मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की सुरक्षा का दायरा बढ़ाते हुए केंद्र सरकार ने उन्हें Z+ कैटेगरी का सुरक्षा घेरा दिया है. यह फैसला मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े विवादों और दिल्ली व आगरा स्थित उनके आवासों के बाहर हुए हालिया विरोध प्रदर्शनों के बाद सुरक्षा एजेंसियों द्वारा दिए गए खतरे के आकलन के आधार पर लिया गया है. इस नई व्यवस्था के तहत न सिर्फ ज्ञानेश कुमार की व्यक्तिगत सुरक्षा कड़ी की गई है, बल्कि उनके सरकारी आवास और चुनाव आयोग कार्यालय पर भी सुरक्षा का कड़ा पहरा लगा दिया गया है. आइए जानें कि इस सुरक्षा में कितने जवान हर पल तैनात रहते हैं.

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क्या है Z+ कैटेगरी का घेरा?

भारत में विशिष्ट हस्तियों को दी जाने वाली सुरक्षा व्यवस्था को खतरे के स्तर के हिसाब से अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है. इसमें X, Y, Y+, Z और Z+ जैसी श्रेणियां शामिल हैं, जिनमें Z+ सुरक्षा को सबसे मजबूत माना जाता है. यह सुरक्षा व्यवस्था किसी पद के आधार पर नहीं, बल्कि खुफिया एजेंसियों द्वारा लगातार समीक्षा के बाद मिली गंभीर खतरों की रिपोर्ट पर दी जाती है. जो व्यक्ति अपनी संवेदनशील भूमिका या स्थिति के कारण हाई रिस्क जोन में होते हैं, उन्हें इस खास घेरे में रखा जाता है.

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कितने जवानों का रहता है पहरा?

Z+ सुरक्षा के तहत संबंधित व्यक्ति के पास हर समय लगभग 55 ट्रेंड जवानों की तैनाती रहती है. ये जवान एक साथ ड्यूटी पर नहीं रहते, बल्कि 24 घंटे लगातार सतर्कता बनाए रखने के लिए अलग-अलग शिफ्टों में काम करते हैं. इस सुरक्षा बेड़े में स्पेशल कमांडो, पुलिसकर्मी और सुरक्षा अधिकारी शामिल होते हैं. यह पूरा दस्ता वीआईपी व्यक्ति के साथ देश के किसी भी कोने में यात्रा के दौरान हमेशा साथ चलता है, ताकि हर परिस्थिति में सुरक्षा बनी रहे.

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किन बलों के जवान होते हैं शामिल?

इस खास सुरक्षा व्यवस्था को कोई एक अकेली एजेंसी संभालने के बजाय कई सुरक्षा बल मिलकर संभालते हैं. इस घेरे के सबसे मुख्य हिस्से यानि इनर कॉर्डन में करीब 10 नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) यानी ब्लैक कैट कमांडो तैनात रहते हैं. ये कमांडो बिना हथियार के लड़ाई लड़ने, अचानक हमले का जवाब देने और नजदीकी मुकाबले में माहिर होते हैं. इनके पास बेहद आधुनिक हथियार और एक-दूसरे से तुरंत संपर्क साधने वाले लेटेस्ट कम्युनिकेशन गैजेट्स मौजूद होते हैं.

बाहरी घेरे और ट्रैफिक की जिम्मेदारी

मुख्य कमांडो घेरे के अलावा बाकी की सुरक्षा व्यवस्था यानि आउटर कॉर्डन को संभालने का काम अर्धसैनिक बलों का होता है. इसमें सीआरपीएफ, आईटीबीपी और सीआईएसएफ के जवान शामिल होते हैं, जो आसपास की आवाजाही और भीड़ पर नजर रखते हैं. वहीं, जिस राज्य में वीआईपी मूवमेंट होता है, वहां की स्थानीय पुलिस भीड़ को नियंत्रित करने, रास्ता साफ कराने और राज्य की खुफिया एजेंसियों के साथ तालमेल बिठाने का काम संभालती है.

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