साल 2026 में गणेश चतुर्थी का महापर्व 14 सितंबर,

सोमवार को मनाया जा रहा है.

Published by: हर्षिका मिश्रा
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भीड़ और हड़बड़ी से बचने के लिए बप्पा की

मूर्ति 1-2 दिन पहले घर लाना पूरी तरह सही है.

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प्रतिमा को दुकान से घर लाना 'आगमन' है,

जबकि मंत्रोच्चार से विराजना 'स्थापना' कहलाता है.

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मूर्ति भले पहले ले आएं, लेकिन विधिवत

पूजा और स्थापना तय मध्याह्न मुहूर्त में ही करें.

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पहले लाई गई मूर्ति को सीधे फर्श पर रखने के

बजाय साफ मेज या चौकी पर सम्मानपूर्वक रखें.

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प्राण-प्रतिष्ठा से पहले प्रतिमा को मुख्य

पूजा स्थल पर न रखें और उसे किसी स्वच्छ कपड़े से ढके रहें.

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मूर्ति के आसपास जूते-चप्पल न आने दें और

उसे पालतू जानवरों व बच्चों की पहुंच से सुरक्षित रखें.

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चतुर्थी वाले दिन ही मूर्ति ला रहे हैं,

तो दोपहर का शुभ मुहूर्त खत्म होने से पहले घर पहुंच जाएं.

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शास्त्रों के अनुसार गणपति का प्राकट्य दोपहर में हुआ था,

इसलिए मध्याह्न काल ही स्थापना के लिए सर्वोत्तम है.

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इन सामान्य नियमों के अलावा अपने घर और

कुल की पुरानी परंपराओं को प्राथमिकता जरूर दें.

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