भादों शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर ऋषि पंचमी का व्रत
पूजन किया जाता है. 28 अगस्त को है ऋषि पंचमी है.


महावारी के समय जाने-अनजाने में हुई गलती के दोष
से मुक्ति पाने के लिए ये व्रत किया जाता है.


इससे सप्तऋषियों का आशीर्वाद प्राप्त होता है. पहली बार जब
पीरियड्स आता है उसके बाद से इस व्रत की शुरुआत होती है.


स्त्रियों के माहवारी का समय समाप्त होने पर इस व्रत का
उद्यापन किया जाता है यानी वृद्धावस्था के बाद.


ऋषि पंचमी पर सप्तऋषि की पूजा होती है, पूजन में चावल,
भैंस के दूध का दही और कर्मी का साग अर्पित की जाती है.


गोबर से लीपकर सर्वतोभद्र चक्र बनाकर उस पर कलश
स्थापित करें. षोडोपचार विधि से पूजा करें.


सात ब्राह्मणों और गाय को भोजन कराना, दान-दक्षिणा
देकर, हवन करें.


यह व्रत पवित्रता और आत्मशुद्धि का प्रतीक है.