हर पूजा में पति-पत्नी के बैठने का स्थान एक

जैसा नहीं होता, जानिए शास्त्रों के अनुसार सही नियम.

Published by: अणिमा शुक्ला
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यज्ञ, हवन, श्राद्ध और कुछ विशेष धार्मिक अनुष्ठानों

में पत्नी पति की दाहिनी ओर बैठती है.

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गृहस्थ जीवन से जुड़े अधिकांश शुभ कार्यों में

पत्नी का स्थान पति की बाईं ओर माना गया है.

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विवाह की अलग-अलग रस्मों में शास्त्रों के अनुसार

पति-पत्नी के बैठने का स्थान बदलता रहता है.

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यज्ञ और हवन जैसे वैदिक कर्मों में पत्नी का दाहिनी

ओर बैठना शुभ और आवश्यक माना जाता है.

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श्राद्ध और पितृकर्म में पत्नी पति

की दाहिनी ओर बैठती है.

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भोजन और विश्राम के समय पत्नी का स्थान

पति की बाईं ओर बताया गया है.

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धर्मशास्त्रों और गृह्यसूत्रों में अलग-अलग धार्मिक

कामों के लिए साफ नियम बताए गए हैं.

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हर पूजा में एक जैसा नियम नहीं होता, इसलिए

विधि के अनुसार बैठने का स्थान चुनना चाहिए.

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पूजा, यज्ञ, विवाह और श्राद्ध में पत्नी

का स्थान अनुष्ठान के अनुसार बदलता है.

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