Flirting at Workplace after Marriage:शादीशुदा हैं, जिम्मेदार हैं, कभी धोखा नहीं दिया, फिर भी ऑफिस में जब कोई प्यारी सी मुस्कान मिलती है तो फ्लर्ट करने का मन कर जाता है. शायद आप भी खुद से यही सवाल करते हैं, "क्या मैं गलत हूं?" आप किसी के साथ फिजिकलरिलेशन में नहीं हैं, कोई अफेयर नहीं है, लेकिन बातों-बातों में जबरदस्त केमिस्ट्री बन जाती है.

क्या यह एक सामान्य मानवीय फीलिंग ह, या यह उस रिश्ते के खिलाफ जा रही है, जिसमें आपने जिंदगी भर साथ निभाने का वादा किया है? यह सवाल अकेले आपका नहीं है. बहुत से शादीशुदा लोग इसी उलझन में हैं.आइए इसे सही तरीके से समझने की कोशिश करते हैं.

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शादी के बाद फ्लर्टिंगकरना सही या गलत

फ्लर्टिंग कई बार नेचर का हिस्सा होती है. लोग आकर्षण महसूस करते हैं, हल्की-फुल्की बातचीत में चुटकी लेते हैं, कभी हंसी-मजाक चलता है. लेकिन जब यह आदत बन जाए, तो बात बिगड़ सकती है.

विशेषज्ञ मानते हैं कि फ्लर्टिंग की भी सीमाएं होती हैं. यह कब मजक से निकलकर इमोशनलचीटिंग की ओर बढ़ जाती है, इसका अंदाज कई बार हमें खुद भी नहीं होता और तब ये रिश्ते को नुकसान पहुंचा सकती है. अगर आपने कभी फिजिकल धोखा न दिया हो, तब भी ये आपके जीवनसाथी के साथ चीटिंग कर रहे हैं.

आप चीट नहीं कर रहे, लेकिन...

रिलेशनशिपएक्सपर्ट अभिनव जैन कहते हैं, "आप किसी के साथ फिजिकलीइन्वॉल्व नहीं हैं, इसका मतलब ये नहीं कि आप पूरी तरह सही हैं. रिश्ते सिर्फ शरीर से नहीं, दिल और इमोशंस से भी बनते हैं. जब आपका दिल कहीं और जुड़ने लगे, तब रिश्ते में दरार पड़ने लगती है. फ्लर्टिंग उस वक्त तक ठीक लग सकती है, जब तक उसमें किसी का दिल न लगे, लेकिन जहां इमोशनलअटैचमेंट शुरू हो, वहीं से रिश्ते की नींव हिल सकती है.

फ्लर्टिंग करने से भविष्य में क्या दिक्कतें आ सकती हैं?

  • ट्रस्ट की कमी: अगर पार्टनर को पता चला कि, आप फ्लर्ट कर रहे हैं, तो उनका भरोसा आप पर से खत्म हो सकता है.
  • गिल्ट और कन्फ्यूजन: लगातार फ्लर्ट करने के बाद आपको खुद से ही सवाल उठने लगेंगे कि, "मैं वाकई में शादी के लिए तैयार था क्या?"
  • डबल लाइफ का खतरा: दो चेहरों के साथ जीना, एक घर का और एक ऑफिस का, आपके अंदर की शांति को छीन सकता है.

क्या करना चाहिए?

  • सेल्फ-अवेयरनेस: खुद से ईमानदारी से पूछें, क्या ये मस्ती है या कुछ ज्यादा?
  • पार्टनर के साथ ट्रांसपेरेंसी: अगर रिश्तो को सच में कीमती मानते हैं तो अपनी सीमाएं खुद तय करें.
  • इमोशनल कनेक्शन बनाएं: अपने जीवनसाथी के साथ इमोशनली फिर से जुड़ने की कोशिश करें. अक्सर ऑफिस की फ्लर्टिंगतभीहोतीहै, जबघरमेंसंवादकीकमी हो.

फ्लर्टिंग करना एक ह्यूमनबिहेवियर है, लेकिन शादी एक कमिटमेंट है. अगर आप किसी को चोट नहीं पहुंचा रहे, तब भी खुद से ये जरूर पूछें, "क्या ये वही मैं हूं, जो अपने रिश्ते में पूरी तरह से होना चाहता था?" मस्ती में की गई बातें, अगर सीमाएं पार करने लगें, तो फिर वो मजाक नहीं रह जाता. रिश्ते भरोसे से चलते हैं और भरोसे की बुनियाद छोटी-छोटी बातों से बनती है या फिर टूट भी सकती है.

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