आज, जैसे-जैसे समाज आधुनिक होते जा रहे हैं, संस्कृतियां पूरी तरह से ‘शरीर संस्कृति’ बनती जा रही हैं. शरीर सबसे अहम हिस्सा बन गया है. जब हम विकसित होते हैं तो दूसरे पहलुओं को ज्यादा महत्वपूर्ण