Chandra Grahan 2026 Date and Time in India: साल 2026 में कुल चार ग्रहण लगेंगे. इनमें दो चंद्र ग्रहण और दो सूर्य ग्रहण है. साल का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च 2026 को होली पर लग चुका है और अब दूसरे चंद्र ग्रहण को लेकर लोग काफी उत्साहित हैं. बता दें कि, साल 2026 का दूसरा चंद्र ग्रहण 27 और 28 अगस्त की दरमियानी रात को लगेगा.

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खासकर खगोलीय घटनाओं में रुचि रखने वाले ग्रहण को देखने के लिए उत्साहित होते हैं. साल का दूसरा चंद्र ग्रहण भले ही आंशिक रहेगा, लेकिन यह गहरा लाल दिखाई पड़ेगा, जिसे वैज्ञानिकों ने ब्लड मून का नाम दिया है. हालांकि आंशिक ग्रहण होने के कारण साल का दूसरा चंद्र ग्रहण भारत में नजर नहीं आएगा और सूतक काल भी मान्य नहीं रहेगा. लेकिन यह ग्रहण पूर्ण चंद्र ग्रहण का अहसास कराएगा, क्योंकि ग्रहण की अवधि मे पृथ्वी की गहरी छाया चंद्रमा के लगभग 93 प्रतिशत हिस्से को ढंक लेगी और जब पृथ्वी की परछाई चंद्रमा पर पड़ेगी तो सूर्य कि किरणों पृथ्वी के वायुमंडल से टकराकर मुड़ जाएगी, जिससे कि चांद गहरा लाल दिखाई देगा.

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चंद्र ग्रहण का समय (Lunar Eclispe 2026 Timing)

सावन पूर्णिमा पर लगने वाले चंद्र ग्रहण की अवधि काफी लंबी होगी. ग्रहण भारतीय समयानुसार सुबह 06.53 (01.23 UTC) पर शुरू होगा और दोपहर 12:32 (04.41 UTC) पर समाप्त हो जाएगा. ग्रहण की कुल अवधि लगभग 5 घंटे 39 मिनट रहेगी. लेकिन इस समय भारत में दिन का समय रहेगा और सूरज की तेज रोशनी के कारण दिखाई नहीं देगा.

क्या मान्य होगा सूतक काल (Chandra Grahan 2026 Sutak Kaal)

चंद्र ग्रहण से 3 प्रहर पहले (9 घंटे) सूतक लगाता है. इस समय मंदिर के पट बंद कर दिए जाते हैं. सूतक से लेकर ग्रहण खत्म होने की अवधि तक पूजा-पाठ, हवन आदि जैसे धार्मिक कार्य वर्जित होते हैं. वहीं ग्रहण के दौरान खाने-पीने, बाहर जाने, मांगलिक कार्य करने आदि पर भी रोक रहती है. खासकर गर्भवती महिलाओं को ग्रहण की अवधि में विशेष नियमों का पालन करते हुए सतर्कता बरतने की सलाह की जाती है. लेकिन साल का दूसरा चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए ये सारे नियम मान्य नहीं होंगे.

कहां दिखाई देगा साल का आखिरी चंद्र ग्रहण (Where to Visible Lunar Eclipse)

भले ही साल का दूसरा और आखिर चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. लेकिन इसे भौगोलिक रूप से बड़े क्षेत्र में देखा जा सकेगा. चंद्र ग्रहण उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के पश्चिमी हिस्से और पूर्वी प्रशांत महासागर में दिखाई देगा.

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