प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए विशेष माना जाता है.

10 अगस्त 2026 को प्रदोष व्रत रखा जाएगा.

Published by: रुचि शर्मा
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अगर प्रदोष व्रत की शाम अचानक मंदिर की घंटी या शिव मंदिर से आती आरती की आवाज सुनाई दे,

तो इसे धार्मिक मान्यताओं में शुभ माना जाता है.

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प्रदोष काल में अचानक शिव मंदिर के दर्शन हो जाएं या किसी काम से मंदिर के पास से गुजरना पड़े,

तो इसे कुछ लोग शुभ संकेत मानते हैं.

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बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है.

इसलिए प्रदोष व्रत की शाम बेलपत्र दिखाई देना शुभ माना जाता है.

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भगवान शिव की पूजा में सफेद फूलों का भी इस्तेमाल किया जाता है.

प्रदोष व्रत की शाम सफेद फूल दिखने को सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है.

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हिंदू धर्म में गाय को पूजनीय माना गया है.

प्रदोष व्रत की शाम गाय के दर्शन होना या उसे भोजन कराना भी शुभ माना जाता है.

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धार्मिक मान्यता के अनुसार इससे पुण्य की प्राप्ति होती है.

अगर बेलपत्र चढ़ा रहे हैं तो साफ और साबुत बेलपत्र ही इस्तेमाल करने की परंपरा है.

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प्रदोष व्रत की शाम भगवान शिव के सामने दीपक जलाते समय अगर लौ शांत और स्थिर रहे,

तो इसे भी कुछ लोग सकारात्मक संकेत मानते हैं.

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हालांकि दीपक की लौ का स्थिर या हिलना हवा और

वातावरण जैसी सामान्य वजहों से भी हो सकता है.

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