एक्सप्लोरर

BLOG: असम के उबाल की गर्मी पूरे देश तक पहुंचनी चाहिए

साल 2016 में नागरिकता संशोधन विधेयक पेश किया गया था. यह विधेयक 1955 के नागरिकता अधिनियम में संशोधन करता है. 1955 का अधिनियम भारत में जन्म स्थान के आधार पर लोगों को नागरिकता देता है.

उत्तर पूर्व अक्सर गर्म हो जाता है ऐसा ही कुछ इस हफ्ते भी हुआ. असम में नागरिकता संशोधन विधेयक पर 60 संगठनों ने बंद की अपील की. बंद सफल भी रहा. बाजार, दुकानें, बैंक, वित्तीय संस्थान वीरान रहे. सड़कें और दफ्तर भी. यहां तक कि राज्य की सत्ताधारी बीजेपी सरकार के सहयोगी असम गण परिषद भी बंद को भी अपना नैतिक समर्थन दिया. कई कद्दावर नेता खुद विरोध जताते दिखाई दिए. मामला वोट बैंक का था. नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर असम बहुत टची है. पूर्वोत्तर के दूसरे राज्य भी हैं. इस विधेयक का तब से ही विरोध हो रहा है, जब 2016 में गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे लोकसभा में पेश किया गया था. अब संसद के विंटर सेशन में इसे पास करवाने की कोशिश है. इस विधेयक को असमिया लोग अपने अस्तित्व, पहचान, संस्कृति और भाषा पर खतरा बताते हैं. कहा जाता है कि पूरा जनमत विधेयक के खिलाफ है. इसीलिए तरह-तरह से अपना ऐतराज जता रहा है- भूख हड़ताल कर रहे हैं. याचिकाएं दायर की जा रही हैं. पुतले फूंक रहे हैं. बातचीत की गुंजाइश खत्म करने का ऐलान किया जा रहा है.

2016 में नागरिकता संशोधन विधेयक पेश किया गया था. यह विधेयक 1955 के नागरिकता अधिनियम में संशोधन करता है. 1955 का अधिनियम भारत में जन्म स्थान के आधार पर लोगों को नागरिकता देता है. यानी भारत में जन्मे व्यक्ति को. चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का हो. अब नया विधेयक धर्म और जाति के आधार पर नागरिकता देने की बात कहता है. इसके हिसाब से बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को छह साल तक भारत में रहने के बाद यहां की नागरिकता मिल जाएगी. इन अल्पसंख्यकों में हिंदू, ईसाई, पारसी, सिख, बौद्ध और जैन शामिल हैं. मतलब अगर बांग्लादेश का कोई हिंदू अवैध तरीके से भारत में घुसता है और किसी तरह छह साल तक यहां बना रहता है तो वह इसके बाद नागरिकता हासिल करने का अधिकारी हो जाएगा.

विधेयक के इसी हिस्से से पूर्वोत्तर बेचैन है. उसे डर है कि इससे बांग्लादेश के हिंदू वैध तरीके से देश के नागरिक बन जाएंगे और पूरे क्षेत्र की डेमोग्राफिक बनावट का सत्यानाश हो जाएगा. इन राज्यों की तीन चौथाई से ज्यादा सीमा अंतरराष्ट्रीय है. आशंका जताई जा रही है कि इस संशोधन के सबसे पहले विक्टिम वही राज्य होंगे. असम खास तौर से आगबबूला है. लगातार चार दशकों से बांग्लादेश की अनियंत्रित घुसपैठ को रोकने के लिए संघर्ष कर रहा है. 1979 में अवैध प्रवासियों के खिलाफ खूनी संघर्ष कर चुका है. 1985 में असम समझौते के बाद यह कहा गया था कि 1971 के बाद दूसरे देशों से गैर कानूनी तरीके से असम आने वाले सभी लोगों को अवैध अप्रवासी ही माना जाएगा और उन्हें वापस जाना होगा. अब यह पूरा समझौता ही बेमानी होने वाला है.

जिस संशोधन विधेयक पर पूर्वोत्तर में बवाल मचा है, उसका महत्व सिर्फ देश के उत्तर पूर्व में नहीं है. इससे पूरे देश की संरचना की चूलें हिल सकती हैं. आजादी के बाद से भारत की नागरिकता का आधार जन्म से जुड़ा था. जिसे दुनिया भर में जस सोली नियम कहा जाता है. यानी किसी व्यक्ति की नागरिकता उसके जन्मस्थान या जिस देश में वह पैदा हुआ है, उससे निर्धारित होती है. 1947 के बाद जब संविधान बना, तब भी नागरिकता के मुद्दे पर संविधान निर्माताओं की अलग-अलग राय थी. इसीलिए बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ने कहा था कि संविधान मेंनागरिकता के अनुच्छेद को तैयार करने में 'हमारा सिरदर्द हो गया.'

