पिंक सिटी जयपुर के खो नागोरियान इलाके में अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण अग्निकांड के बाद पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल ने बड़ा और सख्त एक्शन लिया है. प्रारंभिक जांच में लापरवाही सामने आने पर थाना अधिकारी समेत आठ पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. साफ संदेश दिया गया है कि लोगों की जान से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

Continues below advertisement

पुलिस कमिश्नर ने बताया कि अंतरिम जांच रिपोर्ट के आधार पर खो नागोरियान थानाधिकारी ओमप्रकाश मातवा, हेड कांस्टेबल अशोक तथा कई कांस्टेबलों को सस्पेंड किया गया है. वहीं, घटना के तुरंत बाद पूर्वी जिले की डीसीपी रंजीता शर्मा ने भी एक एएसआई और एक हेड कांस्टेबल को निलंबित किया था. इस तरह कुल आठ पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हुई है.

जयपुर पटाखा फैक्ट्री में आग से 8 लोगों की मौत, विधायक अमीन कागजी ने प्रशासन पर उठाए सवाल

Continues below advertisement

मामले की होगी गहन जांच

मामले की गहन और निष्पक्ष जांच के लिए अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) अजय सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई है. उनके नेतृत्व में गठित जांच समिति यह पता लगाएगी कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री और पटाखों का अवैध भंडारण कैसे होता रहा और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका क्या रही. दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

घटना के बाद जयपुर पुलिस ने पूरे शहर में अवैध पटाखा फैक्ट्रियों, गोदामों और विस्फोटक सामग्री के भंडारण स्थलों के खिलाफ विशेष अभियान शुरू करने के आदेश दिए हैं. सभी जिला पुलिस अधिकारियों को अपने क्षेत्रों में सघन सर्वे और निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं.

बीट कांस्टेबल और पुलिस टीमें घर-घर जाकर भी जांच करेंगी और अवैध रूप से पटाखे या विस्फोटक सामग्री रखने वालों की पहचान करेंगी. नियमों का उल्लंघन मिलने पर तुरंत कानूनी कार्रवाई होगी. पुलिस कमिश्नर ने कहा कि जयपुर में ऐसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना सर्वोच्च प्राथमिकता है और जनसुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ अब जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी.

क्या है मामला?

खोह नागोरियान इलाके में मंगलवार (9 जून 2026) की सुबह अवैध रूप से संचालित हो रही पटाखा फैक्ट्री में आग लग गई थी. आग इतनी भीषण थी कि अंदर मौजूद लोगों को संभालने का मौका ही नहीं मिला और इस भीषण हादसे में 2 सगे भाइयों सहित आठ लोगों की मौत हो गई. ये पटाखा फेक्ट्री रिहायशी इलाके में संचालित थी. इस घटना के बाद पुलिस और जिला प्रशासन पर भी सवाल उठे थे. सवाल ये कि जब रिहायशी इलाकों में इस तरह पटाखा फैक्ट्री नहीं चलायी जा सकती तो आखिर यह किसकी शह पर चल रही थी. आस पास के लोगों का कहना था कि कई बार यहां पुलिस भी आती रही है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती. इस घटना के बाद किशनपोल विधायक अमीन कागजी  ने जिला प्रशासन पर कई गंभीर आरोप लगाए थे.