मतदाता सूची में किसी का नाम गलत तरीके से जुड़ गया है या किसी ऐसे व्यक्ति का नाम हटवाना है, जो अब उस पते पर नहीं रहता तो इसके लिए Form-7 का इस्तेमाल किया जाता है. चुनाव आयोग ने अब यह फॉर्म जमा करने की संख्या तय कर दी गई है. चुनाव आयोग के नए नियमों के मुताबिक, मतदाता सूची में खास पुनरीक्षण के दौरान एक व्यक्ति अधिकतम 10 फॉर्म-7 जमा कर सकेगा. वहीं, सामान्य दिनों में हर महीने अधिकतम 5 फॉर्म जमा किए जा सकेंगे.

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इस बदलाव का उद्धेश्य एक ही व्यक्ति की ओर से बड़ी संख्या में आवेदन जमा करने पर रोक लगाना और यह तय करना है कि किसी भी मतदाता का नाम बिना सही जांच के सूची से न हटे. ऐसे में जानिए Form-7 से जुड़े नए नियम और इससे जुड़ी जानकारी के बारे में.

पहले कितने फॉर्म जमा कर सकते थे?

पहले Form-7 जमा करने की कोई संख्या तय नहीं थी. ऑनलाइन फॉर्म जमा करने में एक बार में छह फॉर्म तक की सीमा बताई गई थी, लेकिन कागज पर फॉर्म जमा करने के मामले में कोई संख्या तय नहीं थी. ऐसे में कुछ जगहों पर बड़ी संख्या में फॉर्म जमा किए जाने की शिकायतें सामने आईं. अब नए नियमों के तहत एक व्यक्ति तय समय में ही सीमित संख्या में फॉर्म जमा कर सकेगा. रिपोर्ट के मुताबिक कर्नाटक में अब तक 1,10,654 Form-7 जमा किए गए हैं.

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Form-7 जमा करने के क्या नियम हैं?

Form-7 का इस्तेमाल मतदाता सूची में किसी नाम पर आपत्ति दर्ज कराने या किसी व्यक्ति का नाम हटाने की मांग करने के लिए किया जाता है. जैसे अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु हो गई है या वह दूसरी जगह रहने चला गया है या उसका नाम एक से ज्यादा जगह दर्ज है, तो तय नियमों के तहत फॉर्म भरा जा सकता है. यह फॉर्म वही व्यक्ति भर सकता है, जिसका नाम संबंधित विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में पहले से दर्ज है. फॉर्म में सही जानकारी देना और नाम हटाने की वजह बताना जरूरी है. आवेदन ऑनलाइन या ऑफलाइन, दोनों तरीकों से जमा किया जा सकता है. वहीं सिर्फ फॉर्म जमा करने से किसी का नाम मतदाता सूची से नहीं हटता. इसके लिए अधिकारियों की जांच जरूरी होती है.

फॉर्म की जांच कैसे होती है?

Form-7 जमा होने के बाद चुनाव अधिकारी आवेदन में दी गई जानकारी की जांच करते हैं. अगर किसी व्यक्ति के नाम को हटाने की मांग की गई है, तो उससे जुड़ी जानकारी की पुष्टि की जाती है. वहीं जरूरत पड़ने पर संबंधित मतदाता को नोटिस भेजा जाता है और उसे अपनी बात रखने का मौका दिया जाता है. इसके बाद अधिकारी तय करते हैं कि नाम हटाने की मांग सही है या नहीं. इसका मतलब है किसी व्यक्ति का नाम केवल Form-7 भर देने से नहीं हटाया जा सकता. वहीं अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर गलत जानकारी देता है या झूठी शिकायत करता है, तो उसके खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई भी होती है. इसलिए फॉर्म भरते समय सही जानकारी देना जरूरी है.

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