यह इसलिए भी था, क्योंकि हिंदुओं को तो हम देश का प्राकृतिक नागरिक मानते थे. पर मुसलमानों को लेकर हमारा पूर्वाग्रह तब भी कायम था, अब भी है. पर संविधान रचयिताओं ने देश को कानून को धर्म निरपेक्ष और गैर धार्मिक ही बनाए रखा था. आप किसी भी जाति या धर्म या संप्रदाय के होकर भी भारत के नागरिक बन सकते हैं. पर अब कानून का चरित्र बदलने की कोशिश की जा रही है. अब नागरिकता का अधिकार जस सोली के जगह, जस सेंग्विनिस वाला हो सकता है, यानी रक्त संबंध पर आधारित. धर्म और जाति पर आधारित.

यूं यह विधेयक अंतरराष्ट्रीय शरणार्थी कानून के सिद्धांतों पर भी खरा नहीं उतरता, जो इनसानियत के नाम पर लोगों को सहारा देने की वकालत करता है. विधेयक में कई कानूनी पेंच भी है. यह अल्पसंख्यक धार्मिक समुदायों को प्रवासी कहता है लेकिन वे प्रवासी नहीं, शरणार्थी होते हैं. इन दोनों में जमीन-आसमान का फर्क होता है. प्रवासी लोग आर्थिक संभावनाओं को तलाशते हुए किसी देश पहुंचता है- अपनी मर्जी से. लेकिन शरणार्थी अपनी मर्जी से अपनी जमीन छोड़कर किसी दूसरी जगह नहीं जाते. शरणार्थियों को जबरन पलायन करता पड़ता है. वे मूलभूत मानवाधिकार और सुरक्षा की इच्छा लेकर कहीं पहुंचते हैं. फिर विधेयक स्पष्ट कहता है कि हम हम कमजोर लोगों को, सताए गए लोगों को- जिनके मानवाधिकार खतरे में हैं- सहारा देना चाहते हैं. यही वजह है कि कानून में उपयुक्त परिभाषाओं को जगह दी जाए. चूंकि प्रवासियों और शरणार्थियों की परिभाषा अलग-अलग है, जरूरत भी- साथ ही उन पर नीतियों और कानूनों को भी अलग-अलग और सुस्पष्ट होना चाहिए. अल्पसंख्यकों को सहारा देना, अगर नीति और दायित्व है तो रोहिंग्या मुसलमानों की दुर्दशा भी नजर दौड़ाई जानी चाहिए. चीन और श्रीलंका के अल्पसंख्यक मुसलमान भी इस सहानुभूति के लिए टकटकी लगाए बैठे हैं. पर विधेयक तो मुसलमानों के साथ-साथ यहूदियों और नास्तिकों के साथ भी धर्म और मान्यताओं के आधार पर भेदभाव करता है. साथ ही संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन भी- जोकि सभी को समानता का अधिकार देता है.

दरअसल केंद्र सरकार सिर्फ अपना चुनावी वादा निभा रही है. 2014 में सत्ता बनाने से पहले कहा गया था कि दुनिया में जहां कहीं भी हिंदू प्रताड़ित हैं, वे भारत का अपना प्राकृतिक घर मान सकते हैं. फिर विदेशों में बसे भारतीयों का भी दिल जीतना एक उद्देश्य है. ध्रुवीकरण से बहुत कुछ संभव है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव जीतने के बाद देश के रेफ्यूजी इंट्री प्लान को 120 दिनों के लिए निरस्त करने की घोषणा की थी. इसीलिए अपने यहां भी यह तय करना जरूरी है कि असम का उबाल, सिर्फ पूर्वोत्तर तक ही सीमित रहना चाहिए या पूरे देश तक इसकी गर्मी पहुंचनी चाहिए.

(नोट- उपरोक्त दिए गए विचार व आंकड़े लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.)

