सोमवार को मनाया जा रहा है.
मूर्ति 1-2 दिन पहले घर लाना पूरी तरह सही है.
जबकि मंत्रोच्चार से विराजना 'स्थापना' कहलाता है.
पूजा और स्थापना तय मध्याह्न मुहूर्त में ही करें.
बजाय साफ मेज या चौकी पर सम्मानपूर्वक रखें.
पूजा स्थल पर न रखें और उसे किसी स्वच्छ कपड़े से ढके रहें.
उसे पालतू जानवरों व बच्चों की पहुंच से सुरक्षित रखें.
तो दोपहर का शुभ मुहूर्त खत्म होने से पहले घर पहुंच जाएं.
इसलिए मध्याह्न काल ही स्थापना के लिए सर्वोत्तम है.
कुल की पुरानी परंपराओं को प्राथमिकता जरूर दें.