक-इन-इंडिया के तहत एयरक्राफ्ट, पनडुब्बी, छोटे हथियार, राइफल, गोला-बारूद, युद्धक टैंक का विनिर्माण करें. इसमें हमें कुछ हद तक सफलता भी मिली है. इसके साथ ही हम अपने यहां से निर्मित हथियारों को अन्य देशों को भी निर्यात करें. इस क्षेत्र में भी हम अपनी पहचान बनाने में सफल हुए हैं. लेकिन अभी यह वैश्विक हथियार बाजार की तुलना में कम है. पिछले साल तक हमने लगभग 15000 करोड़ रुपये के हथियारों का निर्यात किया है. इसके अलावा बॉर्डर एरिया खासकर के चीन और पाकिस्तान से लगते सीमाओं पर सड़क, पुल, रेलवे लाइन बिछाई जा रही हैं. ताकि भविष्य में किसी भी युद्ध के संकट के समय हमारी सेना सीमाओं तक आसानी से पहुंच सकें. इसके लिए बीआरओ (Border Road Organization) युद्धस्तर पर कार्य कर रही है.

तकनीक-संचालित और ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था : रोजगार सृजित के लिए शिक्षा और स्किल दोनों ही महत्वपूर्ण कारक होते हैं. इसके अलावा व्यावसायिक अनुप्रयोगों में अनुसंधान के लिए, व्यवसाय करने में आसानी और सामाजिक चुनौतियों का समाधान करने के लिए डिजिटल तकनीक आज के समय की पहली जरूरत है. तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने और इसे बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने की भारत की क्षमता आर्थिक विकास को चलाने वाले प्रमुख स्तंभों में से एक है. इसका एक छोटा सा उदाहरण हम आधार, यूपीआई और भारत स्टैक जैसे अन्य प्लेटफार्म से हो रहे परिवर्तन से देख सकते हैं. सरकार लगातार देश में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी का विस्तार कर रही है. एक इन्फोर्मेशन बेस्ड सोसायटी के निर्माण के लिए इंटरनेट के प्रनिट्रेशन को देखते हुए वाईफाई सुविधाओं को विकसित किया जा रहा है. देश के रेलवे स्टेशनों और सार्वजनिक जगहों पर इसका विस्तार किया जा रहा है.

वाटर विजन@2047: मध्य प्रदेश के भोपाल में 5-6 जनवरी को 'वाटर विजन@2047' सम्मेलन को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, था कि 'वाटर विजन@2047 अमृत काल की अगले 25 साल की यात्रा का अहम आयाम है.' चूंकि आज पूरे विश्व में जल संकट एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है. प्रधानमंत्री ने इस खतरे को भांपते हुए "जल जीवन मिशन" की शुरुआत की थी. उन्होंने इस कार्य योजना की प्रशंसा करते हुए कहा है कि कई राज्यों ने अच्छा काम किया है, जबकि कई अन्य इस क्षेत्र में प्रगति कर रहे हैं. साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि एक बार यह व्यवस्था लागू हो जाने के बाद भविष्य में भी इसी तरह से रखरखाव सुनिश्चित किया जाना चाहिए. ग्राम पंचायतों को जल जीवन मिशन का प्रभारी होना चाहिए और एक बार जब यह समाप्त हो जाए, तो उन्हें प्रमाणित करना चाहिए कि पर्याप्त स्वच्छ पानी उपलब्ध कराया गया है. इसके लिए देश भर में अमृत सरोवरों का निर्माण, जीर्णोद्धार कार्य कराए जा रहे हैं. प्रत्येक जिलो में 75 अमृत सरोवर का निर्माण मनरेगा अंतर्गत योजनाओं से करवाया जा रहा है. इसके अलावा सरकार ने कैच-द-रेन योजना भी शुरू की है.

ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना : प्रधानमंत्री ने भारत को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए वर्ष 2070 तक कार्बन उत्सर्जन को नेट जीरो करने का लक्ष्य रखा है. इसके साथ ही देश में 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा के स्रोतों से 40 प्रतिशत ऊर्जा की जरूरतों की पूर्ती का लक्ष्य है. इसमें सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना, गोबर गैस परियोजनाएं आदि शामिल है.इस क्रम में हमने अब तक अपने लक्ष्यों को समयावधि से पहले ही प्राप्त कर लिया है.

पांच ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाना : पीएम मोदी ने 15 अगस्त 2022 को लाल किले से कहा था कि हमें अपने देश को साल 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाना है. इसके लिए हमें इम्पोर्ट को कम करना है और अपने घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना है. अभी हम विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हैं. वर्ष 2030 तक हम जापान और जर्मनी को पीछे छोड़ते हुए विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है. इसके लिए देश के विनिर्माण क्षेत्र को मजबूती प्रदान करने के लिए सरकार लगातार कोशिश कर रही है. लगातार व्यापार और निवेश को आकर्षित करने लिए कानूनों में सुधार और नियमों को उदार बनाया जा रहा है. हमने हाल में अपनी नई व्यापार नीति भी लाई है. जिससे देश में बाहरी कंपनियों को अपने उद्योगों को स्थापित करने, सामानों को दूसरे देश में निर्यात करने आदि में कई तरह की सुविधाओं को आसान और न्यायसंगत बनाया गया है.

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