View More

ओपिनियन

Sponsored Links by Taboola
25°C
New Delhi
Rain: 100mm
Humidity: 97%
Wind: WNW 47km/h

टॉप हेडलाइंस

वेनेजुएला और ईरान के बाद अब अमेरिका के निशाने पर कौन सा देश? ट्रंप ने दिया क्लीयर जवाब
वेनेजुएला और ईरान के बाद अब अमेरिका के निशाने पर कौन सा देश? ट्रंप ने दिया क्लीयर जवाब
'उनकी बुद्धि भ्रष्ट हो गई है, बिहार नहीं छोड़ना चाहिए', नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने को लेकर बोलीं राबड़ी देवी
'उनकी बुद्धि भ्रष्ट हो गई है, बिहार नहीं छोड़ना चाहिए', नीतीश कुमार को लेकर बोलीं राबड़ी देवी
'परमिशन की जरूरत नहीं', ट्रंप के रूसी तेल खरीदने की 30 दिन की छूट पर आया भारत का रिएक्शन
'परमिशन की जरूरत नहीं', ट्रंप के रूसी तेल खरीदने की 30 दिन की छूट पर आया भारत का रिएक्शन
'धुरंधर 2' के बाद 'हीर रांझा' में नजर आएंगी सारा अर्जुन? मुकेश छाबड़ा ने बताई सच्चाई
'धुरंधर 2' के बाद 'हीर रांझा' में नजर आएंगी सारा अर्जुन? मुकेश छाबड़ा ने बताई सच्चाई
ABP Premium

वीडियोज

Iran Israel War News: तेहरान की ताबड़तोड़ स्ट्राइक जारी, अमेरिका का बारूद..ईरान पर भारी | War| Trump
Sandeep Chaudhary: वरिष्ठ पत्रकारों ने खोला राज, क्या अमेरिका ट्रंप के नीचे दब गया? | LPG Price Hike
Iran- Israel War: 'महायुद्ध' का 8वां दिन, तबाही का भयानक सीन!| IranAttackonIsrae l-America Air Base
Chitra Tripthi: ईरान नहीं झुका, अमेरिका ने किया सबसे बड़े हमले का ऐलान... | Iran Israel War |Trump
Jab Khuli Kitaab Review: पंकज कपूर और डिंपल कपाड़िया | एक खूबसूरत और परिपक्व प्रेम कहानी

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
वेनेजुएला और ईरान के बाद अब अमेरिका के निशाने पर कौन सा देश? ट्रंप ने दिया क्लीयर जवाब
वेनेजुएला और ईरान के बाद अब अमेरिका के निशाने पर कौन सा देश? ट्रंप ने दिया क्लीयर जवाब
'उनकी बुद्धि भ्रष्ट हो गई है, बिहार नहीं छोड़ना चाहिए', नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने को लेकर बोलीं राबड़ी देवी
'उनकी बुद्धि भ्रष्ट हो गई है, बिहार नहीं छोड़ना चाहिए', नीतीश कुमार को लेकर बोलीं राबड़ी देवी
'परमिशन की जरूरत नहीं', ट्रंप के रूसी तेल खरीदने की 30 दिन की छूट पर आया भारत का रिएक्शन
'परमिशन की जरूरत नहीं', ट्रंप के रूसी तेल खरीदने की 30 दिन की छूट पर आया भारत का रिएक्शन
'धुरंधर 2' के बाद 'हीर रांझा' में नजर आएंगी सारा अर्जुन? मुकेश छाबड़ा ने बताई सच्चाई
'धुरंधर 2' के बाद 'हीर रांझा' में नजर आएंगी सारा अर्जुन? मुकेश छाबड़ा ने बताई सच्चाई
दिग्गज ने ICC पर लगाए पक्षपात के आरोप, बुरी तरह भड़का दिग्गज, जानें पूरा मामला
दिग्गज ने ICC पर लगाए पक्षपात के आरोप, बुरी तरह भड़का दिग्गज, जानें पूरा मामला
'बुरी तरह हारे ईरान ने किया आत्मसमर्पण', पेजेशकियान के खाड़ी देशों से Sorry बोलने पर बोले ट्रंप, फिर दी ये धमकी
'बुरी तरह हारे ईरान ने किया आत्मसमर्पण', पेजेशकियान के खाड़ी देशों से Sorry बोलने पर बोले ट्रंप
लड़की को प्रपोज करने पूरे खानदान को ले गया आशिक, महबूबा के घर के बाहर परिवार संग जमकर लगाए ठुमके, वीडियो वायरल
लड़की को प्रपोज करने पूरे खानदान को ले गया आशिक, महबूबा के घर के बाहर परिवार संग जमकर लगाए ठुमके
यूपीएससी 2025 में पानीपत की कीर्ति का कमाल, चौथे प्रयास में हासिल की 304वीं रैंक
यूपीएससी 2025 में पानीपत की कीर्ति का कमाल, चौथे प्रयास में हासिल की 304वीं रैंक
Embed widget