Continues below advertisement
प्रशांत कुमार मिश्र, राजनीतिक विश्लेषक
प्रशान्त कुमार मिश्र स्वतंत्र पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं. इनका  पत्रकारिता का अनुभव 12 वर्षों  से भी अधिक का है. बिहार के मधुबनी जिले के रहने वाले हैं.

टॉप स्टोरीज फ्रॉम ऑथर

एक देश एक चुनाव के लिए सरकार को चाहिए विपक्ष का साथ, नहीं हांक सकते सबको लाठी से आप
चंपाई सोरन न बनें राजनीति का मोहरा, है उनमें मसीहा बनने की संभावना
लेटरल एंट्री नहीं, एससी-एसटी आरक्षण में उप-वर्गीकरण है बड़ी चुनौती
मसला शंभू बॉर्डर नहीं, खेती-किसानी है.. संवाद से निकले रास्ता
द्वि-राष्ट्र सिद्धांत ही नहीं, जिन्ना और मुजीब भी विफल हुए
 बिहार में तीसरा मोर्चा खोलना नहीं होगा आसान, प्रशांत किशोर की राह में होगी बड़ी चुनौती
हिंसाग्रस्त बांग्लादेश में नई पहल की जरूरत, भारत को भी रखना होगा ध्यान
बहुध्रुवीय विश्वव्यवस्था में भी प्रासंगिक भारत-रूस दोस्ती, दबाव के आगे नहीं झुकी, ऐसी होगी भविष्य की नीति
मणिपुर के जख्म और सियासत की भूलें...स्थायी शांति के लिए जरूरी है नागरिक समाज की सक्रियता 
सरकार पर संसदीय नियंत्रण के लिए जरूरी है सशक्त विपक्ष का होना
सरहदी सूबे पंजाब में स्याह ताकतों का उभार नहीं ठीक, जल्द कसनी होगी नकेल
विदेश नीति रहेगी संतुलित और आक्रामक, अमेरिकी नेता के धर्मशाला दौरे से चीन को सख्त संदेश
जाति के इर्द-गिर्द घूमता हुआ संसदीय लोकतंत्र, मुद्दों पर ध्यान नहीं
गठबंधन के मौसम में क्षेत्रीय दलों के समक्ष झुकने के लिए विवश राष्ट्रीय दल
लोकसभा चुनावों में 'कश्मीरियत' की जीत और एक नये युग का आगाज
पश्चिम एशिया सहित वैश्विक शांति के लिए जरूरी है बहुपक्षीय वार्ता होना
पहचान की राजनीति की जगह सहभागिता पर हो काम, तभी होगा अल्पसंख्यकों के साथ न्याय
रामवाण नहीं है 'विरासत कर' (इनहेरिटेन्स टैक्स) गरीबी उन्मूलन के लिए
लोकतंत्र का महापर्व और मतदाताओं का मिजाज, जरूरी है इसको समझना
लोकतंत्र के महापर्व पर बाहुबलियों और दबंगों की छाया
नदियों के आंगन में सूखे का बसेरा, बिहार में जलसंकट का फेरा
हिंदुत्व की विचारधारा के करीब आ रही है दलित राजनीति
इस बार का 'आम चुनाव' है बेहद खास, इसके नतीजे तय करेंगे भारत की तकदीर और तासीर
केजरीवाल की रिमांड और आम आदमी के सपनों का टूटना...दाग कैसे भी हों, अच्छे नहीं लगते हैं
Sponsored Links by Taboola