यहूदी धर्म छोड़कर मुसलमान बनने पर इस शख्स का सिर काट दिया गया



इस शक्स का नाम सरमद कशानी था जिसने यहूदी धर्म छोड़कर इस्लाम धर्म अपना लिया था



सरमद काशानी अपने वक्त के जाने माने सूफी हुआ करते थे और जामा मस्जिद की सीढ़ियों पर रहते थे



जब सरमद काशानी दिल्ली आए तब मुगल बादशाह शाहजहां का आखरी दौर चल रहा था



सरमद का सिर काटने की मुख्य वजह ये थी की उसने कलमा पूरा नहीं पढ़ा था



कलमा इस्लाम धर्म का महत्वपर्ण हिस्सा है जो हर मुसलमान का इमान होता है



इसके शब्द हैं 'कोई खुदा नहीं है अल्लाह के सिवा'



सरमद काशानी कलिमा का केवल आधा वाक्य ही पढ़ते थे कि कोई खुदा नहीं है



मुगल साम्राज्य में एक काजी के शिकायत करने पर औरंजेब ने उनका सिर काटने का हुक्म दे दिया



सूफी सरमद काशानी का मजार उसी जगह बनाया गया जहां उनका सर कलम किया गया था