रूस-यूक्रेन जंग के बीच NATO देशों की एयरफोर्स अब तक का सबसे बड़ा युद्धाभ्यास करने जा रही हैं.
नाटो देशों की वायुसेनाओं का युद्धाभ्यास 12 जून से शुरू होगा. इसे 'एयर डिफेंडर-23' नाम दिया गया है.
10 दिनों तक चलने वाली मिलिट्री एक्सर्साइज में 25 NATO देशों के 220 मिलिट्री एयरक्राफ्ट हिस्सा लेंगे.
बता दें कि NATO एक सैन्य संगठन है. जिसका लीडर अमेरिका है. NATO में 30 देश शामिल हैं.
इस युद्धाभ्यास पर अमेरिका में जर्मनी की राजदूत ने कहा कि हम इसे केवल अपने बचाव के नजरिए से कर रहे हैं.
सभी NATO देशों की वायु सेनाएं अपने हथियारों और विमानों को दुनिया के सामने पेश करने के लिए तैयार कर रही हैं.
NATO का फुलफॉर्म है- नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी आॅर्गनाइजेशन. इसकी स्थापना 1949 में हुई थी.
1991 में सोवियत संघ के 15 हिस्सों में टूटने के बाद NATO ने खासतौर पर यूरोप और सोवियत संघ का हिस्सा रहे देशों के बीच तेजी से प्रसार किया.
यूक्रेन कई साल से NATO से जुड़ने की कोशिश करता रहा है. उसकी हालिया कोशिश की वजह से ही रूस ने यूक्रेन पर हमला किया है.
यूक्रेन की रूस के साथ 2200 किमी से ज्यादा लंबी सीमा है. रूस का मानना है कि अगर यूक्रेन NATO से जुड़ता है तो NATO सेनाएं यूक्रेन के बहाने रूसी सीमा तक पहुंच जाएंगी.
यूक्रेन के NATO से जुड़ने पर रूस की राजधानी मॉस्को की पश्चिमी देशों से दूरी केवल 640 किलोमीटर रह जाएगी. रूस ये नहीं चाहता.
रूस चाहता है कि यूक्रेन ये गांरटी दे कि वह कभी भी NATO से नहीं जुड़ेगा.