अगर आपकी कार की हेडलाइट पहले के मुकाबले कम रोशनी दे रही है, तो जरूरी नहीं कि उसका बल्ब खराब हो गया हो. कई बार हेडलाइट के कवर पर धूल और गंदगी जमने, प्लास्टिक के पीले पड़ने या गाड़ी के इलेक्ट्रिकल सिस्टम में खराबी आने से भी रोशनी कम हो सकती है. ऐसे में बिना जांच किए नया बल्ब लगवाना आपके पैसे बर्बाद कर सकता है.
खासकर रात में ड्राइविंग करते समय कमजोर हेडलाइट सड़क पर देखने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है. इसलिए बल्ब बदलने से पहले हेडलाइट के कवर, वायरिंग, कनेक्शन और बैटरी की स्थिति की जांच करना जरूरी है. आइए जानते हैं कि कम रोशनी की समस्या होने पर किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.
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सबसे पहले हेडलाइट का कवर चेक करें
कार की हेडलाइट का पारदर्शी कवर समय के साथ धुंधला या पीला पड़ सकता है. धूप, धूल और मौसम के असर से ऐसा हो सकता है. इससे बल्ब सही होने के बावजूद रोशनी सड़क तक ठीक से नहीं पहुंचती. सबसे पहले कवर को साफ करके देखें कि रोशनी में सुधार होता है या नहीं. अगर कवर पर ज्यादा पीलापन या धुंधलापन है, तो प्रोफेशनल क्लीनिंग या रिस्टोरेशन की जरूरत पड़ सकती है. ध्यान रखें कि कवर साफ करने के लिए तेज केमिकल या गलत क्लीनर का इस्तेमाल करने से उसे नुकसान हो सकता है.
वायरिंग और बैटरी की जांच भी जरूरी
अगर हेडलाइट बार-बार झपकती है या उसकी रोशनी कभी तेज तो कभी कम होती है, तो समस्या वायरिंग, ढीले कनेक्शन या इलेक्ट्रिकल सिस्टम में हो सकती है. कमजोर बैटरी या चार्जिंग सिस्टम की खराबी भी लाइट की चमक को प्रभावित कर सकती है. अगर दोनों हेडलाइट की रोशनी कम हो गई है, तो बैटरी और अल्टरनेटर की जांच करवाना उपयोगी है. वहीं, अगर सिर्फ एक हेडलाइट कमजोर है, तो उसके बल्ब, सॉकेट और वायरिंग को चेक करना चाहिए. सही कारण पता करने के लिए मैकेनिक से इलेक्ट्रिकल जांच करवाएं.
सही बल्ब लगवाएं, हेडलाइट की सेटिंग भी देखें
अगर जांच में बल्ब खराब मिलता है, तो कार के मॉडल के अनुसार सही टाइप और निर्धारित पावर वाला बल्ब ही लगवाएं. ज्यादा वाट का बल्ब लगाने से वायरिंग और इलेक्ट्रिकल सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. नया बल्ब लगाने के बाद यह भी जांचना जरूरी है कि हेडलाइट की रोशनी सड़क पर सही दिशा में पड़ रही है या नहीं. गलत एंगल पर लगी हेडलाइट सामने से आने वाले ड्राइवरों को परेशान कर सकती है और आपकी सड़क देखने की क्षमता भी घटा सकती है. इसलिए बल्ब बदलने या हेडलाइट असेंबली की मरम्मत के बाद जरूरत पड़ने पर उसकी सेटिंग किसी योग्य मैकेनिक से करवाएं.
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