सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक के अनशन तोड़ने और सीजेपी का प्रदर्शन जारी रहने को लेकर उद्धव गुट के नेता संजय राउत ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने दो मंत्रियों के हाथ से अनशन तोड़ने को गलत ठहराया है. उनका मानना है कि अगर अनशन तोड़ना ही था तो उसी जगह पर जाकर तोड़ना चाहिए था जहां से पुलिस खींचकर ले गई थी. राउत ने कहा कि जंतर-मंतर पर जाकर सभी के सामने अनशन तोड़ते तो आप और बड़े हो जाते. 

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संजय राउत ने कहा, ''सोनम वांगचुक 26 दिन से अनशन पर बैठे थे. ये आसान नहीं है. उनका जीवन देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि वो सामाजिक कार्यों से जुड़े हैं. शिक्षा समेत अन्य कार्यों में उनका बहुत योगदान रहा है. सरकार के जो नुमाइंदे आए थे, वो चिंता का विषय है. मेरा ये मानना है कि अगर अनशन तोड़ना था उसी जगह पर तोड़ना चाहिए था जहां से पुलिस उनको खींचकर ले गई थी. हजारों बच्चे जो जंतर मंतर पर बैठे हैं, वहां पर अपनी बात रखकर ये अनशन टूटना चाहिए था.'' 

'आंदोलन को कुचलने में मोदी सरकार ने कोई कसर नहीं छोड़ी'

उन्होंने आगे कहा, ''जिस सरकार ने युवाओं, बच्चे और बच्चियों पर लाठियां चलवाई, छर्रे वाली बंदूकें चलाईं, हड्डियां तोड़ दी, सिर फोड़ दिए. उनके शरीर से खून बह रहा था. जंतर मंतर से जिस तरह से जबरदस्ती सोनम वांगचुक को उठाया गया, स्ट्रेचर तक नहीं लाया. अमित शाह की पुलिस उनको खींचकर ले गई. इस आंदोलन को कुचलने में मोदी जी की सरकार ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी और उनके दो मंत्री आपके पास आए और आपको कुछ पिलाया, चाहे जूस हो या सूप मुझे मालूम नहीं. आपने अनशन तोड़ दिया.''

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आंदोलन को ताकत देने का काम विपक्षी दलों ने भी किया- संजय राउत

संजय राउत ने ये भी कहा कि इस आंदोलन को ताकत देने का काम विपक्षी दलों ने भी किया है. कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी लाठियां खाई है. महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे के नेतृत्व में आंदोलन हो रहा है. अखिलेश यादव, डिंपल यादव भी इस आंदोलन में हैं. उन्होंने कहा, '' सरकार का इससे क्या संबंध है. सरकार तो इस आंदोलन की दुश्मन है. हमारी मांग है कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होना चाहिए. पीएम मोदी जी का इस्तीफा होना चाहिए. क्या ये मांग अब सोनम वांगचुक कर पाएंगे? 

इस आंदोलन का हर बच्चा नेता है- संजय राउत

शिवसेना (यूबीटी) सांसद ने आगे कहा, ''मुझे आश्चर्य है कि सोनम वांगचुक ने ऐसे दो मंत्रियों के हाथों अपना अनशन कैसे तोड़ सकते हैं. ये कोई व्यक्ति का आंदोलन नहीं है. इस देश में तानाशाही की सरकार चल रही है. अभिजीत दीपके का भी कहना है कि ये आंदोलन तब तक खत्म नहीं होगा जब तक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं होगा. हम उनसे सहमत हैं. ये सरकार अब डर गई है, इसलिए महाराष्ट्र समेत पूरे देश में आंदोलन जारी रहेगा. इस आंदोलन का कोई नेता नहीं है, हर बच्चा नेता है.'' 

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