पितृ पक्ष में लोग पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं.

लेकिन पिंडदान या श्राद्ध नहीं किया तो क्या सच में पितृ कष्ट पहुंचाते हैं.

गरुड़ पुराण, महाभारत और विष्णु धर्मसूत्र जैसे ग्रंथों में श्राद्ध के बारे में बताया गया है.

श्राद्ध केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं बल्कि पूर्वजों के प्रति आभार प्रकट करने की विधि है.

ग्रंथों में यह स्पष्ट रूप से कहीं नहीं कहा गया कि, श्राद्ध न करने से पितृ श्राप देते हैं.

लेकिन यह सत्य है कि पितरों की नाराज़गी से परिवार में पितृ दोष उत्पन्न हो सकता है.

पितृ यदि अतृप्त रहे या नाराज हो जाए तो कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

किसी परिस्थितिवश श्राद्ध नहीं कर पाए तो अन्य उपायों से पितरों को संतुष्ट करना चाहिए.

कुशा तिल से तर्पण, गौ-सेवा, दान आदि से भी पितरों को प्रसन्न कर सकते हैं.