चीन दुनिया के छोटे-छोटे देशों पर दादागिरी जमा रहा है. उसने कई देशों को कर्ज देकर उन्हें अपने जाल में फंसाया है.



चीन के सरकारी बैंक अपने यहां कर्ज देने से ज़्यादा कर्ज दूसरे देशों को दे रहे हैं. उनका ये कदम जिनपिंग सरकार की सोची-समझी रणनीति है.



वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार 2016 में पहली बार चीन के 4 बड़े सरकारी बैंकों में से 3 ने देश में कॉर्पोरेट लोन देने से ज़्यादा बाहरी मुल्कों को कर्ज़ दिया.



चीन के कर्ज़ का दायरा बढ़ता गया. उसने दक्षिण एशिया के 3 देश- पाकिस्तान, श्रीलंका और मालदीव को कर्ज दिया.



चीन के कर्ज तले दबने पर श्रीलंका ने उसे अपना हम्बनटोटा पोर्ट सौंप दिया.



चीन मालदीव में भी कई परियोजनाओं का विकास कर रहा है.



चीन एशियाई देशों में ही नहीं बल्कि अफ़्रीकी देशों में भी आधारभूत ढांचा विकसित करने के काम में लगा है.



चीन ने अफ्रीकी देश जिबूती (Djibouti) को कर्ज दिया, और उसे अपने जाल में फांस लिया.



द सेंटर फोर ग्लोबल डिवेलपमेंट का कहना है कि वन बेल्ट वन रोड में भागीदार बनने वाले 8 देश चीनी कर्ज़ के बोझ से दबे हुए हैं.



वो देश हैं- जिबूती, किर्गिस्तान, लाओस, मालदीव, मंगोलिया, मोन्टेनेग्रो, पाकिस्तान और तजाकिस्तान.