राजस्थान कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच सियासी खींचतान एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है. स्वर्गीय राजेश पायलट की पुण्यतिथि पर दौसा में आयोजित कार्यक्रम पायलट खेमे के शक्ति प्रदर्शन में बदल गया, जबकि गहलोत कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए.
हालांकि, कार्यक्रम में सचिन पायलट ने शालीनता दिखाते हुए कहा कि अशोक गहलोत उन्हें अपने बेटे की तरह प्यार करते हैं. उन्होंने कहा, “हम सब राहुल गांधी की मोहब्बत की दुकान चला रहे हैं. कांग्रेस में कोई मतभेद नहीं है.” लेकिन उनके समर्थकों ने गहलोत पर जमकर हमला बोला.
समर्थकों ने गहलोत पर निकाली भड़ास
कार्यक्रम में मौजूद पायलट समर्थक सांसदों और विधायकों ने गहलोत पर तीखे हमले किए. पूर्व मंत्री रमेश चंद मीणा ने कहा कि गहलोत कांग्रेस का बेड़ा गर्क कर रहे हैं, राहुल गांधी को दखल देना चाहिए. उन्होंने गहलोत को नार्को टेस्ट की चुनौती तक दे डाली. सांसद मुरारी लाल मीणा और विधायक डीसी बैरवा ने भी खुलकर पायलट की पैरवी की और कहा कि 2023 में अगर पायलट चेहरा होते तो कांग्रेस सरकार बना लेती.
कर्नाटक मॉडल लागू करने की मांग
पायलट समर्थकों ने मांग की कि राजस्थान में भी कर्नाटक मॉडल अपनाया जाए और सचिन पायलट को प्रदेश अध्यक्ष के साथ-साथ मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किया जाए. उन्होंने कहा कि गहलोत तीन बार मुख्यमंत्री बने, लेकिन एक बार भी सत्ता में वापसी नहीं करा सके.
गहलोत की अनुपस्थिति पर सवाल
गहलोत का कार्यक्रम में न पहुंचना भी चर्चा का विषय बना. पायलट खेमे ने इसे गहलोत की नाराजगी के रूप में देखा. अब देखना होगा कि गहलोत इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं.
कांग्रेस में जारी सियासी खींचतान
राजेश पायलट की पुण्यतिथि का कार्यक्रम पायलट खेमे के लिए शक्ति प्रदर्शन का मंच बन गया. जहां सचिन पायलट ने शीत युद्ध को विराम देने की कोशिश की, वहीं उनके समर्थकों ने गहलोत पर मोर्चा खोल दिया. यह खींचतान 2028 के विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस की रणनीति पर भी असर डाल सकती है.
