Women Health Tips:हर महिला की जिंदगी में मेनोपॉज एक ऐसा पड़ाव है, जो न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक बदलाव भी लेकर आता है. इस दौरान शरीर में हार्मोनल उतार-चढ़ाव होते हैं, जिनका सीधा असर सेहत पर पड़ता है. यही वजह है कि इस समय महिलाओं मेंहार्टअटैककाखतराकई गुना बढ़ जाता है.
गायनोलॉजिस्ट डॉ. सीमा शर्मा का कहना है कि मेनोपॉज (menopause and heart attack) के बाद महिलाओं कोअपनेहार्टकीहेल्थ को लेकर ज्यादा सावधान रहने की जरूरत होती है, वरना छोटी-सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है.
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क्यों बढ़ता है खतरा?
मेनोपॉज के बाद महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजनहार्मोन का लेवल तेजी से कम हो जाता है. यह हार्मोन हृदय को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाता है. एस्ट्रोजन की कमी से कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है, जिससे धमनियों में ब्लॉकेज बनने का रिस्क भी बढ़ता है. यही कारण है कि 45 से 55 साल की उम्र की महिलाओं में हार्टडिजीज का खतरा ज्यादा पाया जाता है.
हार्टअटैक के शुरुआती संकेत
कई बार महिलाएं हार्टअटैक(women heart health) के शुरुआती लक्षणों को सामान्य थकान या कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देती हैं.
- छाती या बाएं हाथ में दर्द
- सांस फूलना
- अचानक पसीना आना
- चक्कर आना
- ये सभी संकेत हार्टअटैक की ओर इशारा कर सकते हैं
कैसे करें बचाव?
- मेनोपॉज के बाद हेल्दीलाइफस्टाइल अपनाकर हार्टडिजीज का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है.
- हेल्दी डाइट लें – ताजे फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और हेल्दीफैट्स को डाइट में शामिल करें.
- रेगुलर एक्सरसाइज करें – रोजाना 30 मिनट वॉकिंग, योग या हल्की एक्सरसाइज करें.
- स्ट्रेस को कम करें – मेनोपॉज के दौरान तनाव अधिक बढ़ता है, इसलिए मेडिटेशन और प्राणायाम का सहारा लें.
- नियमित चेकअप कराएं – ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और शुगरलेवल समय-समय पर जरूर जांचें.
- स्मोकिंग और अल्कोहल से दूरी – ये आदतें हार्ट पर सीधा बुरा असर डालती हैं.
किन बातों का रखें ध्यान?
- पर्याप्त नींद लें और देर रात तक जागने से बचें
- शरीर के वजन को कंट्रोल में रखें
- अगर किसी महिला को पहले से डायबिटीज या हाइपरटेंशन है तो और ज्यादा सावधान रहें
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
