पटना: जीवन में जिजिविषा और जीवन जीने की प्रेरणा बनने वाले राजकुमार वैश्य ने उम्र के उस पड़ाव पर ऐसी मुकाम हासिल की जो आम तौर पर लोगों के लिए सपना होता है. उन्होंने 98 साल की उम्र में नालंदा खुला विश्वविद्यालय से राजनितीशास्त्र में स्नात्तकोत्तर की डिग्री हासिल कर लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया था. उनकी इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनके घर जाकर उन्हे बधाई दी थी.



विश्वविद्यालय प्रशासन ने नियमों में किया बदलाव 


लेकिन सोमवार को 101 वर्ष की उम्र में राजकुमार वैश्य का निधन हो गया. उन्होंने अपने राजेन्द्र नगर स्थित आवास पर अंतिम सांस ली. जहां वे अपने पुत्र एनआईटी के सेवानिवृत प्रोफेसर डॉ.संतोष कुमार के साथ रहते थे. 1940 में बैचलर ऑफ लॉ की डिग्री हासिल करने वाले राजकुमार वैश्य ने 2015 में 96 वर्ष की उम्र में नालंदा खुला विश्वविद्यालय में दाखिला लिया था, तो विश्वविद्यालय प्रशासन ने नियमों में बदलाव करते हुए उनके प्रवेश पत्र से लेकर उनकी शिक्षा सामग्री तक उनके घर पहुंचाया था और इस तरह उन्होंने 2017 में स्नात्तकोत्तर की डिग्री हासिल की थी.


राजकुमार वैश्य लोगों के लिए एक प्रेरणा श्रोत


राजकुमार वैश्य की सबसे खास बात ये थी कि अभियंता पद से सेवानिवृत होने के चार दशक बाद इन्होंने फिर से अपनी पढ़ाई शुरु की और सफलता हासिल कर जीवन का एक नया जज्बा हासिल कर लिया. राजकुमार वैश्य उन तमाम लोगों के लिए एक प्रेरणा श्रोत हैं, जो सेवानिवृति के बाद जीवन की जंग से हारने लगते हैं. जीवन के आखिरी पड़ाव में जंग जीतने वाले इन योद्धा को आखिरी सलाम.