ज्योतिष शास्त्र वेद-पुराणों जितना ही प्राचीन है.

प्राचीन भारत में ज्योतिष का अर्थ ग्रह-नक्षत्र की चाल का अध्ययन था.

ग्रह-नक्षत्र की चाल के आधार पर ही शुभाशुभ कार्य किए जाते थे.

क्या सतयुग में भगवान राम भी ज्योतिष को मानते थे?

रामायण में नक्षत्र का जिक्र है. (वाल्मीकि रामायण 6/4/51-52) के अनुसार,

राम जी लक्ष्मण से कहते हैं- राक्षसों का नक्षत्र मूल है.

जिसके देवता निऋत हैं अत्यंत पीड़ित हो रहा है.

उस मूल के नियामक धूमकेतु से वह संताप का भागी हो रहा है.

यह राक्षसों के विनाश के लिए हो रहा है, क्योंकि कालगृहीत

लोगों के नक्षत्र समयानुसार ग्रहों से पीड़ित होते हैं.

इससे स्पष्ट है कि रामजी ज्योतिष और ग्रह-नक्षत्र मानते थे.